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Himachal: स्टार्टअप फंड से लेकर पांच लाख रोजगार तक, कांग्रेस के 10 वादे, जानें BJP और AAP ने क्या किया?

Fri, 14 Oct 2022 03:43 PM IST
हिमांशु मिश्रा इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस ने चुनाव को लेकर एक महीने पहले ही 10 गारंटी जारी कर दी है। इसमें रोजगार से लेकर शिक्षा और मुफ्त बिजली तक वादे किए गए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इन वादों के सियासी मायने क्या हैं? इन वादों से कांग्रेस को कितना फायदा हो सकता है? भाजपा और आम आदमी पार्टी ने क्या वादे किए हैं? 
 
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हिमाचल प्रदेश चुनाव 2022 - फोटो : अमर उजाला
चुनाव आयोग ने आज हिमाचल प्रदेश की चुनावी तिथियों का एलान कर दिया। 12 नवंबर को एक चरण में मतदान होगा। इसके लिए 17 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी। मतगणना आठ दिसंबर को होगी। इसके लिए राजनीतिक पार्टियां जोरशोर से तैयारियां कर रहीं हैं। कांग्रेस ने चुनाव को लेकर एक महीने पहले ही 10 गारंटी जारी कर दी है। इसमें रोजगार से लेकर शिक्षा और मुफ्त बिजली तक वादे किए गए हैं।

ऐसे में आइए जानते हैं इन वादों के सियासी मायने क्या हैं? इन वादों से कांग्रेस को कितना फायदा हो सकता है? भाजपा और आम आदमी पार्टी ने क्या वादे किए हैं? 
 
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पुरानी पेंशन - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस के 10 वादे और उसके मायने

1. पुरानी पेंशन स्कीम होगी बहाल: कांग्रेस का यह सबसे बड़ा दांव है। कांग्रेस ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन स्कीम बहाल कर दी है। इसका वादा मार्च में हुए पांच राज्यों के चुनाव में भी किया गया था। हालांकि, कांग्रेस को इन चुनावों में इसका फायदा नहीं मिला था। 

हिमाचल प्रदेश की बात करें तो यहां विभिन्न विभागों में करीब सवा लाख सरकारी कर्मचारी हैं। प्रदेश में चुनावी लड़ाई अभी तक भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रही है। कांग्रेस की कोशिश होगी कि वह इस वादे के जरिए सरकारी कर्मचारियों को अपने पाले में ले आए। 
 
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महिलाओं के लिए भी हुए चुनावी वादे - फोटो : अमर उजाला
2. महिलाओं को मिलेंगे हर महीने 1500 रुपये: हिमाचल प्रदेश की कुल अनुमानित जनसंख्या 75 लाख है। इनमें 38 लाख के करीब पुरुष, जबकि 36.9 लाख महिला हैं। कांग्रेस अपने इस वादे के जरिए आधी आबादी का वोट मिलने की उम्मीद कर रही है। उत्तर प्रदेश चुनाव में भी कांग्रेस ने ये वादा किया था, हालांकि वहां इसका कोई खास असर नहीं हुआ। आम आदमी पार्टी भी महिलाओं को भत्ता देने का एलान अलग-अलग चुनावों में करती रही है। कहा जा रहा है कि इस एलान के जरिए कांग्रेस दोनों विरोधी पार्टियों के मुद्दे की काट निकालने की कोशिश कर रही है।  
 

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फ्री बिजली - फोटो : अमर उजाला
3. 300 यूनिट बिजली फ्री: सबसे पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने 100 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया था। अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में ऐतिहासिक जीत भी मिली। अब ये वादा धीरे-धीरे सभी राजनीतिक पार्टियां करने लगीं हैं। भाजपा ने भी यूपी में किसानों को मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में ये वादा करके ज्यादा से ज्यादा वोटर्स को अपने पाले में करने की कोशिश की है। 
 
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युवाओं के लिए भी हुए वादे - फोटो : अमर उजाला
4. पांच लाख युवाओं को रोजगार: कांग्रेस का ये चुनावी वादा भी काफी बड़ा है। हालांकि, अब चुनावी घोषणा पत्रों से लगभग सभी राजनीतिक दल सरकारी नौकरी का वादा करने से बचने लगे हैं। इन पांच लाख रोजगार में प्राइवेट नौकरियों को भी गिना जाएगा।  
 
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सरकार खरीदेगी गोबर - फोटो : अमर उजाला
5. दो रुपये प्रति किलो में होगी गोबर खरीददारी : छत्तीसगढ़ से इसकी शुरुआत हुई है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार अभी गाय-भैंस पालकों से दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से गोबर खरीद रही है। इस स्कीम के जरिए कांग्रेस हिमाचल प्रदेश के किसानों तक पहुंचने की कोशिश में है। 
 
