न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा, "हेनरी अष्टम द्वारा बनाया गये बगरी अधिनियम, 1533 में बगरी के लिये मौत की सजा का प्रावधान था और यह कानून तकरीबन 300 साल तक रहा। उसके बाद इसे रद्द कर दिया गया और उसकी जगह व्यक्ति के खिलाफ अपराध अधिनियम, 1828 बनाया गया।