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अंतिम संस्कार के समय थम गई थी मुंबई, बिहार-यूपी वालों के बारे में क्या सोचते थे बाल ठाकरे

Thu, 23 Jan 2020 11:12 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Bal Thackeray - फोटो : Shiv Sena Website
महाराष्ट्र की राजनीति पर चर्चा के दौरान एक नाम जो हर किसी के जुबान पर रहता है वह बाल ठाकरे हैं। मुबंई की राजनीति में अहम कद रखने वाले बाल ठाकरे की जयंती पर देश उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। बाल ठाकरे की राजनीति के केंद्र में हिंदुत्व और मराठी मानुष थे। मुंबई आकर बसने वाले उत्तर भारतीयों के खिलाफ उनके बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते थे। बाल ठाकरे का पुणे में 1926 में जन्म हुआ था।
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बाल ठाकरे के फोटो के सामने गले मिलते उद्धव और आदित्य - फोटो : Shiv Sena Insta
17 नवंबर 2012 को मुंबई में 86 साल की अवस्था में बाल ठाकरे की मृत्यु हुई थी। निधन की खबर सुनते ही मुंबई में चारों ओर सन्नाटा पसर गया था। अंतिम संस्कार के दिन भी आलम वैसा ही रहा। सड़कें खाली पड़ी रहीं और गाड़ियों की आवाजाही न के बराबर थी।
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बाल ठाकरे - फोटो : Social Media
शहर की सभी मुख्य जगहों पर पुलिस ने गश्त बढ़ा दी थी। दुकानें रेस्टोरेंट्स और होटल भी बंद हो गए थे। मुंबई की लाइफलाइन लोकल ट्रेनें चल जरूर रही थी लेकिन आम दिन के मुकाबले उनमें यात्रियों की तादाद काफी कम थी। मुंबई में चार्टर्ड एकाउंटेंसी की परीक्षा भी स्थगित कर दी गई थी। उस दिन फिल्मों की शूटिंग वाले स्थान जैसे फिल्मिस्तान, महबूब, फिल्मसिटी स्टूडियो में भी कामकाज बंद था। यहां तक कि छोटे-छोटे टीवी सीरियल की शूटिंग भी नहीं हुई।

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Bal Thackeray - फोटो : social media
बाल ठाकरे लगभग 46 साल तक सार्वजनिक जीवन में रहे। लेकिन उन्होंने न तो कभी कोई चुनाव लड़ा, न ही कोई राजनीतिक पद स्वीकार किया, फिर भी महाराष्ट्र की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे। मुंबई को अपना गढ़ बनाकर काम करने वाले बाल ठाकरे अपने विवादित बयानों की वजह से अक्सर सुर्खियां बटोरते रहे। जानिए उनके कुछ ऐसे ही विवादास्पद बयान
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Bal Thackeray
मुंबई में परमिट सिस्टम
अन्य राज्यों से मुंबई आकर बसने वालों के खिलाफ बाल ठाकरे बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग करते थे। विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले लोगों के प्रति उनकी टिप्पणी हमेशा से सख्त होती थी। उसी समय से यूपी-बिहार के लोगों को 'भईया' कहकर पुकारा जाने लगा था। मार्च 2010 में महाराष्ट्र के राज्यपाल के शंकरनारायण ने कहा था कि मुंबई में कोई भी रह सकता है। इस पर बाल ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा था कि मुंबई धर्मशाला बन गई है, बाहरी लोगों को आने से रोकने का एकमात्र तरीका यही है कि परमिट सिस्टम लागू कर दिया जाए।
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Bal Thackeray
बिहारी को बीमारी बताया
साल 2008 में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने बिहार के लोगों को लेकर विवादित बयान दिया था। सामना में प्रकाशित संपादकीय में बाल ठाकरे ने बिहारियों के लिए गोबर का कीड़ा शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने बिहारियों के लिए 'एक बिहारी सौ बीमारी' जैसी संज्ञा का इस्तेमाल भी किया था। 
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Sachin Tendulkar- Bal Thackeray - फोटो : सोशल मीडिया
सचिन तेंदुलकर पर निशाना
नवंबर 2009 में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कहा था कि मुंबई...हर भारतीय की है। जिसपर बाल ठाकरे ने क्रिकेट के बहाने राजनीति न करने की नसीहत भी दी थी। उन्होंने कहा था कि जब आप चौका या छक्का लगाते हैं तो लोग आपकी सराहना करते हैं, लेकिन यदि आप मराठियों के अधिकारों का उल्लंघन करेंगे या उन पर टीका-टिप्पणी करेंगे तो इससे मराठी मानुष आहत होगा और वो इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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Bal Thackeray
सानिया मिर्जा पर निशाना
अप्रैल 2010 में बाल ठाकरे ने टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से विवाह करने को लेकर निशान साधा था। ठाकरे ने कहा था कि सानिया यदि भारत के लिए खेलना चाहती हैं तो उन्हें किसी भारतीय को ही अपना जीवनसाथी चुनना होगा और यदि सानिया ने शोएब से ब्याह किया तो भारतीय नहीं रहेंगी, उनका दिल यदि हिंदुस्तानी होता तो किसी पाकिस्तानी के लिए नहीं धड़कता। उन्होंने कहा था कि सानिया अपने खेल की वजह से नहीं बल्कि अपने तंग कपड़ों, फैशन और प्रेम प्रसंगों की वजह से मशहूर हैं।

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Bal Thackeray
आईपीएल में पाक खिलाड़ियों को लेने पर शाहरुख पर भड़के थे ठाकरे
पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ियों को आईपीएल में शामिल करने की बात पर ठाकरे ने अभिनेता और कोलकाता नाइट राइडर्स के सह मालिक शाहरुख खान पर निशाना साधा था। बाल ठाकरे ने कहा था कि शाहरुख को इसके लिए निशान-ए-पाकिस्तान से नवाजा जाना चाहिए।
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Bal Thackeray - फोटो : Social Media
आईपीएल पर प्रतिबंध की मांग
साल 2010 में बाल ठाकरे ने क्रिकेट को बचाने के नाम पर इंडियन प्रीमियर लीग पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की थी। बाल ठाकरे ने अपने बयान में कहा था कि तत्कालीन आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने क्रिकेट की जेंटलमेंस गेम वाली छवि खराब की है।
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