दुनियाभर में कोरोना संक्रमण को लेकर दहशत का वातावरण है, ऐसे में भ्रामक और फर्जी खबरें और अधिक माहौल खराब करती हैं। इस समय सोशल मीडिया की जिम्मेदारी अतिमहत्वपूर्ण हो जाती है। आजकल सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस को लेकर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें इस बात का दावा किया जा रहा है कि पुलिस द्वारा कोविड-19 के संदिग्धों को रोकने का वीडियो है। अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की और पाया यह फेक न्यूज है और गलत दावे के साथ वायरल हो रही है।
दावाकर्ता- सोशल मीडिया यूजर्स
दावे का आधार- एक वीडियो क्लिप और उसपर लिखा डिस्क्रिप्शन
क्या किया जा रहा है दावा- "बरेली के सीबी गंज में पहला मरीज मिला है आप लोग इसको देखकर इसके खतरे का अनुमान लगा सकते हैं !!
फेक न्यूज से सावधान रहें
- फोटो : Amar Ujala
- फ्रेम दर फ्रेम अगर आप इस वीडियो को देखेंगे तो चार स्क्रीन शॉट महत्वपूर्ण दिखेंगे
- हमने वीडियो को चार भागों में विभाजित किया और इसकी जांच-पड़ताल की,
पहली तस्वीर-
पूरे प्रकरण को मोबाइल कैमरों पर रिकॉर्ड किया जा रहा है।
दूसरी तस्वीर-
पुलिस और संदिग्ध व्यक्ति मुस्कुरा कर सारा एक्ट कर रहे हैं और बहुत आसानी से पुलिस उसको पकड़ रही है।
तीसरी तस्वीर-
पुलिस का सिपाही आराम से उसको मास्क पहना रहा है और कैमरे में देख रहा है।
चौथी तस्वीर-
जब उसको एंबुलेंस में बैठाया जा रहा है वो आराम से उसमें बैठ रहा है और पीछे से एक आदमी आराम से उसकी रिकॉर्डिंग कर रहा है।
इस तरह आप आसानी से देख सकते हैं कि सारा प्रकरण नाटकीय है।
फेक न्यूज से सावधान रहें
- फोटो : Amar Ujala
पड़ताल का परिणाम
उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस जागरूकता के लिए पुलिस द्वारा मॉक ड्रिल किया गया था। ये वीडियो 24 मार्च, 2020 को गाजियाबाद पुलिस द्वारा आयोजित मॉक ड्रिल का हिस्सा है जिसका मकसद कोरोना वायरस के मामलों को संभालने के लिए किया गया अभ्यास था। अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को फर्जी साबित किया। हमें केवल कोरोना वायरस के संक्रमण से ही नहीं, इससे जुड़ी हर फेक न्यूज और भ्रामक जानकारियों से भी लड़ना है। खबरों को भी झूठे तथ्यों के संक्रमण से बचाना है।
कोरोना वायरस और फेक न्यूज से सावधानी ही बचाव है।