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Haryana: कांग्रेस ने नौ और प्रत्याशी उतारे, जानिए सबका प्रोफाइल, क्यों मिला टिकट

Mon, 09 Sep 2024 01:10 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा

सार

बादशाहपुर से यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव वर्धन यादव और गुड़गांव सीट से पंजाबी नेता और हाल ही में कांग्रेस में आए मोहित ग्रोवर को टिकट लेने में कामयाब रहे हैं। 
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मोहित ग्रोवर व वर्धन यादव - फोटो : संवाद
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के लिए कांग्रेस ने रविवार देर रात तीसरी सूची जारी कर दी। इसमें नौ उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। उचाना कलां से पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे व पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह को टिकट दी गई है। बादशाहपुर से यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव वर्धन यादव और गुड़गांव सीट से पंजाबी नेता और हाल ही में कांग्रेस में आए मोहित ग्रोवर को टिकट लेने में कामयाब रहे हैं। 
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परमवीर सिंह। - फोटो : संवाद
टोहाना से परमवीर सिंह
उम्र = 64 वर्ष
शिक्षा = बीए एलएलबी
राजनीतिक सफर 
साल 2005 में परमवीर सिंह पहली बार चुनाव मैदान में उतरे और जीते। इसके बाद हुड्डा सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया।  वह 2009 में भी जीतकर हुड्डा सरकार में कृषि मंत्री रहे। इसके बाद 2014 और 2019 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

टिकट मिलने का कारण ः टोहाना विधानसभा सीट परमवीर का पैतृक सीट है। इस सीट पर उनके पिता सरदार हरपाल सिंह पांच बार और वे दो बार जीत कर चुके हैं। लंबा राजनीतिक अनुभव। इस सीट पर उनका व्यक्ति वोट। प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से करीबी।
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बलराम दांगी - फोटो : संवाद
महम विधानसभा क्षेत्र
नाम - प्रत्याशी बलराम दांगी

पार्टी - कांग्रेस
बलराम दांगी (महम)
उम्र- 47 वर्ष
शिक्षा- स्नातक
1995 से कांग्रेस से जुड़े बलराम दांगी पहली बार कांग्रेस से विधानसभा चुनाव का टिकट मिला। 2002 में युवा कांग्रेस के महासचिव रहे। 2005 से 2009 तक जिला परिषद के वाइस चेयरमैन रहे। वर्तमान में हरियाणा कांग्रेस कमेटी के डेलीगेट सदस्य हैं। उनके पिता आनंद सिंह दांगी चार बार हलके से विधायक रह चुके हैं। अबकी बार उन्होंने बेटे के लिए अपनी दावेदारी छोड़ दी है।

टिकट मिलने का कारण : पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी के बेटे व कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता।

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कुलदीप शर्मा। - फोटो : संवाद
गन्नौर विधानसभा
नाम : कुलदीप शर्मा।
पार्टी - कांग्रेस
पिता : चिरंजीलाल शर्मा
जन्मतिथि : 3 अप्रैल 1957
शिक्षा : बीए, एलएलबी
गृह क्षेत्र : गांव आहुलाना, गन्नौर। हाल समय में करनाल में रह रहे हैं।

व्यवसाय : अधिवक्ता, चंडीगढ़

पूर्व विधायक कुलदीप शर्मा मूलरूप से गन्नौर के गांव आहुलाना से संबंध रखते हैं। इनका बचपन सोनीपत शहर में गुजरा। पिता चिरंजीलाल शर्मा हरियाणा के कद्दावर नेता रहे हैं। चिरंजीलाल 1962 में सोनीपत के विधायक रह चुके हैं। 1972 में हरियाणा मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे। इसके बाद 1980 से लगातार चार बार करनाल के सांसद रहे। विधायक कुलदीप शर्मा ने बीए, एलएलबी कर लंबे समय तक वकालत की। कुलदीप करनाल में कांग्रेस के शहरी अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष व प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके बाद वह 2010 में गन्नौर के विधायक चुने गए। उन्हें हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष पद पर आसीन किया गया। उनके विकास कार्यों को देखते हुए 2015 में उन्हें दोबारा गन्नौर से विधायक चुना गया।

