महाभारत काल में समाज के संतुलन के लिए कृष्ण ने अर्जुन को युद्घ लड़ने के लिए प्रेरित किया था। उस ज्ञान को आज लोग भूल चुके हैं और इसीलिए भारत पूरी तरह से भ्रष्ट हो गया है। भेदभाव और शोषण इतना बढ़ गया है कि अब इसके खिलाफ लड़ना जरूरी है। आइए जानते हैं कृष्ण के वो पांच कदम जिनकी हमें आज भी जरूरत है।
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कृष्ण के वो पांच कदम जिनकी आज भी है जरूरत
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युद्ध रणनीति- अर्जुन मैदान में पहुंचे तो उन्हें अपनों के मारे जाने का डर था। तब कृष्ण ने उन्हें समझाया कि अगर आज तुम उन्हें छोड़ दोगे तो वो तुम्हारा अस्तित्व समाप्त कर देंगे। आज हमारे अंदर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार जैसे विकार बढ़ गए हैं। ये हमारे अपने ही हैं। अर्जुन की तरह हमें भी ज्ञान धारण कर इन विकारों को समाप्त करना होगा। नहीं तो ये हमारे पतन का कारण बनेंगे।
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कृष्ण के वो पांच कदम जिनकी आज भी है जरूरत
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सत्य का साथ- बचपन से सुनते आए हैं कि झूठ बोलना पाप है। लेकिन इस पर अमल आज तक नहीं किया। लोग झूठ बोलने से पहले एक बार सोचते भी नहीं। शायद आधी से ज्यादा परेशानियों का कारण हमारा झूठ बोलना ही है। झूठ बोलना भी एक बुरा कर्म है। जिसका फल भी हमें बुरा ही मिलता है। सत्य की राह में भीड़ कम होती है इसलिए हमेशा इसी रास्ते पर चलें।
कृष्ण के वो पांच कदम जिनकी आज भी है जरूरत
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जनमाष्टमी
निस्वार्थ प्रेम- कृष्ण ने राधा से निस्वार्थ प्रेम किया। ऐसे ही प्रेम की जरूरत आज संसार को है। हम अपने घर में ही देखें तो कलह होना आम बात हो गई है। दहेज और लोभ के लिए प्रेम किया जाने लगा है। ऐसा रोकने की जरूरत है।
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कृष्ण के वो पांच कदम जिनकी आज भी है जरूरत
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जनमाष्टमी
गीता का सार- कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि जो आज तुम्हारा है वो कल किसी और का होगा इसलिए मोह न करो। जो है वो आज है कल की चिंता कर आज खराब मत करो। इंसान रोज गीता पढ़ता है लेकिन कुछ सीखता नहीं। वो घमंड में इतना चूर है कि अपने आगे किसी को कुछ समझता नहीं। दूसरों को नीचा दिखाने में इंसान को मजा आने लगी है। हमें फिर से कृष्ण के इस संदेश को खुद में धारण करने की जरूरत है। तभी कलियुग में चल रही इस महाभारत को समाप्त कर सकेंगे।
द्रौपदी की मदद- संसार में महिलाओं पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है। पुरुष आज भी महिलाओं को खुद से कमजोर समझते हैं। कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाने के लिए उनकी साड़ी लंबी कर दी थी। लेकिन आज इंसान महिलाओं की लाज उतारने पर तुला है। देश की महिलाओं को जरूरत है ऐसे भाइयों की जो उनकी लाज उतारे नहीं बल्कि कृष्ण की तरह उनकी इज्जत बचा लें।