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CRPF: नक्सल इलाके में सीआरपीएफ डीजी ने FOB पर जवानों संग बिताई रात, जांबाजों की सुनी तो कुछ अपनी सुनाई

सार

सीआरपीएफ के नए डीजी जीपी सिंह, जिन्होंने पिछले सप्ताह ही बल के महानिदेशक का कार्यभार संभाला है, अब वे नक्सल प्रभावित इलाके में पहुंच गए हैं। उन्होंने बीजापुर, सुकमा और दन्तेवाडा के नक्सल प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
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BSF - फोटो : Amar Ujala
देश का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ', नक्सल प्रभावित इलाकों में लोगों के दिलों पर राज कर रहा है। जोखिम भरे इलाकों में इस बल के जांबाज दोहरी भूमिका रहे हैं। एक तरफ वे नक्सलियों का खात्मा कर रहे हैं, उन्हें सरेंडर के लिए मजबूर कर रहे हैं तो दूसरी ओर वहां के सामान्य लोगों के लिए मददगार भी बन रहे हैं। वहां रहने वाले लोगों की शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर हर संभव सहायता की जा रही है।

सीआरपीएफ के नए डीजी जीपी सिंह, जिन्होंने पिछले सप्ताह ही बल के महानिदेशक का कार्यभार संभाला है, अब वे नक्सल प्रभावित इलाके में पहुंच गए हैं। उन्होंने बीजापुर, सुकमा और दन्तेवाडा के नक्सल प्रभावित इलाकों का दौरा किया। डीजी ने टेकलगुडियम एफओबी पर जवानों के साथ रात बिताई। डीजी ने जनता के साथ संवाद स्थापित किया। बल के महानिदेशक ने कुछ जांबाजों की सुनी तो कुछ अपनी सुनाई। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीणों को 2000 साइकिलें वितरित करने की मुहिम की शुरुआत की।
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BSF - फोटो : Amar Ujala
देश की आंतरिक सुरक्षा और नागरिक कल्याण को मजबूत करने के मकसद से सीआरपीएफ महानिदेशक ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ने टेकलगुडियम के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जवानों के साथ रात बिताई है। उन्होंने आम जनता के लिए 'सिविक एक्शन प्रोग्राम' की औपचारिक शुरूआत की। यह कार्यक्रम स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने, नागरिक सुरक्षा को बढावा देने और सुरक्षा बलों तथा आम जनता के बीच विश्वास बढाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 
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BSF - फोटो : Amar Ujala
महानिदेशक ने कहा, सीआरपीएफ न केवल देश की सुरक्षा में योगदान देता है, बल्कि समाज के विकास में भी अहम भूमिका निभाता है। यह पहल स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और उन्हें एक बेहतर भविष्य देने की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सिविक एक्शन कार्यक्रम के अन्तर्गत स्थानीय विद्यालयों में 100 से अधिक छात्रों को शिक्षा सामग्री, स्कूल बैग और स्टेशनरी किट वितरित की गई। भविष्य में भी सीआरपीएफ के तैनाती स्थलों पर जरूरतमंद छात्रों को शिक्षा सामग्री प्रदान की जाती रहेगी। 

