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राजपथ पर पहली बार दिखे ये हथियार, चिनूक-अपाचे हेलीकॉप्टर और धनुष-के9 वज्र तोप

Sun, 26 Jan 2020 01:16 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हथियार - फोटो : ANI/Twitter
71वें गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान दिल्ली स्थित राजपथ पर भारत की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिली। ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो की मौजूदगी में जल-थल-नभ में भारत ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस बार राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में कई हथियार पहली बार शामिल हुए। जानिए उनके बारे में सबकुछ:

 
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अंतरिक्ष में मार करने वाली मिसाइल का प्रदर्शन - फोटो : DRDO
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की उपग्रह रोधी (ए-सैट) हथियार प्रणाली रविवार को गणतंत्र दिवस की परेड का हिस्सा बनी। किसी भी देश की आर्थिक और सैन्य सर्वोच्चता के लिए अंतरिक्ष महत्वपूर्ण आयाम है और इसमें ए-सैट हथियार आवश्यक रणनीतिक प्रतिरोध प्रणाली में अहम भूमिका निभाता है।
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अंतरिक्ष में मार करने वाली मिसाइल का प्रदर्शन - फोटो : PIB
पिछले साल मार्च में डीआरडीओ ने भारत के पहले ए-सैट मिशन मिशन शक्ति को लॉन्च किया था। यह भारत का पहला ए-सैट मिशन है जो विरोधी उपग्रहों को मार गिराने की भारत की क्षमता का प्रदर्शन करता है। इसके लॉन्च के बाद इस क्षमता को रखने वाले अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की सूची में भारत शामिल हो गया था।

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अपाचे हेलिकॉप्टर - फोटो : ANI
राजपथ पर वायुसेना के लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे ने पहली बार उड़ान भरी। इन पांच हेलीकॉप्टरों के समूह का नेतृत्व विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त 125 हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर मन्नारथ शीलू ने किया।
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अपाचे हेलीकॉप्टर - फोटो : ANI
चार साल पहले भारत ने अमेरिका के साथ 22 अपाचे हेलीकॉप्टर का करार किया था।  2022 तक सभी 22 अपाचे हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएंगे। भारत ने अमेरिका की कंपनी बोइंग के साथ सितंबर 2015 में 22 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर के खरीद का सौदा किया था। इस सौदे की कुल राशि 9600 करोड़ है।
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Apache - फोटो : PTI
एएच-64ई अपाचे विश्व के सबसे उन्नत लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से एक हैं, जिसे अमेरिका सेना इस्तेमाल करती है। यह बेहद कम ऊंचाई से हवाई और जमीनी हमले में सक्षम है। भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अपाचे के बेड़े में शामिल होने से उसकी लड़ाकू क्षमताओं में काफी बढ़ोतरी होगी, क्योंकि इनमें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बदलाव किया गया है।
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बीएमपी के पीछे के-9 वज्र-टी टैंक - फोटो : ANI
राजपथ पर पहली बार के-9 वज्र-टी टैंक ने परेड में हिस्सा लिया। इस यूनिट की कमान 269 मीडियम रेजिमेंट के कैप्टन अभिनव साहू ने संभाली। यह दक्षिण कोरिया की तकनीकी पर आधारित लंबी दूरी की आर्टिलरी गन है। इसको भारत में लार्सन एंड ट्रूबो ने बनाया है। इस गन की 100 यूनिटों को सेना में शामिल किया जाएगा।

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के9 वज्र टी टैंक - फोटो : Twitter
पाकिस्तान और चीन की सीमा पर मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर इस तोप की जरूरत काफी समय पहले से महसूस की जा रही थी। आखिरी बार भारतीय सेना में बोफोर्स तोप को शामिल किया गया था। K9 वज्र की पहली रेजीमेंट इस साल के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है।

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धनुष तोप - फोटो : Twitter
राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में रविवार को पहली बार धनुष तोप का प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन कैप्टन मृगांक भारद्वाज की कमान में किया गया। 155एमएम और 45 कैलीबर धनुष तोप को होवित्जर तोप की तरह डिजाइन किया गया है। यह आयुध निर्माणी बोर्ड द्वारा स्वदेश निर्मित है।

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धनुष तोप - फोटो : Twitter
अधिकतम 36.5 किलोमीटर दूरी की मारक क्षमता वाली इस तोप में स्वचालित बंदूक अलाइनमेंट और पोजिशनिंग की क्षमता है। इस तोप को सेना की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाया गया है।

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राजपथ पर चिनूक - फोटो : Ravi Batra
चिनूक की सबसे बड़ी खासियत है तेज गति। पहले चिनूक ने 1962 में उड़ान भरी थी। यह एक मल्टी मिशन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है। इसी चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था। वियतनाम से लेकर इराक के युद्धों तक शामिल चिनूक दो रोटर वाला हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर है।

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चिनूक - फोटो : IAF
भारत ने जिस चिनूक को खरीदा है, उसका नाम है CH-47 एफ है। यह 9.6 टन वजन उठा सकता है, जिससे भारी मशीनरी, तोप और बख्तरबंद गाड़ियां लाने-ले जाने में सक्षम है।
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चिनूक - फोटो : IAF
बोइंग के मुताबिक, अपाचे दुनिया के सबसे अच्छे लड़ाकू हेलिकॉप्टर माने जाते हैं। वहीं, चिनूक हेलिकॉप्टर बहुत ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है। चिनूक भारी-भरकम सामान को भी काफी ऊंचाई पर आसानी से पहुंचा सकता है। अमेरिकी सेना लंबे वक्त से अपाचे और चिनूक का इस्तेमाल कर रही है। भारत अपाचे का इस्तेमाल करने वाला 16वां और चिनूक को इस्तेमाल करने वाला 19वां देश है।
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