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15 अगस्त को दुनिया में यहां भी मनाते हैं हर्षोल्लास से स्वाधीनता दिवस

Fri, 10 Aug 2018 04:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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लाल किला
15 अगस्त 1947 को अंग्रेजो की 200 सालों की गुलामी के बाद भारत को आजादी मिली थी। दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटेन भारत को 1947 में आजाद नहीं करना चाहता था। अंग्रेजों की मंशा अगले साल यानि 1948 में भारत को आजाद करना चाहता था। लेकिन महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन से अंग्रेज इतने परेशान हो चुके थे कि उन्होंने भारत को एक साल पहले ही यानी की 15 अगस्त 1947 को ही आजाद करने के विचार पर फैसला ले लिया। पंद्रह अगस्त इतिहास में एक खास तारिख के तौर पर दुनिया में याद किया जाता है, आइये बताते हैं आपको इस दिन से जुड़ी एतिहासिक बातें।
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दक्षिण कोरिया

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दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया को 15 अगस्त 1945 में जापान से आजादी मिली थी। कोरिया 1948 तक संयुक्त था जिसमें दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया मिले हुए थे। लेकिन बाद में इसका बंटवारा हुआ जिसमें उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया अलग अलग देश बन गये। साल 1910 से लेकर साल 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप जापान के कब्जे में रहा था।
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बहरीन

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बहरीन

बहरीन को 15 अगस्त 1971 को ब्रिटेन से आजादी मिली । ये अरब जगत का एक हिस्सा है जो एक द्वीप पर बसा हुआ है और इसकी राजधानी मनामा है। बहरीन में 1985 में नेशनल असेंबली भंग हुई, जो अब तक बहाल नहीं हो पाई है। 1990 में कुवैत पर इराक के आक्रमण के बाद बहरीन संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य बना।

कांगो

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कांगो
15 अगस्त 1960 को कांगो फ्रांस से आजाद हुआ था। कांगो लम्बे समय तक फ्रांस की गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा रहा लेकिन 80 साल के बाद इन बेड़ियों को तोड़ने में सफल हुआ। क्षेत्रफल के अनुसार यह विश्व का 11वां सबसे बड़ा देश है। भारत की तरह यहां भी धूम-धाम से लोग आजादी का जश्न मनाते हैं।
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अंग्रेज न्यायधीश

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अंग्रेज न्यायधीश
पंद्रह अगस्त 1772 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने विभिन्न जिलों में अलग सिविल और आपराधिक अदालतों के गठन का फैसला लिया गया था। इसलिए पंद्रह अगस्त को भारतीय न्यापालिका की नींव पड़ने की तारीख के रूप में देखा जाता है। अंग्रेजों ने एक अपना कानून पूरे देश में लागू करने के उद्देश्य से अदालतों का गठन किया लेकिन िसका सकारात्मक प्रभाव ये हुआ कि देश एक जुट होने लगा।
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जापान का समर्पण

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जापान का समर्पण
भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन के प्रेस सचिव कैम्पबेल जॉनसन के मुताबिक ब्रिटेन के मित्र देश अमेरिका की सेना के सामने जापान इसी दिन 1945 में समर्पण कर दिया था। इस जीत की दूसरी वर्षगांठ 15 अगस्त को पड़ रही थी जिसकी वजह से इसी दिन भारत को आजाद करने का फैसला हुआ।
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