भारतीय सेना इन दिनों पूर्वोतर राज्यों के पहाड़ी इलाकों में दमखम दिखा रही है। सेना ने 10 नवंबर को अरुणाचल प्रदेश और असम में त्रिस्तरीय सैन्य अभ्यास पूर्वी प्रहार शुरू किया है। इसमें तीनों सेनाओं के जवान भाग ले रहे हैं और पहाड़ी इलाकों में युद्ध से निपटने की चुनौतियों को जवाब देने के लिए तैयारी कर रहे हैं। तस्वीरों में देखें कैसे चल रहा सैन्य अभ्यास...।
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सैन्य अभ्यास पूर्वी प्रहार के दौरान मौजूद सेनाओं के जवान।
- फोटो : ANI
भारतीय सेना इन दिनों पूर्वोतर राज्यों के पहाड़ी इलाकों में दमखम दिखा रही है। सेना ने 10 नवंबर को अरुणाचल प्रदेश और असम में त्रिस्तरीय सैन्य अभ्यास पूर्वी प्रहार शुरू किया है। इसमें तीनों सेनाओं के जवान भाग ले रहे हैं और पहाड़ी इलाकों में युद्ध से निपटने की चुनौतियों को जवाब देने के लिए तैयारी कर रहे हैं।
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सैन्य अभ्यास पूर्वी प्रहार के दौरान उड़ता हेलीकॉप्टर।
- फोटो : ANI
पहाड़ों में सैन्य शक्ति बढ़ाने पर जोर
पहाड़ी इलाकों में सैन्य अभ्यास पूर्वी प्रहार 10 नवंबर से शुरू हुआ था। इसमें सेना के जवानों ने अलग-अलग तरह से युद्ध कौशलों के बारे में सीखा है। इस सैन्य अभ्यास का समापन 18 नवंबर को होगा। सैन्य अभ्यास का उद्देश्य पहाड़ी इलाकों में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की युद्ध क्षमता को बढ़ाना है। ताकि तीनों सेनाओं में समन्वय और तत्परता बढ़ सके।
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सैन्य अभ्यास पूर्वी प्रहार का जायजा लेने पहुंचे सेना के अधिकारी।
- फोटो : ANI
अधिकारियों ने लिया सैन्य अभ्यास का जायजा
पहाड़ी क्षेत्र में चल रहे सैन्य अभ्यास का अधिकारियों ने जायजा लिया। पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी और पूर्वी वायु कमान के एयर मार्शल आईएस वालिया ने भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की बेजोड़ युद्ध क्षमताओं का प्रदर्शन देखा। पूर्वी सेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक इस दौरान तीनों सेनाओं ने चुनौतीपूर्ण वातावरण में सटीकता और दक्षता के साथ नई पीढ़ी के उपकरणों के जरिये जटिल ऑपरेशनों को अंजाम दिया। लेफ्टिनेंट जनरल तिवारी ने सभी कार्यों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सैनिकों के उत्साह और इच्छा की सराहना की।
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पहाड़ी इलाकों में चल रहा सैन्य अभ्यास पूर्वी प्रहार।
- फोटो : ANI
एलएसी से वापसी के बाद पहला संयुक्त सैन्य अभ्यास
हाल ही में भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर हुए समझौते के बाद भारतीय सेना की वास्तविक नियंत्रण रेखा से वापसी हो गई है। इसके बाद यह पहला त्रिस्तरीय संयुक्त अभ्यास हो रहा है। इस सैन्य अभ्यास में सेना के तीनों अंग अपनी युद्ध क्षमता को दिखा रहे हैं। इसमें इन्फ्रेंटी फाइटर यूनिट, आर्टिलरी गन, लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर, यूएवी का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके साथ ही सुखोई-30, राफेल जैसे लड़ाकू विमान भी युद्ध अभ्यास में शामिल हुए हैं।
पूर्व में रक्षा तैयारी की मजबूती पर जोर
सैन्य अभ्यास में नौसेना के मार्को कमांडो भी भाग ले रहे हैं। अभ्यास का उद्देश्य पूर्वी क्षेत्र में रक्षा तैयारियों और स्थिति के मजबूत करना है। इसके साथ ही सेना के तीनों अंगों की संयुक्त क्षमता को निखारना है। 18 नवंबर तक चलने वाले संयुक्त अभ्यास में वायु सेना, नौसेना और थल सेना तीनों अपने-अपने युद्ध कौशल को दिखा रहे हैं। साथ ही पहाड़ी इलाकों में हो रहा यह अभ्यास सेना के युद्ध कौशल को संवारने में बड़ा योगदान देगा।