यूनेस्को की विश्व धरोहरों में वर्तमान में भारत की 32 जगहें शामिल हैं। लेकिन द इंडियन एक्प्रेस की खबर मुताबिक 15 और जगहें ऐसी है जो विश्व धरोहरों में शामिल होने की प्रबल दावेदार कही जा सकती हैं। वजह हैं इन जगहों का इतिहास, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहलू। इनमें से कई जगहों पर आपने भी सैर की होगी। तस्वीरों के जरिए देखिए कि आखिर क्यों हैं ये विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने की प्रबल दावेदार...
विज्ञापन
दावेदार विश्व धरोहरें
2 of 16
बिष्णुपुर के मंदिर
- फोटो : indianexpress.com
पश्चिम बंगाल के बिष्णुपुर के मंदिर विश्व संपदा के दावेदार कहे जा सकते हैं। मंदिर ईंटों के बने हैं। पुरातन और स्थापत्य कला की बेजोड़ निशानी हैं ये मंदिर। इनमें भी गर्भगृह हैं। छतें ढालू नुमा हैं, आसमान की ओर निहारते गुंबद और इमारत में मेहराब दिए गए हैं। ईंट से बने होने के कारण से बेहद आकर्षक लगते हैं। इनमें से ज्यादातर सन 1600 और 1655 के दरमियान बनाए गए।
विज्ञापन
दावेदार विश्व धरोहरें
3 of 16
स्वर्णमंदिर
- फोटो : indianexpress.com
अमृतसर का स्वर्णमंदिर भी इसी फेहरिस्त में है। इसे श्री हरमंदिर साहिब और श्री दरबार साहिब भी कहते हैं। ये सिखों का पावन तीर्थ है लेकिन दुनियाभर से लोग इसे निहारने, इसकी खूबसूरती आंखों में कैद करने के लिए अमृतसर पहुंचते हैं। दिन के उजाले में देखें या रात में, हर पहर में स्वर्ण मंदिर न्यानाभिराम अनुभूति से सराबोर कर देता है। सिखों के चौथे गुरू रामदास ने सन 1574 में इसकी बुनियाद रखी थी। पांचवे गुरू अर्जन ने इसे डिजाइन किया था। इसे अकाल तख्त का घर भी कहते हैं।
दावेदार विश्व धरोहरें
4 of 16
चारमीनार
- फोटो : indianexpress.com
कुतब शाही वंश का प्रतीक गोलकोंडा किला, इसके गुंबद और चारमीनार भी विश्वधरोहर बनने की पंक्ति में नजर आते हैं। ये ऐतिहासिक स्थल आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में हैं। मुख्य शहर से ये 11 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिमी छोर पर हैं। जबकि कुतब शाही गुंबद किले से कुछ ही दूरी पर उत्तर-पश्चिम में हैं।
विज्ञापन
दावेदार विश्व धरोहरें
5 of 16
काकतीय मंदिर और द्वार
- फोटो : indianexpress.com
आंध्रप्रदेश के वारंगल के शानदार काकतीय मंदिर और द्वार भी विश्वधरोहर की दावेदारी करते हैं।
विज्ञापन
दावेदार विश्व धरोहरें
6 of 16
लोटस टेंपल
- फोटो : indianexpress.com
दिल्ली स्थित बाहाई पूजा स्थल यानी लोटस टेंपल भी इसी फेहरिस्त में शामिल है। रोजाना सैकड़ों सैलानी यहां पहुंचते हैं। खास बात ये है कि इस मंदिर को इस प्रकार बनाय गया है कि एक सुई के गिरने की गूंज पूरे मंदिर में सुनाई देती है। इसलिए जो लोग इसमें प्रवेश करते हैं उन्हें चुप रहने की सलाह दी जाती है।
विज्ञापन
दावेदार विश्व धरोहरें
7 of 16
कश्मीर के मुगल गार्डन
- फोटो : indianexpress.com
कश्मीर के मुगल गार्डन। मुगल गार्डन के अंतर्गत 6 बगीचे आते हैं। मुगलकालीन इन बगीचों में प्राकृतिक सुंदरता को जबरदस्त तरीके से सहेजा गया है। यहां आने के बाद यहीं ठहरने का मन करता है। जब भी कश्मीर जाएं तो इनकी सैर करना न भूलें।
दावेदार विश्व धरोहरें
8 of 16
शांतिनिकेतन
- फोटो : indianexpress.com
