फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खसरे से लड़ने के लिए सबसे बड़े अभियान की शुरुआत, 3.4 करोड़ बच्चों को लगेगा टीका

Fri, 11 Aug 2017 06:12 PM IST
amarujala.com- Written By: अनंत पालीवाल
विज्ञापन
unicef
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने मंगलवार से खसरा रूबैला जैसी जानलेवा बीमारियों से लड़ने के लिए उत्तर भारत के तीन राज्यों में सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के दूसरे चरण में 3.4 करोड़ बच्चों को मुफ्त टीका लगाया जाएगा। 
विज्ञापन

सोनिया सरकार, यूनिसेफ
यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), सीडीसी अटलांटा और लांयस क्लब के सहयोग से केंद्र सरकार के परिवार कल्याण मंत्रालय ने चंडीगढ़ में आयोजित क्षेत्रीय मीडिया वर्कशॉप से इसकी जानकारी दी। 

डा. प्रदीप हल्दर, भारत सरकार
वर्कशॉप का शुभारंभ करते हुए परिवार कल्याण मंत्रालय में टीकाकरण मामलों के डिप्टी कमिश्नर डा. प्रदीप हल्दर ने कहा कि यह टीकाकरण देश के आठ राज्यों में शुरू हुआ, जिसमें से तीन राज्य उत्तर भारत से हैं। जहां पहले चरण में दक्षिण भारत के पांच राज्यों में इसको शुरू किया गया था, जिसमें 3.3 करोड़ बच्चों को मुफ्त टीके लगाए गए थे। 

वहीं दूसरा चरण अगस्त से देश के 8 राज्यों में शुरू किया गया है। जिन राज्यों में यह टीका लगाया जाएगा, उनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, केरल, उत्तराखंड, दमन और दीव, दादर और नगर हवेली राज्यों में 9 महीने से 15 साल तक के 3.4 करोड़ बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। 

डा. प्रदीप हल्दर ने अभियान को शुरू करते हुए कहा कि टीकाकरण बच्चों के जीवन और भविष्य की रक्षा करने के सबसे प्रभावी और उचित लागत वाले तरीकों में से एक है। पूर्ण प्रतिरक्षण के माध्यम से, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जीवन बचाने वाले टीके का लाभ हर बच्चे तक पहुंचें। हाल ही में शुरू हुई खसरा रूबैला के टीके को अभियान के दौरान विद्यालयों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। 

देश में 36 फीसदी बच्चों की मौत खसरे से
इस अवसर पर यूनिसेफ की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2015 में करीब 36 फीसदी बच्चों की मौत खसरे से हुई थी। जहां पूरे विश्व में खसरे से 134,200 बच्चों की मौत हुई, वहीं इसमें से 49200 मौत अकेले भारत में हुई थीं। सरकार ने 2020 तक खसरे को भारत से पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। भारत में दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। प्रत्येक साल लगभग 26 मिलियन नए जन्मजात शिशुओं का टीकाकरण किया जाता है। पूरे देश में हर साल 9 मिलियन से अधिक टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाते हैं।

भारत में केवल 65 फीसदी बच्चों को ही उनके जीवन के पहले वर्ष के दौरान आवश्यक सभी टीके लगाये जा सके। इस समस्या से निपटने के लिए, भारत सरकार ने पूर्व चिन्हित जिलों को केंद्रित करते हुए देशभर में एक आरआई अभियान, मिशन इंद्रधनुष की शुरूआत की है, जो टीकाकरण से वंचित सभी बच्चों या आंशिक रूप से टीकाकरण से वंचित बच्चों पर केन्द्रित है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के उप क्षेत्रीय टीम लीडर डॉ श्रीनिवासन से कहा कि बच्चों के मुख्य जानलेवा रोगों में से एक तथा अपरिवर्तनीय पैदाइसी दोषों के लिए जिम्मेदार पैदाइसी रूबैला सिंड्रोम (सीआरएस) के खिलाफ विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरूआत करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत को बधाई देता है। भारत ने पहले स्मॉलपॉक्स, पोलियो, मातृ एवं नवजात टेटनस एंडयॉज के खिलाफ काफी अच्छा कार्य किया है। भविष्य में भी खसरे के खिलाफ यह अभियान कई अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को प्राप्त करने में मदद करेगा।
विज्ञापन

यूनिसेफ इंडिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सतीश ने कहा कि पोलियो के खिलाफ लड़ाई में मीडिया हमारे लंबे समय से चलने वाले सहयोगी रही है। अब हम सभी बच्चों, चाहे वो कहीं भी रहते हों, का टीकाकरण सुनिश्चित करने में मीडिया को सहयोग चाहते हैं। टीकाकरण न केवल बच्चों की जीवन की रक्षा करती है, बल्कि उनके स्वस्थ एवं उपयोगी भविष्य को भी सुनिश्चित करती है और यह सबसे अधिक लागत प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में से एक है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें