यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सपा और साइकिल का हकदार बनते ही पिता मुलायम-शिवपाल के पास अब केवल 5 विकल्प बचे हैं।
विज्ञापन
2 of 6
मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
पहला रास्ता तो यही है कि मुलायम को बेटे अखिलेश का साथ देना चाहिए। साथ ही, अपने समर्थकों से अखिलेश का सहयोग करने की अपील करनी चाहिए। अखिलेश खुद आज मुलायम को पार्टी का असली चेहरा बता चुके हैं। ऐसे में पार्टी भी मजबूत होगी और उनका राजनैतिक महत्व भी बरकरार रहेगा।
विज्ञापन
3 of 6
मुलायम से मिलते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
अगर मुलायम साइकिल लेने की जिद पर कायम रहते हैं तो वे चाहें तो कोर्ट मे चुनाव आयोग के फैसले को चैलेंज कर सकते हैं। ऐसे में पहले चरण की नोटिफिकेशन के चलते मुलायम को तुरंत राहत नहीं मिलेगी। हालांकि साइकिल का निशान फ्रीज हो सकता है, लेकिन दोनों चुनाव आयोग के फैसले को मान्य बता चुके हैं।
4 of 6
मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
अगर मुलायम को चुनाव लड़ना ही है तो वे उन्हें अपने समर्थकों के साथ ई पार्टी और चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग में गुहार लगानी होगी। हालांकि इतना तय है कि अगर ऐसा हुआ तो चुनाव में उन्हें और उनके बेटे को नुकसान होना तय है। राजनीतिक विशलेक्षक भी यही मानते हैं।
विज्ञापन
5 of 6
अखिलेश यादव
- फोटो : self
अखिलेश की नाराजगी पिता मुलायम की बजाय चाचा शिवपाल के साथ रही है। अखिलेश यादव पहले उन्हें कैबिनेट मंत्रिमंडल से और राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा चुके हैं। ऐसे में उनके पास विकल्प अब केंद्रीय राजनीति में जाने का बचा है। ऐसे में वे अपने कद से इंसाफ कर पाएंगे।
आखिरी विकल्प के तौर पर देखा जाए तो मुलायम को बेटे की सलाह मानते हुए सपा में संरक्षक का पद कबूल कर युवाओं के लिए रास्ते खोलने होंगे। ऐसे में शिवपाल यादव को भी अपनी परंपरागत सीट जसवंतनगर सीट से अपने बेटे आदित्य यादव को चुनाव लड़वाना चाहिए। सूत्र बताते हैं कि ऐसा ही होने भी वाला है।