संज्ञेय अपराध और असंज्ञेय अपराध
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अपराध दो प्रकार के होते हैं -
संज्ञेय अपराध (Cognisable offence) और असंज्ञेय अपराध (Non Cognisable offence)
संज्ञेय अपराध (Cognisable offence)- क्रिमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) में संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध की परिभाषा दी गई है।
- क्रिमिनल प्रोसिजर कोड की धारा 2 (सी) और 2 (एल) में विस्तृत रूप से दी गई है।
- इस अधिनियम की धारा 2 (सी) के अनुसार, संज्ञेय अपराध वह है जिसमें पुलिस किसी व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।
- पुलिस के पास संज्ञेय अपराधों में बिना वारंट गिरफ्तार करने के अधिकार होता है।
संज्ञेय अपराध के अंतर्गत आते हैं-
क्रिमिनल प्रोसिजर कोड (CRPC 1973) के शेड्यूल 1 के अनुसार, संज्ञेय अपराध के अंतर्गत,
मुख्यतः अपराध इस प्रकार हैं -
- दंगा,
- अपहरण,
- चोरी, डकैती, लूट,
- बलात्कार,
- हत्या
असंज्ञेय अपराध क्या है-
क्रिमिनल प्रोसिजर कोड (CRPC 1973) की धारा 2 (एल) के अनुसार ऐसे अपराध जिनमें पुलिस को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार प्राप्त नहीं है, वे सभी अपराध असंज्ञेय अपराध कहलाते हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 298 के अनुसार पुलिस बिना वारंट के असंज्ञेय अपराध में गिरफ्तार नहीं कर सकती है।
असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में ये सब आता हैं-
- जालसाजी, धोखाधड़ी
- झूठे सबूत देना
- मानहानि
'संज्ञेय अपराध पर पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकती है और असंज्ञेय अपराध पर कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस कार्रवाई करती है। गैर जमानती मामलों में पुलिस अपराधी को 24 घंटे तक हिरासत में रख सकती है। '
हरि नारायण मिश्र, आईपीएस अधिकारी
भारत में अपराध और आपराधिक परीक्षण से निपटने वाले कानून निम्नलिखित हैं-
- भारतीय दंड संहिता, 1860
- आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
हर अपराध के पीछे कुछ मुख्य कारण होते हैं जिसमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
- आर्थिक कारण
- मनोवैज्ञानिक कारण
- शारीरिक विकार
- मनोविज्ञानिक कारण
- रंजिश
Bibliography and reference-
*Expert Reactions.
*LAW COMMISSION OF INDIA: CONSULTATION PAPER ON LAW RELATING TO ARREST
http://lawcommissionofindia.nic.in/reports/177rptp2.pdf
*Criminal Procedure - R.V. Kelkar's Criminal Procedure
by R.V. Kelkar's
*Lectures on Criminal Procedure [Cr. P.C]
by K. N. Chandrasekharan R. V. Kelka