दसवीं कक्षा तक पढ़ा दीपक पहल 13 साल की आयु में ही मुक्केबाजी से जुड़ गया था। उसने महज 16 साल की उम्र में ही जूनियर बॉक्सिंग में राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीता था।
अपराध जगत से जुड़े कुख्यात दीपक बॉक्सर के कारण हरियाणा के सोनीपत का नाम फिर से सुर्खियों में है। रोहिणी कोर्ट में कुख्यात गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ गोगी की हत्या के बाद गोगी गैंग की कमान संभाल रहे दीपक पहल उर्फ दीपक बॉक्सर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अमेरिका के मैक्सिको से गिरफ्तार किया है। अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) की मदद से कुख्यात को दबोचा गया है।
जूनियर बॉक्सिंग में प्रदेश स्तर पर सोना जीत चुके दीपक बॉक्सर ने वर्ष 2016 में अपराध की दुनिया में कदम रखा और आज वह जुर्म की दुनिया का बड़ा नाम बन चुका था। सोनीपत के गांव गुमड़ में वर्ष 1996 में जन्मे दीपक पहल उर्फ दीपक बॉक्सर का परिवार फिलहाल गन्नौर के गांधी नगर में रहता है। उसके परिवार में मां राजबाला, भाई प्रवीन व नवीन हैं। पिता सुरेश पहल का करीब छह माह पहले निधन हो चुका है।
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दीपक पहल 13 साल की आयु में ही मुक्केबाजी से जुड़ गया था।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दसवीं कक्षा तक पढ़ा दीपक पहल 13 साल की आयु में ही मुक्केबाजी से जुड़ गया था। उसने महज 16 साल की उम्र में ही जूनियर बॉक्सिंग में राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीता था। उसके बाद वह कई मुकाबले हार गया। इसी बीच उसकी पहचान पांची के मोहित से हुई। मोहित के माध्यम से वह जितेंद्र उर्फ गोगी गैंग से जुड़ गया।
आरोप है कि उसने पहला बड़ा अपराध 30 जुलाई, 2016 को झज्जर के बहादुरगढ़ में किया था। जहां उसने कुख्यात जितेंद्र उर्फ गोगी को पुलिस कस्टडी से छुड़ाया था। उसी दिन उस पर दिल्ली के बवाना एरिया में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी पर वर्ष 2018 में मकोका लग चुका है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
उस पर हरियाणा के करनाल के सदर थाना में 27 दिसंबर, 2019 को हत्या की कोशिश का भी मुकदमा दर्ज हुआ था। इतना ही नहीं 23 अगस्त, 2022 को दिल्ली के बुराड़ी में बिल्डर अमित गुप्ता की हत्या के बाद से दिल्ली पुलिस उसे तलाश रही थी। दीपक ने सोशल मीडिया पर अमित गुप्ता की हत्या की जिम्मेदारी ली थी।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI
दीपक ने फेसबुक पर लिखा था कि उसने अपने प्रतिद्वंद्वी टिल्लू गैंग के साथ निकटता के कारण उसकी हत्या हुई। साथ ही बताया गया था कि दीपक को शक था कि अमित गुप्ता ने उसके साथी फज्जा के बारे में पुलिस को सूचना दी थी। जिसके बाद फज्जा मुठभेड़ में मारा गया था। वह बरेली से फर्जी पासपोर्ट बनवा कर कोलकाता से मैक्सिको भाग गया था। बताया जा रहा है कि एक दर्जन से अधिक मामलों में नामजद दीपक बॉक्सर पर दिल्ली पुलिस ने दो लाख, हरियाणा पुलिस ने दो लाख और यूपी पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम रखा था।
