भारतीय सेना की गजराज कोर ने असम के तेजपुर में ‘सोनितपुर संवाद’ संगोष्ठी आयोजित कर सेना, प्रशासन और नागरिक संस्थाओं के सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में आत्मनिर्भरता, समन्वय और राष्ट्र निर्माण पर चर्चा हुई। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एलजीबीआरआईएमएच और सेना अस्पतालों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
भारतीय सेना की गजराज कोर ने असम के तेजपुर में ‘सोनितपुर संवाद’ नाम के सैन्य-नागरिक समन्वय संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य 'सामूहिक प्रयास से राष्ट्र निर्माण' और 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना के तहत सेना, प्रशासन और नागरिक संस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूत करना था।
‘संवाद’ पहल के तहत समन्वय, आत्मनिर्भरता, मानसिक दृढ़ता, विश्वास और विकास को अमृतकाल के प्रमुख लक्ष्यों के रूप में रखा गया। संगोष्ठी में राज्य प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, शिक्षा संस्थानों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति, एसएसबी के महानिरीक्षक,सोनितपुर रेंज के आईजी, वन विभाग के अधिकारी, पुलिस उपमहानिरीक्षक, बार काउंसिल और नगर निकाय के प्रतिनिधि, निजी अस्पतालों के प्रबंधन अधिकारी, मंगलदोई कौशल विकास केंद्र के प्राचार्य तथा तेजपुर और मिसामारी के अतिरिक्त उपायुक्त समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
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सोनितपुर संवाद
- फोटो : अमर उजाला
गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ने अपने संबोधन में 'जेएआई' यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन को विकसित भारत-2047 के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण हेतु संस्थागत सहयोग, समन्वित कार्रवाई और तय समयसीमा में लक्ष्यों को पूरा करना जरूरी है।
इस कार्यक्रम के दौरान नागरिक-सैन्य सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई क्षेत्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (एलजीबीआरआईएमएच) और गजराज कोर के सेना अस्पतालों के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस सहयोग के तहत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, चिकित्सकीय सहयोग, पेशेवर प्रशिक्षण, शोध गतिविधियों और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों पर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा।
सेना के अधिकारियों ने कहा कि यह पहल क्षेत्रीय विकास, संस्थागत साझेदारी और सामूहिक राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी।