बीते 18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के उड़ी में आतंकियों के हमले में 18 जवान शहीद हो गए। आर्मी ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर हुए इस हमले में 30 से अधिक जवान घायल भी हो गए। इसके बाद से ही भारत की तरफ से पाकिस्तान पर कार्रवाई करने और माकूल जवाब देने की बात उठ रही है।
आर्मी ब्रिगेड हेडक्वार्टर में जिस वक्त हमला हुआ सेना के जवान आराम कर रहे थे। ऐसी स्थिति में वह जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम नहीं थे। हालांकि, इसके बाद की कार्रवाई में सेना के जवानों ने 10 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया।
बताते चलें कि सेना के जवान कई प्रतिकूल परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं। कई ऐसे भी मिलिट्री बेस कैंप हैं जो खतरनाक इलाकों में स्थित हैं। हम आपको ऐसे ही 4 मिलिट्री बेस कैंप के बारे में बता रहे हैं जो मौसम और पड़ोसी मुल्कों की वजहों से खतरनाक माने जाते हैं...
सियाचिन ग्लेशियर
> यह पूर्वी काराकोरम रेंज पर स्थित है।
> यहां पाकिस्तान और चीन दोनों की सीमा भारत से मिलती है।
> यहां तकरीबन 3 हजार सैनिक हमेशा रहते हैं।
> समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 5753 मीटर है।
> यहां का पारा -50 डिग्री के नीचे तक पहुंच जाता है।
> अपने जवानों की बदौलत भारत ने तकरीबन तीन हजार स्कवायर किमी का क्षेत्र अपने कब्जे में कर लिया है।
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कच्छ
कच्छ का 'रण'
> बताया जाता है कि 1965 में भारत और पाकिस्तान युद्ध की नींव कच्छ के 'रण' इलाके में हुई मुठभेड़ के बाद ही पड़ी थी।
> गुजरात के उत्तर और पूर्व में फैला हुआ यह एक नमकीन दलदल का वीरान प्रदेश है।
> कच्छ रन की पश्चिमी सीमा पाकिस्तान से मिलती है।
> गर्मियों में यहां का तापमान 44 से 50 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है।
> वहीं, ठंडियों में यहां का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस के नीचे चला जाता है।
> इतने खराब मौसम के बाद भी सेना के जवान यहां 24 घंटे देश की रक्षा में जुटे रहते हैं।
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एलओसी
लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC)
> यह एक ऐसी लाइन हैल कि यहां थोड़ी सी हलचल भारत और पाकिस्तान में युद्द का सबब बन सकती है।
> 'इसे सीज फायर लाइन' भी कहते हैं। 3 जुलाई 1972 को शिमला समझौते के बाद इसका नाम लाइन ऑफ कंट्रोल पड़ा।
> भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे विवाद वाली जगह है लाइन ऑफ कंट्रोल ही है।
> 740 किमी लंबी इस बाउंड्री लाइन में 550 किमी लंबी लाइन पर कटीली तारों की घेराबंदी है।
> यह जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान से गुजरते हुए गुजरात में खत्म होता है।
> इसके 150 यार्ड के अंदर 8 से 12 फीट तक ऊंची तारों की बाड़ से घेराबंदी की गई है, जिसमें इलेक्ट्रिक सप्लाई रहती है।
> कारगील युद्द में एलओसी पर 400 से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे।