बिप्लब ने अंग्रेजों के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर के नोबेल पुरस्कार लौटा देने का दावा किया था। विपक्ष ने इस गलत दावे के लिए उनकी अज्ञानता को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। विपक्षियों ने इस गलतबयानी के लिए बिप्लब की जमकर आलोचना की थी। गोमाती जिले में टैगोर की जयंती पर श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए बंगाली भाषा में बिप्लब ने कहा था कि टैगोर ने अंग्रेजों का विरोध करते हुए अपना नोबेल पुरस्कार लौटा दिया था। लेकिन असलियत में मशहूर कवि, उपन्यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक रहे टैगोर ने स्वीडिश अकादमी द्वारा दिए गए नोबल पुरस्कार को कभी नहीं लौटाया था।