12 दिसंबर, 2019। इसी दिन राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक ने देश में कानून का रूप ले लिया था। इसके बाद से ही इसे लेकर देश के तमाम राज्यों में इसे लेकर विपक्षी पार्टियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। करीब 38 दिनों के बाद भी यह विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है।
दिल्ली के शाहीन बाग में महिलाएं अपने बच्चों और घर के बुजुर्गों को लेकर पिछले 35 दिनों से धरने पर बैठी हैं। अब शाहीन बाग की चिंगारी देशभर में फैलती जा रही है। भाजपा जहां सीएए के समर्थन में रैलियां कर रही है, वहीं कई शहरों में 'शाहीन बाग' बनते जा रहे हैं।
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कोलकाता में सड़क पर उतरे लोग।
- फोटो : PTI
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इस कानून के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। बीते कई दिनों से दीदी खुद भी कई बार सड़कों पर उतर चुकी हैं। यहां तक कि पश्चिम बंगाल आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया।
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बंगलूरू में तिरंगा लेकर प्रदर्शन करती महिलाएं।
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कर्नाटक में भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। शनिवार को बंगलूरू में सीएए, एनआरसी और एनआरपी के खिलाफ महिलाओं ने प्रदर्शन किया।
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बंगलूरू में प्रदर्शन।
- फोटो : PTI
बंगलूरू में सीएए, एनआरसी और एनआरपी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने कई तरह के पोस्टर बनाए।
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मुंबई में भी लोग सड़कों पर उतरे।
- फोटो : PTI
मुंबई में महिलाओं ने शिवसेना की उद्धव ठाकरे सरकार से सीएए के खिलाफ कदम उठाने की अपील की।
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मुंबई में धरने पर बैठी महिला
- फोटो : PTI
मुंबई में बड़ी संख्या में महिलाएं सीएए के खिलाफ धरने पर बैठी हैं।
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गुवाहाटी में प्रदर्शन।
- फोटो : PTI
असम के गुवाहाटी में अखिल असम छात्र संघ के छात्रों ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन किया।