निशिकांत दुबे, सांसद, भाजपा
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पिछले न्यायालय के फैसलों का जिक्र करते हुए भाजपा सांसद ने समलैंगिकता के वैधीकरण और धार्मिक विवादों जैसे मुद्दों से निपटने के लिए न्यायपालिका की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'अनुच्छेद 377 था, जिसमें समलैंगिकता को बहुत बड़ा अपराध माना गया था। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश में ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि इस दुनिया में केवल दो लिंग हैं- पुरुष या महिला...। चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, बौद्ध हो, जैन हो या सिख हो, सभी मानते हैं कि समलैंगिकता एक अपराध है। एक सुबह सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले को खत्म करते हैं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 141 कहता है कि हम जो कानून बनाते हैं, जो फैसले देते हैं, वे निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लागू होते हैं। अनुच्छेद 368 कहता है कि संसद के पास सभी कानून बनाने का अधिकार है और सुप्रीम कोर्ट के पास कानून की व्याख्या करने की शक्ति है। शीर्ष अदालत राष्ट्रपति और राज्यपाल से पूछ रही है कि वे बताएं कि उन्हें विधेयकों के संबंध में क्या करना है। जब राम मंदिर, कृष्ण जन्मभूमि या ज्ञानवापी का मुद्दा उठता है, तो आप कहते हैं, 'हमें कागज दिखाओ।' मुगलों के आने के बाद जो मस्जिद बनी है] उनके लिए कह रहे हो कि कागज कहां से दिखाओ।