पश्चिम बंगाल को अब सिर्फ बंगाल या बांग्ला के नाम से जाना जाएगा। विधानसभा ने राज्य का नाम बदलने वाला प्रस्ताव पास कर दिया है। अंग्रेजी में इसे बंगाल
(Bengal) लिखा जाएगा, बंगाली में बांग्ला और हिंदी में बंगाल होगा। हालांकि लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी ने इसका विरोध करते हुए सोमवार को सदन से वॉकआउट
किया।
विधानसभा से प्रस्ताव पास होने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, 'इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा, जो इसका विरोध कर रहे हैं। आज का दिन ऐतिहासिक
है और इसे सुनहरे अक्षरों में याद किया जाएगा।' नाम बदलने पर औपचारिक मुहर के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा।
सदन में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान बहस के जुबानी जंग में बदलने पर विपक्ष ने वॉकआउट किया। सीपीएम ने इसका विरोध किया और सीपीएम विधायक सुजान
चक्रवर्ती ने सभी भाषाओं में राज्य का एक ही नाम बांग्ला करने की मांग की।
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ममता की शिकायत; नहीं मिलता बोलने का समय
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- फोटो : ANI
बनर्जी ने कहा कि वामपंथियों ने भी राज्य का नाम बदलने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे और अब इसका विरोध कर रहे हैं।
नाम बदलने के बाद बंगाल का नंबर अब किसी भी सूची में ऊपरी क्रम में आएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अक्सर यह शिकायत रहती थी कि अंतरराज्यीय बैठकों में उन्हें बोलने का समय कम मिलता है क्योंकि पश्चिम बंगाल का नंबर सूची में 31वें नंबर पर सबसे आखिर में आता।
राज्य का नाम बदलने को लेकर ममता सरकार बोंगो (यह एक वाद्य यंत्र का नाम है) और बांग्ला (यह स्थानीय शराब उत्पाद का नाम है) पर विचार कर रही थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा करते हुए कहा कि 'बांग्ला' को चुन लिया गया है।
सीपीएम की ओर से राज्य का नाम बदलने को लेकर कमिटी गठन कर चर्चा के बाद राय लिए जाने की मांग की गई थी। हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मांग को ठुकरा दिया।
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वाम सरकार ने भी की थी नाम बदलने की कोशिश
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लेफ्ट
- फोटो : CPIM
ममता बनर्जी ने कहा था कि सभी भाषाओं में एक नाम लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश को लेकर भी संशय हो सकता है। आखिर में सदन में वोटिंग हुई और इसका परिणाम 189-31 रहा। मौजूदा समय में बंगाली में राज्य का नाम 'पश्चिम बंग' है।
साल 2011 में बुद्धदेब भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने भी राज्य का नाम पश्चिम बंग करने का निर्णय लिया था। हालांकि यह कभी पास नहीं हो पाया।
आजादी से पहले बंगाल ही था नाम
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पश्मिम बंगाल में ममता की जीत
- फोटो : PTI
1947 में आजादी और विभाजन के समय बंगाल का बंटवारा हो गया। इसमें पश्चिम बंगाल भारत के हिस्से आया। पूर्वी बंगाल अब बांग्लादेश का हिस्सा है।
'पूर्वी बंगाल नहीं है, तो पश्चिम बंगाल का औचित्य नहीं'
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- फोटो : bbc
राज्य का नाम बदलने को लेकर हुए प्रयासों पर बांग्ला के ख्यात साहित्यकार दिवंगत सुनील गंगोपाध्याय ने कहा था कि अगर यहां कोई पूर्वी बंगाल नहीं है, तो पश्चिम बंगाल का कोई औचित्य नहीं है।