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Atal Bihari Vajpayee: चार राज्यों की लोकसभा सीटों से जीता चुनाव, विदेश मंत्री भी रहे; जानें अटलजी के बारे में

Wed, 25 Dec 2024 01:42 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Atal Bihari Vajpayee 100th birthday: अटल बिहारी वाजपेयी 16 से 31 मार्च 1996 और फिर 19 मार्च 1998 से 13 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वाजपेयी जवाहर लाल नेहरू के बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता बन गए थे। इंदिरा गांधी के बाद लगातार तीन बार अपने नेतृत्व में पार्टी को जीत दिलाने वाले इकलौते प्रधानमंत्री का गौरव भी वाजपेयी के नाम है।
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Atal Bihari Bajpai - फोटो : Amar Ujala
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज जन्म शताब्दी है। इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए बुधवार को उनके स्मारक पर आयोजित प्रार्थना सभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। 'सदैव अटल' में गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे। इनके अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी दलों से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, जनता दल (यूनाइटेड) नेता ललन सिंह और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) से जीतन राम मांझी ने भी अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और वाजपेयी की दत्तक पुत्री के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।
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'सदैव अटल' - फोटो : PTI
कई सियासी रिकॉर्ड अपने नाम किए
अटल बिहारी वाजपेयी 16 से 31 मार्च 1996 और फिर 19 मार्च 1998 से 13 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वाजपेयी जवाहर लाल नेहरू के बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता बन गए थे। इंदिरा गांधी के बाद लगातार तीन बार अपने नेतृत्व में पार्टी को जीत दिलाने वाले इकलौते प्रधानमंत्री का गौरव भी वाजपेयी के नाम है।
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अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था जन्म
25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कृष्ण बिहारी वाजपेयी और कृष्णा देवी के घर जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी के पास चार दशक से अधिक समय का संसदीय अनुभव था। वे 1957 से संसद सदस्य रहे हैं। वे 5वीं,  6वीं, 7वीं लोकसभा और फिर उसके बाद 10वीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा में चुनाव जीतकर पहुंचे। इसके अलावा 1962 और 1986 में दो बार वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे। 2004 में वे पांचवी बार लगातार लखनऊ से चुनाव जीतकर लोक सभा पहुंचे।

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Atal Bihari Vajpayee Jayanti - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
चार राज्यों से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे
अटल बिहारी वाजपेयी इकलौते नेता हैं, जिन्हें चार अलग-अलग राज्यों (उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली) से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने का गौरव हासिल है। प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण, आर्थिक नीतियों में दूरदर्शिता जैसे गौरवशाली पल देखे। आधारभूत संरचना के विकास की बड़ी योजनाएं जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग और स्वर्णिम चतुर्भुज योजनाएं भी इनमें शामिल हैं।
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Atal Bihari Vajpayee Jayanti - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
साहित्यिक, कलात्मक और वैज्ञानिक उपलब्धियां
अटल बिहारी वाजपेयी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीतिशास्त्र में परास्नातक की डिग्री हासिल की। शिक्षा के दौरान कई साहित्यिक, कलात्मक और वैज्ञानिक उपलब्धियां उनके नाम रहीं। उन्होंने राष्ट्रधर्म (मासिक पत्रिका), पाञ्चजन्य (हिंदी साप्ताहिक) के अलावा दैनिक अखबारों जैसे स्वदेश और वीर अर्जुन का संपादन किया। इसके अलावा भी उनकी बहुत सी किताबें प्रकाशित हुईं, जिनमें मेरी संसदीय यात्रा-चार भाग में, मेरी इक्यावन कविताएं, संकल्प काल, शक्ति से शांति, फोर डीकेड्स इन पार्लियामेंट 1957-95 (स्पीचेज इन थ्री वॉल्यूम), मृत्यु या हत्याध, अमर बलिदान, कैदी कविराज की कुंडलियां (इमरजेंसी के दौरान जेल में लिखी गई कविताओं का संकलन), न्यू डाइमेंसंस ऑफ इंडियाज फॉरेन पॉलिसी आदि प्रमुख हैं।
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Atal Bihari Vajpayee Jayanti - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय थे
अटल बिहारी वाजपेयी ने कई सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। वे 1961 से राष्ट्रीय एकता परिषद के सदस्य रहे हैं। उन्होंने ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एंड असिस्टेंट स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (1965-70) का अध्यक्ष पद संभाला। वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक समिति (1968-84), दीनदयाल धाम, फराह, मथुरा, उत्तर प्रदेश और जन्मभूमि स्मारक समिति (1969) से भी जुड़े रहे।
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Atal Bihari Vajpayee Jayanti - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
ऐसा रहा सियासी सफर
अटल बिहारी वाजपेयी 1951 में जनसंघ के संस्थापक सदस्य और फिर 1968-1973 में भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष और 1955-1977 तक जनसंघ संसदीय पार्टी के नेता रहे। वह 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य के रूप में और 1980 से 1986 तक भाजपा के अध्यक्ष रहे। साथ ही 1980-1984, 1986, 1993-1996 में वे भाजपा संसदीय दल के नेता रहे। 11वीं लोक सभा के दौरान वह नेता विपक्ष के पद पर रहे। इससे पहले मोरार जी देसाई की सरकार में उन्होंने 24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक विदेश मंत्री का पदभार भी संभाला।