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जितेंद्र गोगी की फाइल फोटो और मृत पड़ा गोगी
- फोटो : अमर उजाला
गोगी गैंग का सरगना बन सुर्खियों में आया
दिल्ली का कुख्यात गोगी गैंग का नाम सोनीपत से जोड़ने वाला दीपक बॉक्सर ही है। जितेंद्र उर्फ गोगी की हत्या के बाद सोनीपत के गुमड़ के दीपक बॉक्सर ने उसके गैंग की कमान संभाल ली थी। रोहिणी कोर्ट में गोगी की हत्या हुई थी। जिसमें सोनीपत के गांव कामी के जयदीप पर आरोप लगा था। हालांकि जयदीप को वारदात के बाद पुलिस ने कोर्ट परिसर में ही मार गिराया था।
लॉरेंस और गोल्डी बराड़ से हाथ मिला चुका दीपक, विदेश से चलाना चाहता था गैंग
बताया जा रहा है कि दीपक बॉक्सर ने कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथी गोल्डी बराड़ से हाथ मिला लिया था। वह 19 दिसंबर, 2022 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से रवि आंतिल के नाम से जारी पासपोर्ट पर 29 जनवरी को विदेश भाग गया था। बताया जा रहा है कि वह गोल्डी बराड़ की मदद से विदेश से अपने गैंग को चलाने की फिराक में था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
अपराध की दुनिया में उछलता रहा है सोनीपत का नाम
दिल्ली एनसीआर में शामिल सोनीपत जिले में कभी राजधानी में बैठे गैंगस्टरों की हुकूमत चलती थी। सैकड़ों युवा उनके इशारे पर जान देने के लिए तैयार रहते थे। नब्बे के दशक में जब कृष्ण पहलवान और बलराज के बीच गैंगवार शुरू हुई तो सोनीपत के युवा उनसे जुड़ गए थे। दिल्ली के गैंगस्टर से प्रेरित होकर सोनीपत के युवा अपनी खुद की गैंग खड़ी करने लगे।
हालांकि ऊपरी तौर पर दिल्ली के गैंगस्टर का ही हाथ उनके सिर पर रहा। संदीप चिटाना ने तो दिल्ली में जाकर नीरज बवाना गैंग को चुनौती दी थी। उस वक्त संदीप चिटाना दिल्ली के नीटू दाबोदिया गैंग का शार्प शूटर हुआ करता था। हालांकि एक एनकाउंटर में मारे जाने के बाद गैंग के सदस्य विक्की चिटाना, विकास दूधिया हरियाणा में गैंग को बढ़ाने लगे। तीन दशक बाद भी यही ट्रेंड जारी है। जिले के युवा छोटे-मोटे झगड़े या जमीन के विवाद में गैंग की शरण में पहुंच रहे हैं। फिर गैंग के आका युवाओं को अपने मनमुताबिक काम करवा रहे हैं।
पंजाब के गैंग से हो रहा गठजोड़, विदेशों तक जुड़ रहे तार
एक दशक से जिले के युवाओं का झुकाव पंजाब की गैंग की तरफ होने लगा है। इसी का परिणाम है कि जिले में काला जठेड़ी, राजू बसौदी, अक्षय पलड़ा जैसे अपराधी पैदा हो गए। अक्षय पलड़ा तो परिवार के साथ हुए झगड़े के बाद 15 साल की उम्र में ही अपराध जगत में उतर गया। गांव के ही व्यक्ति की हत्या के बाद बाल सुधार गृह भेजा गया। सोनीपत में अपराध का ट्रेंड बदलने लगा है। पुलिस अधिकारी यहां तक अंदेशा जता रहे हैं कि पंजाब की गैंग के साथ जुड़कर युवा विदेशी ताकतों की हाथ की कठपुतली तक बन सकते हैं। पंजाब के कई गैंग का पाकिस्तानी कनेक्शन होना अधिकारियों की इस चिंता को वाजिब भी ठहराता है। सोनीपत में पिछले दिनों जुआं गांव से तीन हैंडलर गिरफ्तार हुए थे। वह आतंकवादियों के इशारे पर अपराध कर रहे थे।