आईएनएस चक्र पनडुब्बी
परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी वाला देश भारत दुनिया का छठा देश है। इसका वजन 8000 टन है। भारत से पहले परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी अमेरिका, रूस, फ्रांस ब्रिटेन और चीन के पास थी। भारत की आईएनएस चक्र की जद में चीन और पाकिस्तान समेत कई देश हैं। वहीं दूसरी ओर भारत अब स्वदेशी पनडुब्बी निर्माण की ओर रुख कर रहा है। भारत में अभी और पनडुब्बियां स्ट्रैटिजीक पार्टनरशिप के तहत बनाई जाएंगी, जिसमें कोई विदेशी कंपनी किसी भारतीय कंपनी से गठजोड़ कर भारत में पनडुब्बी बना सकती है। रडार से बच निकलने में सक्षम देश की पहली मेक इन इंडिया स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी कलवरी नौसेना में शामिल हो गई है।
मेड इन इंडिया पनडुब्बी: भारत की 2029 तक 24 पनडुब्बियां बनाने की योजना है। इसके पहले प्रोजेक्ट पी-75 के लिए फ्रांस की डीसीएनएस और एमडीएल के बीच अक्टूबर 2005 में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए समझौता हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत फ्रांसीसी कंपनी डीसीएनएस के साथ मिलकर सबसे खतरनाक पनडुब्बी बाराकुडा प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकता है। इस पनडुब्बी का रखरखाव बेहद सस्ता है। आपको बता दें कि प्रोजेक्ट पी-75 प्रोजेक्ट के तहत 60 हजार करोड़ रुपए खर्च कर स्कॉर्पीन सीरीज की छह पनडुब्बियां बनाई जा रही हैं। डीजल-इलेक्ट्रिक दोनों ही तरह की ताकत से लैस इस पनडुब्बी के आने के बाद से नौसेना के पास कुल पनडुब्बियां 14 हो जाएंगी।