Voters in Line
- फोटो : Amar ujala
आखिर कम वोट पड़ने का मतलब क्या है?
हरियाणा में 2009 के विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 72.3 था और 2014 में करीब चार प्रतिशत बढ़ गया। चार प्रतिशत ज्यादा टर्नआउट रहा तो हरियाणा में सरकार बदल गई। पहली बार बीजेपी प्रदेश में अपने दम पर सत्ता में आई। 2014 में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता उफान पर थी और बीजेपी ने इसका फायदा हरियाणा में भी उठाया।
बीजेपी का 2009 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में वोट शेयर 9.1 फीसदी था जो 2014 में 33.2 फीसदी पर पहुंच गया। 2009 से पहले हरियाणा में बीजेपी ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी आईएनएलडी की जूनियर हुआ करती थी। जब 2009 में पहली बार बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया तो चार सीटों पर ही सिमट गई थी।
2005 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 71.9 फीसदी लोगों ने वोट किया था और सरकार बदल गई थी। कांग्रेस आईएनएलडी को हराकर सत्ता में आई थी। साल 2000 के विधानसभा चुनाव में 69 फीसदी टर्नआउट रहा था।
मतलब 2005 और 2009 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के टर्नआउट ट्रेंड को देखें तो पता चलता है कि वोटिंग प्रतिशत बढ़ने पर सत्ताधारी पार्टी को ही जीत मिली है। लेकिन 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में ऐसा नहीं हुआ।
2014 में 2009 के
हरियाणा विधानसभा चुनाव की तुलना मे वोटिंग प्रतिशत लगभग चार फीसदी ज्यादा था लेकिन सरकार बदल गई। लेकिन दिलचस्प है कि 2014 में जिस उत्साह से हरियाणा की जनता ने बीजेपी को सत्ता सौंपी थी वो उत्साह इस बार नहीं दिखा।
हरियाणा में साल दो हजार से लगातार वोट प्रतिशत बढ़ता रहा है। 2000 के बाद पहली बार हुआ है जब हरियाणा विधानसभा चुनाव में वोटिंग टर्नआउट में भारी गिरावट आई है। इतना को साफ है कि 2014 में हरियाणा के लोगों ने बीजेपी के प्रति जितनी दिलचस्पी दिखाई थी उतनी इस बार नहीं दिखी।