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स्वास्थ्य सेवाओं को बढावा देने के लिए निःशुल्क मेडिकल कैम्प आयोजित किए गए। इनमें 100 से अधिक ग्रामीणों की स्वास्थ जांच की गई। उन्हें आवश्यक दवाईयां भी वितरित की गई। युवाओं को स्वरोजगार के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें टेलरिगं, बांस-कला, सिलाई, कंप्यूटर स्किल्स, कृषि कला, बढई कला, ड्राइविंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। डीजी ने स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के मकसद से उस क्षेत्र में तैनात बल के कम्पनी कमाण्डरों को निर्देशित किया है कि जरूरतमंद युवाओं को शिक्षा और प्रशिक्षण में मदद करें, ताकि वे अपने भविष्य को सुधार सकें।
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महानिदेशक ने कहा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तरफ से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुविधाजनक बनाने और छात्रों की शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाने के लिए 2,000 साइकिलों का वितरण किया जाएगा। उन्होंने लोगों को 20 साइकिलें वितरित की हैं। इससे सुदूरवर्ती इलाकों के छात्रों को स्कूल जाने में आसानी होगी और ग्रामीण श्रमिकों को अपने कार्यस्थल तक पहुंचने मे सुविधा मिलेगी। सामाजिक सहयोग को बढावा देने के लिए गरीब और जरूरतमंद ग्रामीणों को वस्त्र वितरित किए गए। आने वाले समय में के0रि0पु0बल द्वारा अन्य जरूरतमंदों को भी वस्त्र वितरित किए जाएंगे। इस पहल के तहत 200 से अधिक परिवारों को कपडे, खेल सामग्री, कृषि उपकरण और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं प्रदान की गई। इस कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और ग्रामीण जनता की उत्साही भागीदारी देखी गई। ग्रामीणों ने इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया और इसे अपने जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम बताया। डीजी ने विश्वास जताया कि यह पहल न केवल ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाएगी, बल्कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जनता के बीच एक मजबूत रिश्ता भी कायम करेगी। उन्होंने स्थानीय लोगों को विश्वास दिलाया कि जरूरतमंदों को इस प्रकार के कार्यक्रमों के द्वारा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल जनता की सदैव मदद करता रहेगा।
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बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को भरोसा दिलाया है कि मार्च 2026 से पहले सभी हिस्सों से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा। 'सीआरपीएफ' और इसकी विशेष इकाई 'कोबरा', डीआरजी व राज्यों की पुलिस, केंद्रीय गृह मंत्री के इस भरोसे को पूरा करने में जुटी हैं। घने जंगल में और नक्सलियों के गढ़ में पहुंचकर सीआरपीएफ व दूसरे बलों के जवान त्वरित गति से 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, नक्सलियों का अंत अब कितना निकट है, यह अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2023 में 50 नक्सली मारे गए थे तो वहीं 2024 में मुठभेड़ के दौरान 290 नक्सलियों को मौत के घाट उतारा गया। 2025 में 21 जनवरी तक 48 नक्सली मारे गए हैं। 2019 से लेकर अभी तक 290 कैंप स्थापित किए गए हैं। 2024 में 58 कैंप स्थापित हुए थे। इस वर्ष 88 कैंप स्थापित किए जाने के प्रस्ताव पर काम शुरु हो चुका है। ये कैंप नक्सल के किले को ढहाने में आखिरी किल साबित हो रहे हैं। 
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अधिकांश ग्रामीणों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड या आयुष्मान भारत कार्ड भी नहीं हैं। उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता। बल के जवानों द्वारा उन्हें विस्तार से सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनके कार्ड तैयार कराए जाते हैं। विशेष आधार शिविर लगाए जाते हैं। अभी तक 14000 से ज्यादा ग्रामीणों का आधार कार्ड बनवाया गया है। इसके लिए 253 विशेष आधार कैंप लगाए गए हैं। 589 लोगों को वन अधिकार पट्टा वितरण प्रदान किया गया है। दस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 10 हजार से अधिक लोगों के राशन कार्ड बनवाए गए हैं। 19 सौ से ज्यादा लोगों को पेंशन का भुगतान कराया गया है। 40 आंगनवाड़ी केंद्र खोले जा चुके हैं। कुल 113 केंद्र खोले जाने है। इतना ही नहीं, सीआरपीएफ द्वारा छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में 3609 किसान क्रेडिट कार्ड तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 1545 कार्ड लोगों को प्रदान कर दिए गए हैं। बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाया जा रहा है। सीआरपीएफ द्वारा स्थापित किए जा रहे नए कैंपों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए चिकित्सा मदद डेस्क स्थापित किए गए हैं। 
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