टिकट मिलने का कारण : कुलदीप शर्मा पहले विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के काफी नजदीकी माने जाते हैं।
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मंजू चौधरी - फोटो : संवाद
उचाना कलां विधानसभा
नाम : बृजेंद्र सिंह।
पार्टी - कांग्रेस
पिता : बीरेंद्र सिंह
जन्मतिथि : 13 मई 1972
शिक्षा : आईएएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति)
गृह क्षेत्र : डूमरखां कलां, उचाना कलां
व्यवसाय : समाजसेवा

बृजेंद्र सिंह मूलरूप से उचाना कलां तहसील में डूमरखां कलां गांव के रहने वाले हैं। वर्तमान में परिवार गांव और दिल्ली दोनों जगह रहता है। इनके पिता चाैधरी बीरेंद्र सिंह उचाना कलां विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा एक बार वे हिसार लोकसभा क्षेत्र से भी सांसद चुने जा चुके हैं। इनकी माता प्रेमलता 2014 में उचाना कलां विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीती थीं। 2019 में दुष्यंत चाैटाला से वे हार गई थीं। बृजेंद्र सिंह 2019 में भाजपा की टिकट पर हिसार लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हैं। राजनीति में आने से पहले वे आईएएस थे। कई जिलों के डीसी सहित चंडीगढ़ में प्रशासक भी रह चुके हैं।

टिकट मिलने का कारण : हाल ही में भाजपा को छोड़कर पूरा परिवार कांग्रेस में शामिल हो गया था। ये हिसार लोकसभा सीट से टिकट के दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। अब पार्टी में विधानसभा सीट पर टिकट दिया।
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मंजू चौधरी - फोटो : संवाद
विधानसभा नांगल चौधरी
नाम : मंजू चौधरी
पार्टी : कांग्रेस
पति : मूलाराम चाैधरी
जन्मतिथि : 4 नवंबर 1970
शिक्षा : स्नातक
गृह क्षेत्र : नांगल चाैधरी

मंजू चौधरी मूल रूप से नांगल चाैधरी की रहने वाली हैं। इससे पहले इंडियन नेशनल लोकदल से वर्ष 2014 में इसी सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं, जिसमें दूसरे नंबर पर रही थीं। मंजू चौधरी के पति मूलाराम चौधरी भी वर्ष 2000 में नारनौल विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2009 में परिसीमन के बाद नांगल चौधरी अलग से विधानसभा बनाई गई। वर्ष 2019 में जजपा पार्टी से मूलाराम चौधरी ने चुनाव लड़ा था और इस चुनाव में वह दूसरे नंबर पर रहे थे। वही मंजू चौधरी के ससुर फूसाराम भी नारनौल विधानसभा से विधायक रह चुके हैं।

टिकट मिलने का कारण : ससुर फूसाराम की राजनीतिक विरासत संभाल रही हैं। पति मूलाराम चाैधरी भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं।
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अशोक अरोड़ा - फोटो : संवाद
अशोक अरोड़ा-थानेसर
60 वर्षीय, 10वीं पास
अब तक चार बार विधायक रह चुके हैं। इनेलो सरकार में विधानसभा स्पीकर व परिवहन मंत्री भी रहे। वर्ष 2019 के चुनाव में 842 वोटों से हार गए थे। वर्ष 2019 में इनेलो छोड़ी और कांग्रेस की टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा। 842 मतों से हार गए थे।

टिकट मिलने का कारण- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के बेहद करीबी। लंबा राजनीतिक अनुभव, बेदाग छवि और क्षेत्र में मजबूत पकड़।
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अनिरुद्ध चौधरी - फोटो : संवाद
ये है अनिरुद्ध चौधरी का मजबूत और कमजोर पक्ष
तोशाम से अनिरुद्ध चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के इकलौते पोते होने के साथ-साथ पूर्व विधायक रणबीर महेंद्रा के बेटे हैं। उनका मजबूत पक्ष यह है कि बंसीलाल परिवार का परंपरागत वोट उनके साथ आ सकता है। इलाके के जाट मतदाता भी अनिरुद्ध के पक्ष में मतदान कर सकते हैं, क्योंकि वे बीजेपी से नाराज हैं। जबकि कमजोर पक्ष यह भी है कि उनका ये पहला विधानसभा चुनाव है। इससे पहले वे बाढ़डा में सक्रिय रहे हैं। अब तोशाम में चुनाव के दौरान उनके लिए मतदाताओं को साधना भी बड़ी चुनौती है।
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