ऐसा कई सालों बाद होगा जब चंद्रग्रहण के दौरान सभी लोग करीब सवा घंटे में चंद्रमा के तीन रंग और कई आकार देख सकेंगे। इस बार का पूर्व चंद्र ग्रहण कई मायनों में खास है। पहला सूपरमून की एक श्रृंखला में यह तीसरा अवसर होंगे, जब चांद धरती के सबसे करीब होगा।
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दूसरा चांद पहली से 14 फीसदी बड़ा होगा और 30 फीसदी ज्यादा चमकीला होगा। तीसरा इस महीने में दो बार पूर्णिमा का मौका आया है। एक महीने में दो बार पूर्णिमा का मौका ढाई साल में एक बार आता है।
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सूपरमून: चांद और धरती के बीच की दूरी सबसे कम होती है, क्योंकि पृथ्वी इस दौरान चांद और सूर्य के बीच आ जाती है।
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ब्लड मून: पृथ्वी की छाया जब चांद को पूरी तरह से ढंक देती है और सूर्य की किरणें धरती से वायुमंडल से होकर चांद तक पहुंचती है। यह चांद पर लालिमा बिखेर देती है और इसी वजह से वह लाल दिखता है।
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ब्लू मून: पूर्ण चंद्र ग्रहण के वक्त चांद की निचली सतह से नीले रंग की रोशनी बिखरती है। इस कारण इसे ब्लू मून कहा जाता है।
बता दें कि चद्र ग्रहण का ये अद्भुत नजारा भारत, पूरे उत्तरी अमेरिका, प्रशांत क्षेत्र, पूर्वी एशिया, रूस के पूर्वी भाग, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में दिखेगा।भारत में ग्रहण का सूतक प्रातःकाल से शुरू हो गया। ग्रहण शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा और 8 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगा।