साथ काम करने वाले लोगों के साथ हंसती-बोलती मुस्कुराती मेहरून्निशा शौक़त अली को पब में देखकर लोग ग़लत अंदाज़ा लगा सकते हैं।
राजधानी दिल्ली के हौज़ ख़ास इलाके के भड़कीले पब में कोई उन्हें वहां आने वाली रोज़ की कस्टमर समझ सकता है।
विज्ञापन
2 of 10
मेहरून्निशा शौक़त अली
डांस फ़्लोर पर हाथ बांधे खड़ी काले लिबास वाली इस लड़की की गहरी सुरमई आंखें उसके असली पेशे का राज उगल देते हैं। मेहरून्निशा पेशे से एक फ़ीमेल बाउंसर हैं और बीते एक दशक से दुनिया उन्हें इसी तरह से जानती है।
विज्ञापन
3 of 10
'पब-कम-रेस्तरां'
जिस 'पब-कम-रेस्तरां' में वे काम करती हैं। वहां पिछले तीन सालों से मेहरून्निशा 10 घंटों की नाइट शिफ़्ट भी कर रही हैं। दिन के वक़्त वो रेस्तरां कोई 200 लोगों की मेजबानी करता है लेकिन रात में ये खचाखच भरा होता है।
4 of 10
मेहरून्निशा शौक़त अली
बार में होने वाले झगड़ों को सलटाने में अब मेहरून्निशा को महारत हासिल है। वे महिला कस्टमर्स की तलाशी लेती हैं और अवैध ड्रग्स को ज़ब्त भी करती हैं।
विज्ञापन
5 of 10
मेहरून्निशा शौक़त अली
रेस्तरां के ओनल रियाज़ अमलानी कहते हैं "हमने महिला स्टाफ़ को नियुक्त करने का फ़ैसला किया ताकि यहां आने वाली महिलाएं भी सुरक्षित महसूस कर सकें। मेहरून्निशा रेस्तरां की उम्मीदों और जरूरतों पर खरी उतरती हैं"।
विज्ञापन
6 of 10
मेहरून्निशा शौक़त अली
30 साल की मेहरून्निशा के करियर में बड़ा मुकाम उस वक़्त आया जब उन्हें प्रियंका चोपड़ा, प्रीति ज़िंटा और विद्या बालन की सिक्योरिटी टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला।
विज्ञापन
7 of 10
मेहरून्निशा का पारंपरिक मुस्लिम परिवार
सहरानपुर के पारंपरिक मुस्लिम परिवार से आने वाली मेहरून्निशा पुलिस में आर्मी में शामिल होना चाहती थीं। लेकिन रूढ़िवादी पिता से इसकी मंजूरी नहीं मिली.
8 of 10
मेहरून्निशा का पारंपरिक मुस्लिम परिवार
लेकिन मां की ज़िद की वजह से मेहरून्निशा की पढ़ाई-लिखाई प्राइमरी स्कूल के बाद भी जारी रह सकी। लेकिन जब पिता के सितारे गर्दिश में गए तो उनका परिवार दिल्ली आ गया और तब मेहरून्निशा कॉलेज में थीं।
9 of 10
मेहरून्निशा शौक़त अली
इसी वक़्त से उन पर बड़े से परिवार की ज़िम्मेदारी आ गई। मेहरून्निशा की छोटी बहन तरन्नुम भी एक बार में बाउंसर के तौर पर काम करती हैं।
उन्हें अपने पेशे पर गर्व है. वे कहती हैं "ये बहुत आसान काम नहीं है। किसी क्लब में लोगों को संभालना ख़ासकर महिलाओं को बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी का काम है"। वहां आने वाली महिला कस्टमर्स भी इससे इत्तेफ़ाक़ रखती हैं।