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Balakot Air Strike Anniversary: हमले के लिए आखिर क्यों चुना गया था मिराज 2000 विमान

Wed, 26 Feb 2020 02:20 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मिराज विमान (बालाकोट एयरस्ट्राइक)
भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमानों ने आज से ठीक एक साल पहले पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। पुलवामा में सीआरपीएफ के वीर जवानों की शहादत का बदला लेने के उद्देश्य से किए गए हमले में जैश के सैकड़ों आतंकी मारे गए थे। 
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मिराज विमान
मिराज-2000 विमानों की खासियत
बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर हमले के लिए वायुसेना द्वारा मिराज-2000 विमानों का चयन करना भी एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा था। भारतीय वायुसेना के 12 मिराज-2000 विमानों के समूह ने जैश के कैंप पर 1000 किलग्राम के कई बम गिराए थे। जानिए मिराज-2000 विमानों की खासियत-
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मिराज विमान
दुश्मन की सीमा में अंदर तक घुसकर हमला करने में सक्षम
भारतीय वायुसेना की रीढ़ समझे जाने वाले मिराज-2000 लड़ाकू विमान डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक करने की क्षमता रखते हैं। इसका मतलब यह है कि ये लड़ाकू विमान दुश्मन की सीमा में अंदर तक घुसकर हमला करने में सक्षम हैं।

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मिराज विमान
बिना दुश्मन की रडार में आए लक्ष्य को कर सकता है ध्वस्त
मिराज 2000 लड़ाकू विमान किसी भी देश में भीतर तक जाकर बिना दुश्मन की रडार के पकड़ में आए अपने लक्ष्य को ध्वस्त कर सकता है।
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मिराज-2000 लड़ाकू विमान
फ्रांस की राफेल विमान बनाने वाली कंपनी ने किया है निर्माण
मिराज-2000 विमान फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया है। यह वही कंपनी है जिसने राफेल लड़ाकू विमान को बनाया है।
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मिराज 2000 - फोटो : IAF
नौ देशो की सेना में तैनात है मिराज 2000
मिराज-2000 चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल, सिंगल इंजन लड़ाकू विमान है। इसकी पहली उड़ान साल 1970 में आयोजित की गई थी। यह फाइटर प्लेन अभी लगभग नौ देशो में अपनी सेवाएं दे रहा है। साल 2009 तक लगभग 600 से अधिक मिराज-2000 दुनिया भर में सेवारत हैं।
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मिराज 2000 - फोटो : IAF
विमान के आधुनिकीकरण में जुटी वायुसेना
भारतीय वायुसेना द्वारा संचालित लगभग 51 मिराज 2000 विमानों के एक बेड़े को उन्नत करने के लिए फ्रांस से 1.9 बिलियन डालर का समझौता किया गया है।

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मिराज 2000 - फोटो : IAF
हथियार
मिराज 2000 में घातक हथियारों को ले जाने के लिए नौ हार्ड पॉइंट दिए गए हैं। जिसमें पांच प्लेन के नीचे और दो दोनों तरफ के पंखों पर दिया गया है। मिराज के सिंगल-सीट संस्करण में भी दो हैवी फायरिंग करने वाली 30 मिलीमीटर की बंदूकें लगी होती हैं। 

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मिराज 2000 - फोटो : IAF
कई मिसाइलों को दाग सकता है मिराज 2000
हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों में MICA मल्टीगेट एयर-टू-एयर इंटरसेप्ट और कॉम्बैट मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा भी यह कई प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है। 

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Mirage 2000 and F-16 - फोटो : अमर उजाला
पाक के एफ 16 को रोकने के लिए भारत ने खरीदे मिराज 2000
पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा उस समय के सबसे बेहतरीन और आधुनिक विमान एफ-16 को दिए जाने के बाद भारत ने फ्रांस के मिराज 2000 की खरीद के संबंध में बातचीत शुरू कर दी थी। अक्तूबर 1982 में भारत ने 36 सिंगल-सीट मिराज-2000HS और 4 ट्विन-सीट मिराज-2000THS के लिए डसॉल्ट को ऑर्डर दिया।

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मिराज 2000 - फोटो : IAF
सोवियत संघ से संबंध के कारण विमानों के उत्पादन पर पड़ा प्रभाव
पहले, 150 विमानों की खरीद के लिए फ्रांस के साथ बातचीत चल रही थी, जिसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ संयुक्त उत्पादन के तहत होना था। बता दें कि भारत के पास लाइसेंस के तहत मिराज 2000 का उत्पादन करने का विकल्प था जो बाद में सोवियत संघ के साथ देश के घनिष्ठ संबंध के कारण खत्म हो गया था।

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मिराज-2000 (फाइल फोटो) - फोटो : social media
मिराज 2000 ऑपरेट करने वाला पहला देश भारत 
29 जून 1985 को नंबर 7 स्क्वाड्रन के पहले सात विमानों की डिलीवरी के साथ भारतीय वायु सेना इस प्रकार का पहला विदेशी सेना बनी जिसके पास मिराज 2000 विमान थे। शुरूआत में इस विमान में स्नेक्मा एम 53-5 इंजन थे जिसे बाद में एम 53 पी-2 इंजन से बदल दिया गया।
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मिराज 2000 विमान - फोटो : Social Media
1986 में औपचारिक रूप से वायुसेना में हुआ शामिल
मिराज 2000 में परिवर्तित होने वाला दूसरा स्क्वाड्रन नंबर 1 स्क्वाड्रन था। जिसे द टाइगर्स के नाम से जाना जाता है। इसे 1986 में औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।
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