वायरल तस्वीर का सच
- फोटो : Amar Ujala
इस आर्टिकल में अधिकारी की कहानी के अनुसार, नोवेल कोरोना वायरस एक वायरस नहीं है, बल्कि एक जैविक हथियार है, जो तब लीक हुआ था जब एक चीनी अधिकारी ने इसे संयुक्त राज्य अमेरिका में बेचने की कोशिश की थी।
इस आर्टिकल के अनुसार,
"एक चीनी अधिकारी के अनुसार, अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसी को भी इस जैविक एजेंट की सूचना मिली थी और सीआईए भी इसमें दिलचस्पी ले रही थी।
- अमेरिका ने पहले ही वायरस पकड़ लिया था जिसे चीन ने अपनी लैब में बनाया था।
- इस लेख में लिखा कि चीन और अमेरिका के बीच वायरस के लेन-देन पर सौदा क्यों नहीं हो सका।
- अधिकारी ने लिखा, "हमारे अमेरिकी दोस्तों ने भी वायरस में रुचि दिखाई थी।
- हमारे सीआईए के साथ अच्छे संबंध हैं लेकिन क्योंकि यह बहुत खतरनाक था, हमने इनकार कर दिया।
- सीआईए को लगा कि हमने एक बहुत ही शक्तिशाली चीज बनाई है और चीन इसे बस अपने पास रखना चाहता है।
- यूएस इंटेलिजेंस एजेंसी ने एक चीनी शोधकर्ता को एक बड़ी रकम की पेशकश की और उस वायरस की मांग की।
- शोधकर्ता ने वायरस का जो नमूना अमेरिकी एजेंसी सेक्टर को बेचा वह तैयार था।
- जब अमेरिकी एजेंट और चीन के शोधकर्ता के बीच वायरस को लेकर फाइनल डील हो रही थी, तो चीन को एक सुराग मिला।
- गोलीबारी हुई जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। हालांकि, अमेरिकी एजेंट भागने में सफल रहा।
- यह शूट एनिमल मार्किट के पास हुआ, और जिस बोतल में वायरस का नमूना था, उस पर गिर गया।
- यही कारण है कि वुहान में यह वायरस फैला। चीन ने इसको यह कहते हुए इसे छुपाने की कोशिश की कि यह चमगादड़ से फैलता है।
- चीन ने लोगों से झूठ बोला कि वुहान में केवल फ्लू फैला है, लेकिन धीरे-धीरे पूरी दुनिया उस वायरस की चपेट में आ गई जो चीन ने अपनी लैब में बनाया था।"
(आर्टिकल का एक अंश )