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भारत के खतरनाक हथियार जिनसे दुश्मन खाता है खौफ, मिनटों में हो जाएगा नेस्तनाबूद

Tue, 11 Sep 2018 06:02 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जानिए भारत के खतरनाक हथियारों के बारे में।
देश की सुरक्षा के लिए मोदी सरकार बड़े-बड़े कदम उठा रही है। दुश्मन देशों से आगे निकलने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। विदेश कूटनीति के चलते आज भारत का एशिया में ही नहीं बल्कि दुनिया में डंका बज रहा है। सरकार ने नए हथियारों की खरीदारी भी शुरू कर दी है, जो दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों के पास ही हैं। अमर उजाला डॉट कॉम पर रोजाना पढ़िए, समझिए और देखिए ऐसे खास हथियारों के बारे में।  
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ब्रम्होस सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल

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ब्रम्होस सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल
भारतीय सेना के सबसे घातक हथियारों में एक है ब्रम्होस मिसाइल। इस मिसाइल को रूस और भारत ने मिलकर तैयार किया था। 2005 से इसे हमारी नौसेना में शामिल किया गया। सबसे ज्यादा सटीक वार करने वाली इस मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर है। सुपर सोनिक की स्पीड से यह मिसाइल अपने लक्ष्य तक 200 से 300 किलो तक विस्फोटक ले जाने में भी सक्षम है।
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टैंक टी-90 भीष्म

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टी-90 भीष्म टैंक

टी-90 भीष्म साउथ एशिया के किसी भी सेना में मौजूद टैंकों में सबसे ज्यादा सक्षम टैंक है। 48000 किलो के वजनी इस टैंक में तीन जवान बैठकर किसी भी मु्श्किल एरिया में पहुंच सकता है। यह पांच मीटर तक गहरे पानी की को भी पार कर दुश्मन पर वार कर सकता है। टी-90 भीष्म में 125 एमएम की चार मशीन लगी होती हैं जिनकी मारक दूरी 10 किमी तक है। इसे 1993 में भारतीय सेना में शामिल गया। इस टैंक का प्रयोग रात के अंधेरे में भी किया जा सकता है, क्योंकि यह अंधेरे में देखने की तकनीक से लैस है। इसमें खतरे को भांपने वाले सिग्नल भी मौजूद हैं जो सैनिक को पहले ही आगाह कर देता है।

नाग और नाग कैरियर

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टैंकरोधी मिसाइल नाग

'दागो और भूल जाओ' श्रेणी की तीसरी पीढ़ी की एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल 'नाग' एडवांस्ड इमेजिंग इंफ्रारेड रडार से लैस है। सूत्रों के अनुसार यह सुविधा बहुत कम देशों के पास है। नाग मिसाइल वजन में काफी हल्की होती है, इसका कुल वजन महज 42 किलो होता है। इस मिसाइल को 10 साल तक बगैर रखरखाव के इस्तेमाल किया जा सकता है। नाग मिसाइल की गति 230 मीटर प्रति सेकंड है।

एक खास बात और एक बार मिसाइल दाग दी गई तो इसे रोका नहीं जा सकेगा। दुनिया के किसी भी सेना के टैंक को यह मिसाइल कुछ ही क्षणों में ध्वस्त कर सकती है। इसकी मारक क्षमता चार से पांच किलोमीटर है। वहीं नाग कैरियर में एक बार में 12 मिसाइल तैनात की जा सकती हैं और एक साथ आठ मिसाइलों को दागा जा सकता है।

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भारत बना सकता है दुनिया की सबसे घातक पनडुब्बी!

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आईएनएस चक्र पनडुब्बी

परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी वाला देश भारत दुनिया का छठा देश है। इसका वजन 8000 टन है। भारत से पहले परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी अमेरिका, रूस, फ्रांस ब्रिटेन और चीन के पास थी। भारत की आईएनएस चक्र की जद में चीन और पाकिस्तान समेत कई देश हैं। वहीं दूसरी ओर भारत अब स्वदेशी पनडुब्बी निर्माण की ओर रुख कर रहा है। भारत में अभी और पनडुब्बियां स्ट्रैटिजीक पार्टनरशिप के तहत बनाई जाएंगी, जिसमें कोई विदेशी कंपनी किसी भारतीय कंपनी से गठजोड़ कर भारत में पनडुब्बी बना सकती है। रडार से बच निकलने में सक्षम देश की पहली मेक इन इंडिया स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी कलवरी नौसेना में शामिल हो गई है।

मेड इन इंडिया पनडुब्बी: भारत की 2029 तक 24 पनडुब्बियां बनाने की योजना है। इसके पहले प्रोजेक्ट पी-75 के लिए फ्रांस की डीसीएनएस और एमडीएल के बीच अक्टूबर 2005 में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए समझौता हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत  फ्रांसीसी कंपनी डीसीएनएस के साथ मिलकर सबसे खतरनाक पनडुब्बी बाराकुडा प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकता है। इस पनडुब्बी का रखरखाव बेहद सस्ता है। आपको बता दें कि प्रोजेक्ट पी-75 प्रोजेक्ट के तहत 60 हजार करोड़ रुपए खर्च कर स्कॉर्पीन सीरीज की छह पनडुब्बियां बनाई जा रही हैं। डीजल-इलेक्ट्रिक दोनों ही तरह की ताकत से लैस इस पनडुब्बी के आने के बाद से नौसेना के पास कुल पनडुब्बियां 14 हो जाएंगी।
 

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