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यूं ही नहीं मैं 'अटल' कहलाता हूं, तस्वीरों में देखिए निधन से पंचतत्व में विलीन होने तक का अंतिम सफर

Fri, 17 Aug 2018 10:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथा अंतिम संस्कार किया गया।

 
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दिल्ली के राजघाट स्थित स्मृति स्थल पर पूरे देश ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। वाजपेयी द्वारा गोद ली गई बेटी नमिता भट्टाचार्य ने उन्हें मुखाग्नि दी।



 
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अटल जी ने गुरुवार शाम 5.05 बजे दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली थी, वे नौ साल से बीमार थे और 67 दिन से एम्स में भर्ती थे।

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अंत्येष्टि में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे।

 
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- फोटो : कुमार संजय
अंतिम संस्कार से पहले वाजपेयी के दर्शन के लिए अंतिम यात्रा निकाली गई।
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उनकी अंतिम यात्रा भाजपा मुख्यालय से शुरू हुई जिसमें हजारों की संख्या में लोग अपने प्रिय नेता को अश्रूपूर्ण विदाई दी।
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पीएम मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत कई नेता अंतिम यात्रा में आम लोगों के साथ पैदल भाजपा मुख्यालय से स्मृति स्थल पहुंचे।

 

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वाजपेयी का पार्थिव शरीर कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास से सुबह 11 बजे दीन दयाल मार्ग पर भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय लाया गया था। जहां बड़ी संख्या में बच्चे, बूढ़े, महिलाएं सभी मौजूद थे। 

 

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अटल जी के निधन पर 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।
 

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इसके साथ ही देश के 12 राज्यों ने शुक्रवार को राजकीय शोक और अवकाश की घोषणा की।

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इनमें दिल्ली, उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, ओडिशा, पंजाब, बिहार, झारखंड, हरियाणा, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्य शामिल हैं। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'मेरे लिए अटल जी का जाना पिता को खोने जैसा है। मैं जब भी उनसे मिलता था तो वह पिता की तरह मुझे गले लगाते थे। वह मां भारती के सच्चे सपूत थे अटलजी। उनके जाने से एक युग का अंत हुआ है।'

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भूटान नरेश जिग्मे खेसर, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका के विदेश मंत्रियों समेत कई विदेशी नेताओं ने भी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। 

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बता दें कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद वाजपेयी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।
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- फोटो : अमर उजाला
आपको बता दें कि वाजपेयी साल 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा सदस्य चुने गए थे। वह बतौर प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूर्ण करने वाले पहले और अभी तक एकमात्र गैर-कांग्रेसी नेता थे।
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