पश्चिम बंगाल का शांतिनिकेतन। ये यूनीवर्सिटी टाउन के नाम से मशहूर है। कोलकाता से 100 मील की दूरी पर है। देबेंद्रनाथ टैगोर ने इसे आश्रम के तौर पर बनवाया था। जहां किसी भी धर्म-जाति के लोग ईश्वर की प्रार्थना और मेडिटेशन के लिए आते-जाते थे। बाद में यहां कला-संस्कृति और संगीत से जुड़ी उच्चकोटि की शिक्षाएं दी जाने लगीं। अपने पिता की तरह यहां काफी वक्त रविंद्रनाथ टैगोर ने भी बिताया।
दावेदार विश्व धरोहरें
9 of 16
माजुली द्वीप
- फोटो : indianexpress.com
असम में ब्रह्मपुत्र नदी की मझधार में माजुली द्वीप। भौगोलिक तौर पर भारत के उत्तर-पूर्व को माजुली क्षेत्र कहते हैं। इसमें भारत के सात राज्य आते हैं। जिनमें हिमालय के अरुणाचल प्रदेश, असम, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय शामिल हैं। ये द्वीप असम से होकर गुजरने वाली दुनिया की सबसे बड़ी नदी ब्रह्मपुत्र (इसे नद भी कहते हैं) में स्थित है। यहां आने के बाद आपको धरती पर स्वर्ग का दीदार हो जाएगा।
दावेदार विश्व धरोहरें
10 of 16
मांडू स्मारकों का समूह
- फोटो : indianexpress.com
मध्यप्रदेश की मांडू स्मारकों का समूह भी इसी कतार में है। ये धार से 42 किलोमीटर, इंदौर से 112 किलोमीटर और भोपाल से 300 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां किले की दीवार समेत 61 स्मारकों का समूह है। स्मारकों के इस समूह को राष्ट्रीय महत्व घोषित किया जा चुका है।
दावेदार विश्व धरोहरें
11 of 16
सैकरेड एनसेंबल्स ऑफ द होयसाला
- फोटो : indianexpress.com
कर्नाटक स्थिक सैकरेड एनसेंबल्स ऑफ द होयसाला। 11वीं से 14 सदी तक के होयसाला युग के दौरान 1500 ऐसे मंदिरों का निर्माण कराया गया जिनमें एक साथ कई धर्मों की झलक देखी जा सकती थी। इनमें 100 के करीब आज भी मौजूद हैं। ये स्थापत्य कला, बेजोड़ कारीगरी के बेहतरीन स्थल हैं।
दावेदार विश्व धरोहरें
12 of 16
पद्मनाभपुरम पैलेस
- फोटो : indianexpress.com
केरल का पद्मनाभपुरम पैलेस। 16वीं सदी के दौरान त्रावणकोर की महाराजा की शान में बनाया गया लकड़ी का महल है। लकड़ी कारीगरी देखते ही बनती है।
दावेदार विश्व धरोहरें
13 of 16
नालंदा के अवशेष
- फोटो : indianexpress.com
खुदाई में मिले नालंदा के अवशेष। ईसा पूर्व छठीं सदी के महावीर और बुद्ध के दिनों से नालंदा का वजूद जुड़ा है। जैनों के साहित्य के अनुसार महावीर ने 14 वर्षा ऋतुएं यहां बिताई थीं। नालंदा को बुद्ध के अनुयायी सरीपुत्र का जन्म स्थल भी कहा जाता है।
दावेदार विश्व धरोहरें
14 of 16
प्राचीन बौद्ध तीर्थ सारनाथ
- फोटो : indianexpress.com
प्राचीन बौद्ध तीर्थ सारनाथ। ये वाराणसी से 8 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां कई स्मारक हैं जो दो भागों में बांटे गए हैं। एक को चौखंडी स्तूपा कहते हैं।
दावेदार विश्व धरोहरें
15 of 16
सेल्युलर जेल
- फोटो : indianexpress.com
आंडमान निकोबार का सेल्युलर जेल। 572 छोटे द्वीपों से मिलकर बना बना अंडमान और निकोबार द्वीप समूह संघ राज्य क्षेत्र। ये करीब 2000 साल से बसा हुआ है। 18वीं सदी के मध्य में यूरोपीय शासकों के अधीन रहा। ये पेंसिलवानिया के सेपरेट सिस्टम पर आधारित है। साल 1942 से 1945 के तक दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानियों ने यहां कब्जा जमाए रखा। 29 दिसंबर 1943 को भारत की अस्थाई सरकार के मुखिया के तौर पर नेता सुभाष चंद्र बोस ने सेल्युलर जेल का दौरा किया था और इसे भारतीय कारावास करार दिया था।
केरल के एर्णाकुलम का मत्तानचेरी पैलेस। 1555 में पुर्तगालियों ने इसे बनाया था। ये दो स्तरीय चतुष्कोणीय लंबी और विशाल हॉल से मिलकर बनी इमारत है। यहां नीचे के तल में हरम भी बनाया गया।