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कोरोना वायरस: जानिए कितनी देर तक टिक सकता है यह वायरस, शोध में हुए हैं हैरान करने वाले खुलासे

Wed, 25 Mar 2020 07:06 PM IST
अपूर्वा राय बीबीसी हिंदी
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI

कोविड-19 फैल रहा है और इसके साथ ही किसी भी सतह को छूने का हमारा डर भी बढ़ रहा है। अब पूरी दुनिया में सार्वजनिक जगहों पर एक जैसी तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। लोग अपनी कोहनी से दरवाजे खोलने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रेनों के जरिए आवाजाही करने वाले लोग इसके हैंडल पकड़ने से बच रहे हैं। ऑफिस कर्मचारी हर सुबह अपनी डेस्क साफ करते दिखाई दे रहे हैं।

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corona virus - फोटो : PTI

साफ-सफाई पर बढ़ा जोर

कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए इलाक़ों में वर्कर्स को प्रोटेक्टिव कपड़े भेजे जा रहे हैं। ये टीमें प्लाजा, पार्कों और सड़कों पर डिसइन्फेक्टेंट्स (इनफेक्शन को रोकने वाली दवाइयों) का छिड़काव करती हैं। दफ़्तरों, हॉस्पिटलों, दुकानों और रेस्टोरेंट्स में साफ-सफाई के इंतजाम पहले के मुकाबले कहीं ज़्यादा मुस्तैदी से किए जा रहे हैं फ़्लू जैसे दूसरे रेस्पिरेटरी वायरस की तरह से ही कोविड-19 भी इससे संक्रमित शख़्स के छींकने या खांसने के जरिए मुंह और नाक से निकलने वाली पानी की बूंदों से भी फैल सकता है इस बात के भी कुछ प्रमाण हैं कि यह वायरस ज़्यादा लंबे वक़्त तक मल पर टिक सकता है, ऐसे में टॉयलेट होकर आने वाला कोई शख़्स अगर अच्छी तरह से अपने हाथ नहीं धोता है तो इससे वो अपनी छुई जाने वाली दूसरी किसी भी चीज़ को संक्रमित कर सकता है।

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गांव पहुंचे डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला।

हाथ से चेहरा छूना मुख्य वजह नहीं

सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, वायरस वाली किसी सतह या वस्तु को छूने के बाद अपने चेहरे को छूना 'वायरस के फैलने की मुख्य वजह नहीं मानी गई है।' इसके बावजूद सीडीसी, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (डब्ल्यूएचओ) और दूसरे अन्य स्वास्थ्य संस्थानों ने इस बात पर जोर दिया है कि हाथ धोना और बार-बार छुई जाने वाली सतहों को रोज साफ करना इस वायरस को फैलने से रोकने का एक अहम उपाय है। हालांकि, हमें यह नहीं पता कि संक्रमित सतहों को छूने से इस वायरस के फैलने के कितने मामले आए हैं, लेकिन एक्सपर्ट फिर भी इस मामले में सतर्कता बरतने की बात करते हैं। एक पहलू जिस पर अभी भी तस्वीर साफ नहीं है वह यह है कि आखिर कितने वक़्त तक Sars-CoV-2 (कोविड-19 बीमारी को फैलाने की वाले वायरस का नाम) मानव शरीर के बाहर जीवित रह सकता है।

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सोशल मीडिया: कोरोना और जीवन का हाइवे - फोटो : social media

28 दिन तक टिक सकता है वायरस

सार्स और मर्स जैसे दूसरे कोरोना वायरस पर हुए कुछ अध्ययनों में पता चला था कि ये मेटल, ग्लास और प्लास्टिक पर नौ दिन तक जीवित रह सकते हैं। कम तापमान में कुछ वायरस 28 दिन तक टिके रह सकते हैं। कोरोना वायरस को खासतौर पर इस बात के लिए जाना जाता है कि यह अपने अनुकूल माहौल में मजबूती से टिका रहता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

शोध में हुए नए खुलासे

शोधकर्ताओं को अब इस बारे में और ज़्यादा जानकारियां मिल रही हैं कि यह नए कोरोना वायरस के फैलाव को कैसे प्रभावित करता है। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) की वायरोलॉजिस्ट नील्तजे वान डोरमालेन और मोंटाना के हैमिल्टन में मौजूद रॉकी माउंटेन लैबोरेटरीज के उनके सहयोगियों ने Sars-CoV-2 के बारे में कुछ शुरुआती टेस्ट किए हैं कि यह अलग-अलग सतहों पर कब तक टिक सकता है। इनकी स्टडी को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छापा गया है। इस स्टडी से पता चलता है कि यह वायरस छींक या खांसी के दौरान बाहर निकलने पर बूंदों में तीन घंटे तक जीवित रह सकता है।
1 से 5 माइक्रोमीटर के आकार वाली बड़ी बूंदें मानव बाल की मोटाई से करीब 30 गुना छोटी होती हैं. ये बूंदें कई घंटों तक हवा में बनी रह सकती हैं। इसका मतलब यह है कि वायरस बिना फिल्टर वाले एयर कंडीशनिंग सिस्टम्स में आने वाले वायरस केवल कुछ घंटों तक ही जीवित रह सकते हैं, खासतौर पर एयरोसोल बूंदें जल्द ही सतह पर टिक जाती हैं।

