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ट्रंप की यात्रा से पहले किस तरह की सुरक्षा तैयारी होती है? सीआईए रखती है संदिग्धों पर नजर

Sun, 23 Feb 2020 11:06 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीक्रेट सर्विस के साथ राष्ट्रपति ट्रंप - फोटो : Twitter
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पत्नी मेलानिया के साथ दो दिवसीय भारत यात्रा पर सोमवार को अहमदाबाद पहुंच रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति अहमदाबाद में रोड शो और नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद आगरा और फिर दिल्ली का भी दौरा करेंगे।
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President Donald Trump motorcade - फोटो : the Independent
दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से पहले सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स सुरक्षा तैयारियों को मुकम्मल करने के लिए अहमदाबाद, आगरा और दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। ये एजेंट्स की केवल जमीन ही नहीं, बल्कि हवा और पानी से आने वाले खतरों पर भी विशेष नजर है। 
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Donald Trump Convoy-3 - फोटो : Social Media
भारत यात्रा के दौरान ट्रंप थ्री-लेयर की हाई सिक्योरिटी घेरे में रहेंगे। पहले घेरे में अमेरिका की सीक्रेट सर्विस और मरीन कमांडो तैनात होंगे। इसके बाद के घेरे में एसपीजी और एनएसजी, तीसरे घेरे में गुजरात की चेतक कमांडो, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और गुजरात पुलिस का दस्ता होगा।

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President Donald Trump Lead Car - फोटो : Social Media
ट्रंप के दौरे से तीन महीने पहले ही यात्रा के सभी संभावित जगहों पर सीक्रेट सर्विस की टीम पहुंच जाती है। इसके बाद स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक फुलप्रूफ प्लान तैयार किया जाता है। इसमें स्थानीय पुलिस, खुफिया एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी शामिल होते हैं। 
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Donald Trump Convoy-2 - फोटो : Social Media
यात्रा के रास्तों में आने वाली सभी परेशानियों की पहचान कर उसे पहले ही दूर कर लिया जाता है। इसके अलावा निर्धारित रास्ते में ही दो ट्रामा अस्पतालों का भी चयन कर किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार कर दिया जाता है। वहां अमेरिकी डॉक्टर्स की भी तैनाती की जाती है।
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डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स - फोटो : secret service
सीक्रेट सर्विस के एजेंट यात्रा के दौरान किसी भी तरह के संभावित हमले या आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति के लिए एक सेफ लोकेशन भी तय करते हैं। ज्यादातर सेफ लोकेशन अमेरिकी दूतावास या महावाणिज्यिक दूतावास को ही बनाया जाता है। 
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सीक्रेट सर्विस के सुरक्षा घेरे में ट्रंप - फोटो : secret service
यूएस सीक्रेट सर्विस तीन महीने में स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर उन सभी लोगों की भी पहचान करती है जिनसे राष्ट्रपति को खतरा हो सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए एजेंट्स सोशल मीडिया की हरकतों पर भी नजर रखते हैं।

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सीक्रेट सर्विस से घिरे ट्रंप - फोटो : secret service
खास होती है ग्राउंड सिक्योरिटी रिपोर्ट
राष्ट्रपति ट्रंप के विदेशी दौरे पर ग्राउंड सिक्योरिटी रिपोर्ट को सबसे ज्यादा प्रमुखता दी जाती है। इसमें वे सभी जगह शामिल होती हैं, जहां पर राष्ट्रपति को जाना है। साथ ही राष्ट्रपति का रूट भी इसी के जरिए कवर होता है। लोकल पुलिस की ग्राउंड रिपोर्ट को 'सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी' अपने तरीके से परखती है।

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Trump in The Beast - फोटो : Social Media
सबसे पहले सैटेलाइट के जरिए यह पता लगाया जाता है कि लोकल पुलिस ने जो रूट क्लीयर किया है, वह सही है या नहीं। स्टेडियम के बारे में जो बातें कही गई हैं, उनकी प्रमाणिकता कितनी है। दूसरे नंबर पर, सीआईए खुद अपने स्तर पर उक्त बातों का पता लगाती है। तीसरा नंबर आता है अमेरिकन सोर्स का। यह एक ऐसी इकाई होती है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति की निजी सुरक्षा, सीआईए और सैन्य इंटेलीजेंस के अफसर रहते हैं।

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Donald Trump the beast - फोटो : Social Media
ये अफसर राष्ट्रपति के दौरे से कई दिन पहले प्रस्तावित दौरे वाली जगहों पर पहुंच जाते हैं। ये अपने तरीके से ग्राउंड सिक्योरिटी रिपोर्ट तैयार करते हैं। इनके पास लोकल पुलिस की रिपोर्ट भी रहती है। खास बात है कि किसी देश में इन अफसरों की भनक केवल पीएमओ, विदेश मंत्रालय और एनएसए को रहती है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति का काफिला - फोटो : secret service
लोकल पुलिस और दूसरी एजेंसियों को इस इकाई के बारे में नहीं बताया जाता। यह इसलिए किया जाता है कि ताकि ये अफसर स्वतंत्र तरीके से सिक्योरिटी रिपोर्ट तैयार कर सकें। जब 'सैटेलाइट, सीआईए और सोर्स' इन तीनों की ओर से ग्रीन सिग्नल मिलता है तभी राष्ट्रपति ट्रंप आगे बढ़ते हैं।

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यूएस सीक्रेट सर्विस की काउंटर टेररिज्म टीम - फोटो : US secret service
दूसरे देश को इन कोड वर्ड की जानकारी नहीं
राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए सेटेलाइट, संचार उपकरण या अन्य तकनीकी सामान, जो बाहर से आता है, उसका कोड वर्ड तैयार किया जाता है। इसकी जानकारी केवल सीआईए के पास रहती है। जैसे 'क्यू' 'टी' 'जी' और 'एन' जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल संबंधित राष्ट्र के साथ पत्राचार के लिए किया जाता है।

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सीक्रेट सर्विस का कंट्रोल रूम - फोटो : US secret service
राष्ट्रपति ट्रंप के मौजूदा भारत दौरें में संचार एवं सुरक्षा उपकरणों के लिए डब्लूआरटी, ओपीएस पैलेट, टीएसबी, डब्लूएचएमओ, पीडब्लूआर, एलओजी, एमसीटी, एसएटी कॉम और सीसीआई डब्लूसीआई आदि शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
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हॉकआई - फोटो : PTI
हॉकआई
उनके काफिले में कई काउंटर असाल्ट व्हीकल्स भी होते हैं, जिन्हें हॉकआई (Hawkeye) के नाम से जाना जाता है। ये पूरे काफिले में आगे से लेकर पीछे तक होती हैं। ये अकसर फोर्ड एसयूवी होती हैं, जो कस्टमाइज्ड होती हैं। इन्हें Ford F350 पिकअप ट्रक्स भी कहा जाता है। हाल ही में ट्रंप के काफिले में कुछ शेवरले सबअर्बन एसयूवी भी आई हैं।
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