पांच राज्यों मध्यप्रदेश, मिजोरम, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। 11 दिसंबर को पांचों राज्यों के चुनाव परिणाम आएंगे। माना जा रहा है कि 11 दिसंबर को आने वाले नतीजे 2019 के आम चुनाव की तस्वीर साफ करेंगे।इस सियासी दंगल को लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सेमीफाइनल के तौर देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं।मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पहले से ही भाजपा की सरकार है। ऐसे में बीजेपी के लिए एंटी इंकमबेंसी फैक्टर सबसे बड़ी चुनौती होगा। कुल मिलाकर यह चुनाव सत्ताधारी पार्टी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
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shivraj singh chouhan
विपक्षी पार्टियों में आंतरिक बिखराव और गुटबाजी के चलते पिछले चार सालों में भाजपा एक के बाद एक लगभग सभी चुनाव जीतती आ रही है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली प्रदेश सरकार कई आरोपों से घिरी होने के बावजूद जीत को लेकर आत्मविश्वास से भरी हुई है। इसकी एक मुख्य वजह कांग्रेस के भीतर अंदरूनी गुटबाजी है। उसके पास सीएम पद के लिए चेहरा चुनना भी मुश्किल हो रहा है। कांग्रेस यहां 15 साल से सत्ता वापसी की बाट जोह रही है। कांग्रेस साफ तौर पर बंटी नजर आ रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ अपना अलग राग अलाप रहे हैं, तो वहीं दिग्विजय सिंह गुट अलग खिचड़ी पका रहा है। पार्टी में एकजुटता नहीं दिखाई दे रही।
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vasundhara raje
राजस्थान में भाजपा के लिए हालात विपरीत हैं। यहां वसुंधरा सरकार से जनता की नाराजगी जगजाहिर हो रही है। तमाम सर्वे भी बता रहे हैं कि यहां भाजपा की सत्ता पलट रही है। कांग्रेस भी इसे लेकर आश्वस्त है। सचिन पायलट और अशोक गहलोत की जोड़ी मतदाताओं के बीच पहुंचकर सरकार को घेर रही है। राजस्थान का सियासी इतिहास भी बताता है कि यहां कोई भी पार्टी लगातार दो बार सत्ता में नहीं रहती।
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रमन सिंह
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की आपसी कलह के चलते सत्ताधारी भाजपा पर एंटी इंकमबेंसी का असर ज्यादा नहीं दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के पूर्व कद्दावर नेता अजीत जोगी के अलग होने से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ी हैं और इसने भाजपा की राहें आसान कर दी हैं। अजीत जोगी ने बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती के साथ गठबंधन करके कांग्रेस को जबरदस्त झटका दिया है । दो खेमों में बंटी कांग्रेस 15 साल बाद भी सत्ता में वापसी कर पाएगी इसे लेकर संशय नजर आने लगा है।
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telangana
दक्षिण भारत के राज्य तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सत्ता पर काबिज है। कयास लग रहे हैं कि टीआरएस दोबारा सत्ता में वापसी करेगी क्योंकि उसकी यहां मजबूत पकड़ है। तेलंगाना में समय से पहले ही चुनाव कराए जा रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने 9 महीने पहले ही विधानसभा भंग की घोषणा कर जल्द चुनाव कराने की गुजारिश की थी। इसे लेकर वह विपक्षी दलों के निशाने पर भी हैं। यहां भाजपा और कांग्रेस दूसरे नंबर के लिए लड़ाई लड़ेंगे।
मिजोरम में कांग्रेस की हुकूमत है। यह एकमात्र पूर्वोत्तर राज्य है जहां कांग्रेस की सत्ता बची हुई है। लिहाजा इसे बनाए रखने में वह कोई कसर नहीं छोड़ेगी। 2013 के चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ कई दल एक हो गए थे, लेकिन जीत कांग्रेस को ही मिली थी। इस बार उसका मुकाबला मिजो नेशनल फ्रंट से है। भाजपा अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की पूरी कोशिश कर रही है।