2019 में आज के ही दिन जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था। आजादी के बाद जम्मू कश्मीर को लेकर अब तक का ये सबसे बड़ा फैसला था। पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हुई। कांग्रेस समेत जम्मू कश्मीर के कई राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया था। अब अनुच्छेद 370 हटे तीन साल पूरे हो चुके हैं।
ऐसे में आइए जानते हैं कि तीन साल में जम्मू कश्मीर कितना बदला? सरकार की कोशिशें कितनी रंग लाई? आतंकी हमले से लेकर विकास और कश्मीरियों के विश्वास तक इन तीन साल में क्या-क्या हुआ?
तीन साल में नहीं बन सकी कोई सरकार
अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही केंद्र सरकार ने 2019 में जम्मू कश्मीर और लेह-लद्दाख को अलग कर दिया था। दोनों को केंद्र शासित राज्य घोषित किया गया था। जम्मू कश्मीर में विधानसभा भंग कर दी गई थी और राष्ट्रपति शासन लागू कर दी गई थी। आज तीन साल बाद भी, जम्मू-कश्मीर में कोई निर्वाचित सरकार नहीं है। हालांकि, चुनाव को लेकर काफी तैयारियां चल रहीं हैं। परिसीमन आयोग ने परिसीमन भी कर लिया है। नए परिसीमन में 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 43 अब जम्मू और 47 कश्मीर क्षेत्र का हिस्सा होंगे।
नौ सीटें अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए भी आरक्षित की गई हैं। इनमें से छह जम्मू क्षेत्र में और तीन कश्मीर घाटी में हैं। कश्मीरी पंडितों के लिए दो और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) शरणार्थियों के लिए चार सीटें भी अलग रखी गई हैं जो पहले नहीं थीं।
परिसीमन आयोग ने अब अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब चुनाव आयोग और सरकार को मिलकर फैसला लेना है कि जम्मू कश्मीर में कब विधानसभा चुनाव होंगे। हालांकि, जम्मू-कश्मीर में पंचायती राज की सभी इकाई काम कर रही है। पंचायती चुनाव भी अनुच्छेद 370 हटने के बाद कराए गए थे।
आतंकवाद, घुसपैठ और हिंसक घटनाओं में कमी आई या बढ़ गई?
2018 में जम्मू कश्मीर में घुसपैठ की 143 बार कोशिशें हुईं और 417 आतंकी हमले हुए। इसके बाद पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया। तब 2019 में घुसपैठ की 141 और 255 आतंकी घटनाएं हुईं। 2020 में घुसपैठ की 51 घटनाएं दर्ज हैं। 244 बार आतंकी घटनाएं हुईं हैं।
2021 में 28 घुसपैठ की कोशिशें हुईं और 229 आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया गया। इस दौरान 459 आतंकवादी, 128 सुरक्षाकर्मी और 118 नागरिक मारे गए। मारे गए नागरिकों में पांच कश्मीरी पंडित, 16 गैर कश्मीरी हिंदू और सिख थे। इस साल घाटी में कश्मीरी पंडितों, हिंदुओं को आतंकवादी टारगेट कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएं पिछले एक साल में काफी बढ़ गईं हैं।
रोजगार सृजन को लेकर क्या हुआ?
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से सरकार ने रोजगार बढ़ने का भी दावा किया है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार बेरोजगारी का आंकड़ा बढ़ा है। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में जम्मू कश्मीर में 12.7 प्रतिशत बेरोजगारी दर थी, जो 2022 में बढ़कर 20.2 प्रतिशत हो गई है। 2019 में 20.6%, 2020 में 16.6%, 2021 में 16.9% बेरोजगारी दर थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद एक साल तक करीब पूरा जम्मू कश्मीर बंद था। इसके बाद खुला तो कोरोना ने पांव फैला दिए। इसके चलते बेरोजगारी दर में इजाफा हुआ है। सरकार का दावा है कि 2019 से लेकर अब तक जम्मू कश्मीर में 30 हजार लोगों को रोजगार मुहैया कराया गया है। एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, सरकार ने कहा कि 2020-2021 में कुल 841 नियुक्ति की गई, उसके बाद 2021-2022 में 1,264 नियुक्ति की गईं। सरकार का यह भी दावा है कि 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर सरकार के विभिन्न विभागों में 5,502 से अधिक कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरी दी गई है।
पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। हालांकि, पहले कर्फ्यू और फिर कोरोना संक्रमण के चलते इसके काम भी धीमे हो गए। कोरोना महामारी के बाद करीब 10 लाख लोग कश्मीर घूमने पहुंचे। इस साल अमरनाथ यात्रा में ही आठ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, आतंकी हमले और प्राकृतिक आपदा के चलते इसमें कमी आई है।