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ग्रेप पाबंदी: 'प्रभावित श्रमिकों को मुआवजा दें राज्य', शीर्ष कोर्ट का यूपी-हरियाणा-राजस्थान सरकार को निर्देश

Sun, 02 Mar 2025 07:47 AM IST
अभिषेक दीक्षित अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल 2 दिसंबर को एनसीआर राज्यों के मुख्य सचिवों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होने का निर्देश दिया था। उन्हें यह बताना था कि प्रतिबंधों के कारण बिना काम के रह गए निर्माण श्रमिकों को कोई गुजारा भत्ता दिया गया है या नहीं। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को निर्देश दिया कि वे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप उपायों के कारण गतिविधियां बंद होने से प्रभावित होने पर निर्माण श्रमिकों को मुआवजा दें। भले ही इस पर कोई विशेष अदालती आदेश न हो। जस्टिस अभय एस ओका व जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि श्रम उपकर के रूप में एकत्र धन से प्रभावित श्रमिकों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के तहत प्रदूषण रोधी उपायों को दिल्ली-एनसीआर में औसत वायु गुणवत्ता के आधार पर लागू किया जाता है। 

पीठ ने आदेश में कहा, 'जहां तक 2024 और 2025 का सवाल है, हमने राज्य सरकारों को मुआवजा देने के निर्देश जारी किए हैं। हम स्पष्ट करते हैं कि इसके बाद जब भी ग्रेप उपायों के कारण निर्माण गतिविधियों को बंद करना होगा, तो इस अदालत के 24 नवंबर, 2021 के निर्देशों के अनुसार प्रभावित श्रमिकों को मुआवजा दिया जाएगा। भले ही मुआवजा देने के लिए अदालत का कोई विशेष निर्देश न हो, फिर भी एनसीआर वाले राज्यों को मुआवजा देना होगा।'
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा ने 4.93 लाख लोगों को दिया मुआवजा 
पीठ को सुनवाई के दौरान बताया गया कि हरियाणा ने ग्रेप-4 के पहले व दूसरे चरण में क्रमशः 2,68,759 व 2,24,881 प्रभावित श्रमिकों को मुआवजा दिया। इसके अलावा, इस साल जनवरी में ग्रेप-4 अवधि के लिए लगभग 95,000 श्रमिकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
दिल्ली ने 93,272 श्रमिकों को दिया मुआवजा 
दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि 93,272 श्रमिकों को मुआवजा दिया जा चुका है और शेष पंजीकृत श्रमिकों के लिए सत्यापन प्रक्रिया जारी है। राजस्थान सरकार ने खुलासा किया, 3,197 श्रमिकों को मुआवजा दिया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश ने बताया कि ग्रेप के तीन अलग-अलग चरणों में प्रभावित 4,88,246 व 4,84,157 व 691 श्रमिकों को मुआवजा दिया गया है। 

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Supreme Court - फोटो : ANI
मुख्य सचिवों को भी किया था तलब 
शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल 2 दिसंबर को एनसीआर राज्यों के मुख्य सचिवों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होने का निर्देश दिया था। उन्हें यह बताना था कि प्रतिबंधों के कारण बिना काम के रह गए निर्माण श्रमिकों को कोई गुजारा भत्ता दिया गया है या नहीं। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
शीर्ष अदालत ने की थी दिल्ली सरकार की खिंचाई 
शीर्ष कोर्ट ने पहले निर्माण श्रमिकों को पूर्ण निर्वाह भत्ता न देने पर दिल्ली सरकार की खिंचाई की थी। कोर्ट ने सरकार को श्रमिकों के पंजीकरण के लिए तुरंत श्रमिक संघ की बैठक बुलाने को भी कहा था। राजस्थान के लिए भी इसी प्रकार के निर्देश दिए गए। राजस्थान के दो जिले भरतपुर और अलवर, एनसीआर में आते हैं। इसके अलावा हरियाणा के 14 जिले और उत्तर प्रदेश के आठ जिले एनसीआर में आते हैं। वहां भी श्रमिक यूनियनों की बैठक बुलाने और निर्वाह भत्ता देने के निर्देश दिए गए थे। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
2021 में दिया था ये निर्देश 
सुप्रीम कोर्ट के 24 नवंबर, 2021 के आदेश ने एनसीआर में निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। इसने राज्यों को निर्माण श्रमिकों को जीविका प्रदान करने व निषेध अवधि में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत मजदूरी भुगतान करने के लिए श्रम उपकर निधि का उपयोग करने का भी निर्देश दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
ग्रेप-3 व 4 में गैर प्रदूषणकारी निर्माण गतिविधियां जारी रखने की मांग खारिज
कैंपेन कमेटी-कंस्ट्रक्शन लेबर के वकील ने तर्क दिया कि ग्रेप-3 और ग्रेप-4 प्रतिबंधों के दौरान भी गैर-प्रदूषणकारी निर्माण गतिविधियां जारी रहनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
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