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तस्वीरों में देखें: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Updated Thu, 19 Sep 2019 03:43 PM IST
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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान तेजस को उड़ाने के बाद केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा कि सशस्त्र बलों में 2029- 30 तक 75 फीसदी देशी तकनीक का इस्तेमाल होगा। 

सिंह ने बृहस्पतिवार की सुबह बेंगलुरू में एचएएल हवाई अड्डे से तेजस लड़ाकू विमान को उड़ाया। इसके साथ ही सिंह पहले रक्षा मंत्री बन गए हैं जिन्होंने देश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान को उड़ाया है।
 
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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के उत्पादों की प्रदर्शनी के बाद सिंह ने यहां कहा, ‘2029- 30 तक देशी तकनीक का इस्तेमाल करीब 75 फीसदी हो जाएगा। किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि हम इस तरह से देशी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘वह दिन दूर नहीं जब हम अपने देश में ही सौ फीसदी सामान बनाएंगे।’

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
डीआरडीओ की प्रदर्शनी में मंत्री ने कहा, ‘आज मैंने जो देखा है और मैंने जो सुना है, उस आधार पर मैं कहना चाहता हूं कि पूरे देश को आप पर गर्व है।’ उन्होंने कहा कि डीआरडीओ न केवल भारत में विश्वसनीय संगठन है बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिल रही है। उन्होंने कहा, ‘हथियार, गोला-बारूद भारत में ही बनाए जा रहे हैं, हम धीरे- धीरे इस तरह से क्षमता निर्माण कर रहे हैं।’

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
राजनाथ सिंह के बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के हवाईअड्डे से तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरने के साथ ही 19 सितंबर का दिन तेजस के लिए यादगार बन गया। गौरतलब है कि यह लड़ाकू विमान भारत में निर्मित है और दुनिया के कई देश इस तारीफ कर चुके हैं।

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
करीब 30 मिनट के इस संक्षिप्त सफर के बाद रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने तेजस को इसलिए चुना क्योंकि यह स्वदेशी तकनीक से बना है। उन्होंने कहा कि विमान में सफर का उनका अनुभव रोमांचक रहा। सिंह ने विमान से उतरने के बाद कहा कि उड़ान सहज, आरामदायक रही। मैं रोमांचित था। यह मेरे जीवन की सबसे यादगार घटनाओं में से एक थी।

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
सिंह ने कहा कि यह स्वदेश निर्मित विमान है। इसलिए तेजस में उड़ान भरना और इसका अनुभव करना सहज रूप से मेरे मन में आया। साथ ही यह जानने के लिए भी कि हमारे लड़ाकू पायलट किन परिस्थितियों में ये विमान उड़ाते हैं, मैंने इस विमान में यह उड़ान भरी। जी-सूट पहने हाथों में हेलमेट लिए और एविएटर चश्मा लगाए सिंह पूरी तरह एक लड़ाकू विमान के पायलट लग रहे थे

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि मैं हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, डीआरडीओ और संबंधित कई एजेंसियों को बधाई देना चाहता हूं। हम ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं जहां हम दुनिया को लड़ाकू विमान बेच सकते हैं। दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों ने तेजस विमान खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
एक अधिकारी ने बताया कि रक्षा मंत्री ने करीब दो मिनट तक विमान को नियंत्रित कर उड़ाया भी। हालांकि बाद में राजनाथ सिंह ने कहा कि वह निर्देशों का पालन कर रहे थे। लेकिन ये दो मिनट यादगार थे।राजनाथ सिंह के साथ एयर वाइस मार्शल एन तिवारी भी थे। तिवारी बंगलूरू में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में परियोजना निदेशक हैं।

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
रक्षा मंत्री के साथ उड़ान का अनुभव साझा करते हुए तिवारी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने हवा में विमान उड़ाया (दो मिनट के लिए) और उन्हें यह पसंद आया। हम दो से 2.5 जी तक ऊपर गए। लेकिन मैं उन्हें विमान में मौजूद जटिल उपकरणों और उसमें इस्तेमाल विज्ञान एवं तकनीक की जानकारी दे रहा था।

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस पलक झपकते ही चीन-पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित थंडरबर्ड को खत्म कर सकता है। यह लगभग सभी मामलों में चीन-पाक द्वारा मिग-21 को कॉपी करके बनाए गए थंडरबर्ड से बेहतरीन है।

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब बहरीन इंटरनेशनल एयर शो में तेजस को प्रदर्शित करने की बात की गई थी, तब पाकिस्तान और चीन ने बेइज्जती से बचने के लिए थंडरबर्ड को प्रदर्शनी से हटा लिया था।

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Rajnath Singh Tejas - फोटो : PTI
एक तेजस को बनाने में लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ज्यादातर भारतीय तकनीकी होने के बावजूद इस लड़ाकू विमान का इंजन अमेरिकी है, रडार और वेपन सिस्टम इजरायल का और इजेक्शन सीट ब्रिटेन का है।

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तेजस का वजन 12 टन है और इसकी लंबाई 13.2 मीटर है। इसके पंख का फैलाव 8.2 मीटर है जबकि, ऊंचाई 4.4 मीटर है और रफ्तार 1350 किमी प्रति घंटा है।

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दुश्मनों के विमानों से निपटने के लिए इस्तेमाल होने वाले इसका मिशन कम्प्यूटर भारतीय तकनीकी पर आधारित है। इस लड़ाकू विमान में आर-73 एयर टू एयर मिसाइल, लेजर गाइडेड मिसाइल और बियांड विजुवल रेंज अस्त्र मिसाइल लगाई जा सकती है। 
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