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corona virus - फोटो : पीटीआई

कहां ज़्यादा जीवित नहीं रह पाता वायरस

लेकिन, एनआईएच की स्टडी में पता चला है कि Sars-CoV-2 वायरस कार्डबोर्ड पर 24 घंटे तक और प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की सतहों पर 2-3 दिन तक टिका रह सकता है। इन जानकारियों से पता चल रहा है कि वायरस दरवाजों के हैंडल्स, प्लास्टिक कोटेड और लैमिनेटेड वर्कटॉप्स और दूसरी सख़्त सतहों पर ज़्यादा वक़्त के लिए जीवित बना रह सकता है शोधकर्ताओं को पता चला है कि कॉपर की सतह पर यह वायरस करीब चार घंटे में ही मर जाता है। लेकिन, इसे तत्काल रोकने का एक विकल्प है। रिसर्च से पता चला है कि 62-71 फीसदी एल्कोहल या 0.5 फीसदी हाइड्रोजन परऑक्साइड ब्लीच या 0.1 फीसदी सोडियम हाइपोक्लोराइट वाली घरेलू ब्लीच से सतह को साफ करने से कोरोना वायरस को एक मिनट के भीतर निष्क्रिय किया जा सकता है।

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corona virus - फोटो : अमर उजाला

ज़्यादा तापमान और ह्यूमिडिटी में भी असरदार

ज़्यादा टेंपरेचर और ह्यूमिडिटी में भी दूसरे कोरोना वायरस तेज़ी से खत्म हो जाते हैं। हालांकि, रिसर्च से पता चलता है कि सार्स बीमारी की वजह बनने वाले संबंधित कोरोना वायरस 56 डिग्री सेल्सियस या 132 डिग्री फॉरेनहाइट से ऊपर के तापमान पर मर सकते हैं। यूएस एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (ईपीए) ने अब डिसइनफेक्टेंट्स और एक्टिव इनग्रेडिएंट्स की एक लिस्ट जारी की है जिनके जरिए Sars-CoV-2 वायरस को खत्म किया जा सकता है। हालांकि, इस बात का कोई डेटा नहीं है कि किसी संक्रमित शख्स के छींकने से निकलने वाली एक बूंद में कितने वायरस पार्टिकल हो सकते हैं, लेकिन फ़्लू वायरस पर की गई रिसर्च से पता चलता है कि छोटी बूंदों में इंफ्लूएंजा वायरस की दसियों हज़ार कॉपी हो सकती हैं। हालांकि, यह चीज़ वायरस पर भी निर्भर करती है कि वह किस श्वसन तंत्र में पाया गया है और शख्स में संक्रमण किस स्टेज पर है। कपड़ों और ऐसी दूसरी सतह जिन्हें डिसइनफेक्ट करना मुश्किल होता है, यह अभी साफ़ नहीं है कि इनमें वायरस कितनी देर तक टिक सकता है।

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मनोवैज्ञानिक की राय - फोटो : Amar Ujala

छिद्रदार सतह पर सूख जाता है वायरस

रॉकी माउंटेन लैबोरेटरीज में वायरस ईकोलॉजी के हेड और एनआईएच की स्टडी की अगुवाई करने वाले विंसेंट मन्सटर के मुताबिक, कार्डबोर्ड में मौजूद एब्जॉर्बेंट नैचुरल फ़ाइबर में वायरस प्लास्टिक और मेटल के मुकाबले जल्द मर जाता है। उन्होंने कहा, "हमारा अंदाज़ा है कि छिद्रपूर्ण (पोरस) मैटेरियल की वजह से यह वायरस जल्द ही सूख जाता है और फ़ाइबर में फंस जाता है।" तापमान में बदलाव और ह्यूमिडिटी से भी वायरस को ज़्यादा देर टिकने में मुश्किल होती है। इससे यह भी पता चलता है कि क्यों यह हवा में मौजूद बूंदों में कम देर टिकता है। उन्होंने कहा, "हम फिलहाल आगे के प्रयोग कर रहे हैं ताकि तापमान और ह्यूमिडिटी के असर को और ज़्यादा बारीकी से समझ सकें।" मन्सटर के मुताबिक, वायरस के ज़्यादा लंबे वक़्त तक टिके रहने से पता चलता है कि क्यों हमें हाथों की सफ़ाई और सतहों को साफ रखने पर ज़्यादा जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा, "इस वायरस में कई जरियों से एक जगह से दूसरी जगह पर फैलने की संभावना होती है।"

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