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12 दिग्गज, विधानसभा चुनावों में जिन पर होंगी निगाहें

Thu, 17 Mar 2016 06:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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assembly election
गर्मियों में चुनावी सरगर्मी फिर चरम पर होगी। अप्रैल में 5 राज्यों में चुनाव होना है, जिनमें प‌श्चिम बंगाल, असम, त‌मिलनाडु और केरल महत्वपूर्ण हैं। केंद्र की राजनीति में काबिज भाजपा की निगाह इन राज्यों पर हैं। आइए जानते हैं किस राज्य में भाजपा की क्या हैसियत है और कौन हैं इन राज्यों में बड़े खिलाड़ी।
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स्टिंग के बाद बैकफुट पर हैं ममता

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ममता - फोटो : pti
'पोरिबर्तन' की लहर पर सवार ममता बनर्जी ने‌ पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय राजन‌ी‌ति की सबसे करिश्माई जीत हासिल की थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल में 'अपराजेय' मान लिए गए वाम मोर्च को उखाड़ फेंका। हालांकि इस बार चुनाव के ऐन पहले आए ‌स्टिंग से वो बैकफुट पर हैं। पार्टी के  कई आला नेता कैमरे पर पैसे लेते पकडे़ गए हैं। आगामी चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का सबसे क‌ठिन चुनाव है।
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सीपीएम की कमान सूर्यकांत के हाथों में

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सूर्य कांत मिश्रा
34 साल तक पश्चिम बंगाल में शासन कर चुकी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की कमान सूर्यकांत मिश्रा के हाथों में है। बुद्घदेव भट्टाचार्य और ‌बिमान बोस के नेतृत्व में पिछला चुनाव लड़ चुकी सीपीएम ने पिछले वर्ष ही उन्हें राज्य इकाई का सचिव नियुक्त किया था। मिश्रा 2011 से विधानसभा में नेता विपक्ष हैं और उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है। पेशे से डॉक्टर मिश्रा को 2011 सीपीएम की पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया था। 

बीजेपी की सेंधमारी से परेशान गोगोई

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तरूण गोगोई
तरूण गोगोई 79 वर्ष के हो चुके हैं, हालांकि असम में बीजेपी की सेंधमारी से परेशान कांग्रेस उन्हें ही अपना खेवनहार मानती है। वे लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनावों उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था, जबकि राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस केवल 3 ही जीत पाई थी। 2009 के चुनावों में कांग्रेस ने असम में 9 लोकसभा सीटें जीती थीं। 
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'दलबदलू' सोनोवाल के भरोसे भाजपा

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सर्बानंद सोनोवाल
सर्बानंद सोनावाल 'दलबदलू' हैं, हालांकि मोदी के चेहरे पर दिल्ली और बिहार में मुंह की खा चुकी भाजपा ने उन्हें असम में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया है। 2011 में वे असम गण परिषद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।‌ पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने राज्य में भाजपा को 7 सीटें दिलाई ‌थीं, जिसके बाद केंद्र में उन्हें बतौर पुरस्कार मंत्री पद दिया गया। पार्टी ने उन्हें इसी जनवरी में मंत्री पद से हटाकर असम में चुनावी तैयारियों के लिए भेज दिया। वे राज्य में पार्टी के अध्यक्ष भी हैं।
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गोगोई का दाहिना हाथ, अब भाजपा के साथ

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हिमंत बिश्व शर्मा
असम की राजनीति में भाजपा का दूसरा सबसे बड़ा चेहरा माने जा रहे है हिमंत बिश्व शर्मा भी 'दलबदलू' ही हैं। वे तरूण गोगोई के सबसे भरोसेमंद मंत्री और दाहिने हाथ माने जाते थे, हालांकि फिलहाल वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ चुके हैं। हिमंत तरूण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई के उभार के बाद से ही कांग्रेस में कसमसा रहे थे। उनका कहना है कि वे सर्बानंद सोनोवाल को पांचवी कक्षा से जानते हैं।
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राजनीतिक संजीवनी की खोज में महंता

