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Elections 2021: जिन राज्यों में कभी भाजपा का नहीं था वजूद, आज बन गई है बड़ी ताकत

Sat, 27 Feb 2021 05:47 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीएम मोदी, अमित शाह और ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला
इस साल पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, अभी दो राज्यों के चुनावों की तारीखा का ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया है। पश्चिम बंगाल समेत चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीख सामने आने के बाद अब राजनीतिक दल जोर शोर से प्रचार में लग जाएंगे। खास बात यह है जहां कभी भाजपा का कोई वजूद नहीं था आज वहां भाजपा ही मुख्य विपक्षी दल बन कर उभरी है। 

खासतौर से पश्चिम बंगाल में, यहां ममता दीदी को भाजपा से पहली बार चुनौती मिल रही है। भाजपा के बडे़ बड़े नेता बंगाल में चुनाव का प्रचार कर रहे हैं। 2011 में सत्ता में आईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पहली बार इतनी कड़ी टक्कर मिल रही है। 34 साल बंगाल पर राज करने वाली लेफ्ट का कोई अता पता नहीं दिखा रहा, टक्कर सिर्फ टीएमसी और भाजपा के बीच दिख रही है। पिछले बंगाल चुनाव में भाजपा को 11 फीसदी वोट मिले थे और टीएमसी को 45 फीसदी वोट मिले थे। आज भाजपा जोर-शोर से बंगाल को फतह करने में लग गई है जो ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
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तमिलनाडु में पैर जमाने की कोशिश में भाजपा

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एमजी रामचंद्रन और जयललिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते पीएम मोदी - फोटो : एएनआई
तमिलनाडु
तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहां हिंदी भाषी नेताओं को कम तवज्जो दी जाती है। लेकिन कुछ समय में ही पीएम मोदी ने तमिलनाडु को कई सौगातें दी हैं। अब भाजपा के बड़े नेता वहीं भी जमीनी स्तर पर अपना काम शुरू कर रहे हैं। ऐसा पहली तमिलनाडु में 40 साल में पहली बार करुणानिधि और जयललिता के बिना चुनाव होंगे। जयललिता छह बार और करुणानिधि पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे। लेकिन भाजपा धीरे-धीरे हिंदुत्व की आगे करके अपने पैर जमाने की कोशिश कर ही है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल डीएमके को हिंदू विरोधी कहा था। 
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असम में भाजपा का राज

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अमित शाह - फोटो : ANI
असम
भाजपा नेता और गृह मंत्री लगातार असम का दौरा कर रहे हैं साथ ही बड़ी बड़ी जनसभाओं को संबोधित कर रहे है। वहां का मुख्य मुद्दा एनआरसी है। असम में एनआरसी लागू होने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है। भाजपा इसे हर जनसभा में लागू करने की बाद कहती है। वहीं असम में भाजपा ने तिवा स्वायत्त परिषद के चुनाव में 36 में से 33 सीट जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद भाजपा के हौंसले बुलंद हैं। फिलहला असम में भाजपा की ही सरकार है।

केरल में लेफ्ट के लिए चुनौती बनी भाजपा

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केरल के कासरगोद में सभा को संबोधित करते सीएम योगी - फोटो : एएनआई
केरल
केरल में एक समय भाजपा का कोई नामोनिशान नहीं था आज लेफ्ट के सामने सबसे चुनौती भाजपा है। लेफ्ट के पास आखिरी गढ़ केरल है जिसमें उसकी सत्ता है। पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन में साझेदार कांग्रेस केरल में लेफ्ट के लिए प्रमुख चुनौती है। केरल में हिंदू समाज वामपंथियों की विचारधारा का समर्थक माना जाता था। लेकिन भाजपा के आने के बाद पूरा वोट बैंक इसकी तरफ खिसक सकता है। भाजपा केरल में लव जिहाद पर काफी मुखर है वहीं भाजपा ईसाई वोटर को लुभाने की कोशिश में हैं। केरल में करीब 55% हिंदू, 27% ईसाई और 18% मुस्लिम वोटर हैं। हाल ही में मेट्रो मैन के नाम से मशहूर ई श्रीधरन भाजपा में शामिल हुए हैं जो केरल की राजनीति में खासा असर डाल सकते हैं। केरल में योगी आदित्यनाथ की रैली कर रहे हैं और आगे भी रैलियां होनी हैं। योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व का प्रमुख चेहरा माना जाता है।
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पुडिचेरी में भाजपा कमल खिलाने की तैयारी में

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पीएम मोदी की रैली - फोटो : अमर उजाला
पुडुचेरी
हाल ही के दिनों में पुडुचेरी में कांग्रेस की नारायणसामी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। अब इस केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कांग्रेस के बागी विधायकों के बूते भाजपा कमल खिलाने की तैयारी में है। राज्य में कांग्रेस गठबंधन सरकार कार्यकाल पूरा किए बिना गिर गई। अब भाजपा अपने काम में लग गई है पीएम मोदी पुडुचेरी में रैली कर रहै हैं साथ ही नई परियोजनाओं की शुरुआत ही कर रहे हैं। फिलहाल यहां राष्ट्रपति शासन लागू है।
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