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सेब की खेती - फोटो : अमर उजाला
6. बागवान तय करेंगे फलों की कीमत: हिमाचल में सेब व अन्य फलों की खेती होती है। ऐसे में कांग्रेस का ये बहुत बड़ा वादा माना जा रहा है। अभी तक सरकार फलों की कीमत तय करती थी। अब कांग्रेस ने वादा किया है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो बागवान अपने फलों की कीमत खुद तय कर पाएंगे। इसके जरिए लाखों किसानों को फायदा होगा। 
 

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स्टार्टअप - फोटो : अमर उजाला
7. युवाओं के लिए 680 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड: चुनावी गारंटी में 680 करोड़ रुपये का फंड स्टार्टअप के लिए देने का भी एलान किया गया है। इससे ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने की कोशिश है। केंद्र की नरेंद्र मोदी  सरकार  स्टार्टअप को काफी बढ़ावा दे रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस वादे के जरिए कांग्रेस ने मोदी सरकार की इस स्कीम को काउंटर करने की कोशिश कर रही है।
 

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छत्तीसगढ़ की तर्ज पर हिमाचल में भी मोबाइल क्लिनिक शुरू करने का वादा - फोटो : अमर उजाला
8. मोबाइल क्लीनिक से होगा हर गांव में मुफ्त इलाज: पहाड़ी इलाकों में आज भी चिकित्सा सुविधा बड़ी चुनौती है। ऐसे में कांग्रेस ने मोबाइल क्लीनिक के जरिए गांव-गांव और हर घर तक पैठ बनाने का प्लान किया है। 
 

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अंग्रेजी स्कूल खोलने का वादा - फोटो : अमर उजाला
9. हर विधानसभा क्षेत्र में खुलेंगे चार अंग्रेजी मीडियम स्कूल: दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार स्कूलों के मामले में खुद को मॉडल के तौर पर पेश करती है। केजरीवाल सारकार का दावा है कि उन्होंने दिल्ली में सैकड़ों सरकारी अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोले हैं, जिससे गरीब घरों के बच्चों को फायदा मिल रहा है। अब कांग्रेस ने इसी तरह की योजना को हिमाचल में लागू करने का वादा किया है।   
 

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गाय का दूध भी खरीदेगी सरकार - फोटो : अमर उजाला
10. गाय-भैंस पालकों से हर दिन 10 लीटर दूध खरीदेंगे: किसानों को अपनी ओर खींचने के लिए कांग्रेस का यह वादा भी काफी अहम है। इसके जरिए अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो हर पशु पालक से हर दिन 10 लीटर दूध खरीदा जाएगा। हिमाचल में बड़ी संख्या में पशु पालन का काम भी होता है। ऐसे में कांग्रेस इस वादे से फायदा मिलने की उम्मीद कर रही है।  
 

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अरविंद केजरीवाल(फाइल) - फोटो : पीटीआई
आप ने क्या वादे किए? 
आम आदमी पार्टी ने 8.70 लाख बेरोजगारों को तीन हजार रुपये मासिक भत्ता देने का वादा किया है। इसके अलावा तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने का भी वादा किया है। स्कूलों को बेहतर करना, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना, किसानों के लिए भी आम आदमी पार्टी ने कई वादे किए हैं। अभी इनका आधिकारिक एलान भी होना है।  
 

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पीएम मोदी और जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
भाजपा के क्या हैं वादे?
अभी तक भाजपा की तरफ से कोई भी चुनावी वादे नहीं किए गए हैं। हालांकि, बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुआई में पार्टी अपने विकास कार्यों के भरोसे मैदान में उतरेगी। इसके अलावा किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए कुछ बड़े एलान भी भाजपा कर सकती है। 
 
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चुनावी वादे - फोटो : अमर उजाला
मुफ्त वादें कितने कारगर साबित होंगे? 
हमने यही सवाल वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार से पूछा। उन्होंने कहा, 'हिमाचल प्रदेश में चुनाव को लेकर सभी दल मुफ्त की रेवड़ी बांटने का एलान कर रहे हैं। इससे राजनीतिक दलों को भले ही फायदा मिल जाए, लेकिन हिमाचल प्रदेश को नुकसान ही उठाना पड़ेगा। मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए हिमाचल प्रदेश का कुल बजट 51,365 करोड़ रुपये है। इसमें से 37,312 करोड़ रुपये आय है और व्यय 37,034 करोड़ रुपये है। सरकार को हर साल सात से नौ हजार करोड़ रुपये कर्ज लेना पड़ता है। इस तरह से अभी हिमाचल प्रदेश पर कुल 67,500 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस साल दिसंबर तक ये आंकड़ा 70 हजार करोड़ रुपये को पार हो जाएगा।'

प्रमोद आगे कहते हैं, 'ऐसी स्थिति में मुफ्त योजनाओं के बल पर कोई भी सरकार आए, नुकसान हिमाचल प्रदेश के लोगों को ही उठाना पड़ेगा। जो दल जितनी मुफ्त योजनाओं का वादा करेगा, उसकी सरकार आने पर उतनी ही समस्या होगी। उसे पूरा करने के लिए फिर हर महीने 12 से 15 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा।'
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