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प्रफुल्ल कुमार महंता
असम की राजनीति में कांग्रेस के बाद असम गण परिषद का ही वर्चस्व था, हालांकि बीजेपी के उभार के बाद से पार्टी उसकी बगलगीर बनकर रह गई है। फिलहाल दोनों ही दलों में गठबंधन है। पार्टी ने लोकसभा में एक भी सीट नहीं जीती थी। महंता ने भी 2006 में अलग पार्टी बना ली थी, हालांकि 2006 में  वे दोबार अगप में लौट आए। 

भारतीय राजनीति के चमत्कारिक उभारों में से एक बदरूद्दीन अजमल

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बदरूद्दीन अजमल
बदरूद्दीन अजमल बीते दशक की भारतीय राजनीति के चमत्कारिक उभारों में से एक हैं। उन्होंने 2006 में अपनी पार्टी ऑल इं‌डिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन किया था। वो एक अरबपति उद्योगपति हैं। अजमल के गृह उपमंडल होजाई को 2004 में 100 फीसदी साक्षर घोषित किया गया था। होजाई  ने ये उपलब्धि में अजमल के एनजीओ मर्कजुल माआरिफ के कारण हासिल की थी। इसी एनजीओ ने वहां साक्षारता की मुहिम चलाई। पिछले लोकसभा चुनाव में अजमल की पार्टी ने तीन सीटें जीती ‌थीं। आगामी व‌िधानसभा चुनावों में AIUDF को दूसरे नंबर की पार्टी माना जा रहा है।

मुश्किलों से घिरे हैं ओमेन चांडी

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ओमेन चांडी
ओमेन चांडी दो बार केरल के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।  1970 में उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। उसके बाद से अब तक 10 बार चुनाव लड़ चुके हैं और विजयी रहे हैं। फिलहाल भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण वो मुश्किलों से घिरे हैं, हालांकि कांग्रेस ने उन्हीं के नेतृत्व में भरोसा जताया है। 

विजयन को अच्युतानंदन से चुनौती

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पिनारायी विजयन
सीपीएम ने केरल में अच्युतानंदन और पिनारायी विजयन दोनों को ही चुनावी मैदान में उतारा है। दोनों पार्टी में एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं, हालांकि अच्युतानंदन की उम्र में 92 वर्ष है और यही एक बात उनके पक्ष में नहीं जाती है। सीपीएम नीत एलडीएफ आगामी चुनावों में सत्ता में आती है तो 71 साल के पिनारायी की सितारे बुलंदी पर पहुंच सकत हैं। 

बहुत ही नाटकीय रहा जयललिता का मौजूदा कार्यकाल

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जयललिता
तमिलनाडु की राजनीति में एम करुणानिधि की तुलना में जयललिता अगर अधिक प्रभावशाली दिख रही हैं तो उसका बड़ा कारण उनकी उम्र हैं। वह फिलहाल 68 साल की हैं, जबकि करुणानिधि 91 साल के हो चुके हैं। जयललिता का मौजूदा कार्यकाल बहुत ही नाटकीय रहा है। उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में इस्तीफा भी देना पड़ा और कर्नाटक हाईकोर्ट से बरी होने के बाद वो दोबारा सत्ता में लौटी।

अपने दम पर पहली बार मैदान में विजयकांत

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विजयकांत
विजयकांत ने 2011 का चुनाव एआईएडीएम के साथ गठबंधन कर लड़ा था। हालांकि बाद में अलग हो गए। लोकसभा चुनाव उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन कर लड़ा। भाजपा ने एक सीट जीती लेकिन विजय कांत के हाथ कुछ नहीं आया। आगामी विधानसभा चुनाव में विजयकांत ने अकेले लड़ने का फैसला किया है। 
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करुणानिधि का उत्तराधिकारी बनने की कोशिश में स्टालिन

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स्टालिन
करूणा‌निधि का करिश्मा जैसे-जैसे खत्म हो रहा है, डीएमके उम्‍मीद खत्म हो रही है। करूणानिधि के उत्तराधिकारी और डीएमके के नए नेता स्टालिन को जयललिता का विकल्प बनाने की कई कोशिशें हुई हैं। मेकओवर एजेंस‌ियों ने स्टालिन का ट्विटर एकाउंट बनाया, एप बनाया, उन्हें सभी विधानसभाओं में टूर भी कराया गया। देखना ये है कि आगामी विधानसभा चुनावों में ये मेकओवर क्या रंग लाता है। 
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