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अटल जी की जन्मशती - फोटो : Amar Ujala
1998-99 वाला प्रधानमंत्री कार्यकाल रहा यादगार
अटल बिहारी वाजपेयी के 1998-99 के प्रधानमंत्री के कार्यकाल को ''दृढ़निश्चकय के एक साल' के रूप में कहा जा सकता है। इसी दौरान 1998 के मई महीने में भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया था, जिन्होंने परमाणु परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। फरवरी 1999 में पाकिस्तान बस यात्रा ने उपमहाद्वीप की परेशानियों को सुलझाने के लिए एक नए दौर का सूत्रपात किया। इसकी पूरी दुनिया में प्रशंसा हुई। इस मामले में भारत की ईमानदार कोशिश ने वैश्विक समुदाय में अच्छा प्रभाव छोड़ा। बाद में जब मित्रता का यह रूप धोखे के रूप में कारगिल के तौर पर परिलक्षित हुआ, तब भी अटल बिहारी वाजपेयी ने विषम परिस्थितियों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया और घुसपैठियों को बाहर खदेड़ने में सफलता हासिल की।

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अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती - फोटो : Amar Ujala
2015 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया
अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्र के प्रति उनके सेवाओं के मद्देनजर वर्ष 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें लोकमान्य तिलक पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ संसद सदस्य आदि पुरस्कार से नवाजा गया। इससे पहले 1993 में कानपुर विश्वदविद्यालय ने मानद डॉक्ट्रेट की उपाधि से नवाजा था। वर्ष 2014 में उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा की गई और मार्च 2015 में उन्हें भारत रत्न से प्रदान किया गया। उन्हें 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' की उपाधि से अलंकृत किया गया। 16 अगस्त 2018 को 93 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
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अटल जी की जन्मशती - फोटो : Amar Ujala
यह जिम्मेदारियां भी संभाली
1951: संस्थापक सदस्य, भारतीय जनसंघ
1957: भारतीय जनसंघ संसदीय पार्टी से दूसरे लोकसभा चुनाव में चुने गए
1957-77: भारतीय जनसंघ संसदीय दल के नेता 
1962: राज्यसभा सदस्य
1966-67: सरकारी आश्वाससनों संबंधी समिति के अध्यक्ष 
1967: चौथे लोक सभा चुनाव में दोबारा चुने गए
1967-70: लोक लेखा समिति के अध्यक्ष 
1968-73: भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष 
1971: पांचवे लोक सभा चुनाव में अपने तीसरे कार्यकाल के लिए फिर चुने गए 
1977: छठवें लोक सभा चुनाव में अपने चौथे कार्यकाल के लिए चुने गए 
1977-79: केंद्रीय विदेश मंत्री रहे 
1977-80: जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे
1980: सातवें लोकसभा चुनाव में अपने पांचवें कार्यकाल के लिए चुने गए
1980-86: भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे
1980-84, 1986 और 1993-96: भाजपा संसदीय दल के नेता रहे
1986: राज्यसभा के सदस्य और सामान्य प्रयोजन समिति के सदस्य रहे
1988-90: गृह समिति के सदस्य और कार्यमंत्रणा समिति के सदस्य रहे
1990-91: याचिका समिति के अध्यक्ष
1991: 10वें लोकसभा चुनाव में अपने छठवें कार्यकाल के लिए चुने गए
1991-93: लोकलेखा समिति के अध्यक्ष रहे
1993-96: विदेशी मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे
1996: 11वें लोकसभा चुनाव में अपने सातवें कार्यकाल के लिए चुने गए
16 मई से 31 मई 1996: भारत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, कई मंत्रालयों के प्रभारी, कोयला, संचार, ऊर्जा, स्टील, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर, रेलवे, ग्रामीण विकास, परमाणु ऊर्जा, कपड़ा, परिवहन आदि 
1996-97: लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष रहे
1997-98: विदेशी मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे
1998: 12वीं लोक सभा चुनाव में अपने आठवें कार्यकाल के लिए चुने गए
1998-99: भारत के प्रधानमंत्री रहे, इस दौरान विदेश मंत्रालय समेत अन्य मंत्रालय (जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं हुए थे) के प्रभार संभाले
1999: 13वीं लोकसभा चुनाव में अपने नौवें कार्यकाल के लिए चुने गए 
13 अक्टूबर 1999 से 13 मई 2004: भारत के प्रधानमंत्री रहे, इस दौरान अन्य मंत्रालय (जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं हुए थे) के प्रभार संभाले

(भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक)
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