हरियाणा के जींद में जिस गांव में किसान नेता राकेश टिकैत महापंचायत कर रहे हैं, वह कंडेला देश में किसान आंदोलन का प्रतीक रहा है। 19 साल पहले इस गांव में हुए आंदोलन में आठ किसानों की जान गई थी। 19 साल बाद फिर से कंडेला की धरती से भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत देश के बड़े किसान आंदोलन को नई संजीवनी देने पहुंच रहे हैं। गांव में होने वाली महापंचायत पर सभी की नजरें लगी हैं।
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रामफल कंडेला।
- फोटो : फाइल फोटो
2002 में हरियाणा में किसानों ने बिजली बिल माफ करने के लिए आंदोलन किया था। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला बताते हैं कि ओमप्रकाश चौटाला 2000 में मुख्यमंत्री बने। वे बिजली के बिल माफी का नारा देकर सत्ता में आए, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार लोगों पर बिजली के बिल भरने के लिए दबाव बनाने लगी। इसके चलते आंदोलन शुरू किया। लोगों ने फैसला लिया कि कोई भी बिल नहीं भरेगा, यदि बिजली अधिकारी कनेक्शन काटने आते हैं तो उनका विरोध होगा।
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कंडेला में महापंचायत की तैयारियां पूरी
- फोटो : अमर उजाला
कंडेला गांव में आंदोलन का मंच तैयार हुआ। इस पर सरकार ने कंडेला सहित पांच गांवों की मुख्य लाइन ही पावर हाउस से कटवा दी। लोगों ने रोड जाम कर दिया। इसके बाद कंडेला में फायरिंग हुई, लेकिन इसमें कोई जान-माल की हानि नहीं हुई। इसके बाद नगूरां व गुलकनी गांव में फायरिंग हुई। इसमें आठ किसानों की मौत हो गई। इसके बाद आंदोलन भड़क गया। किसानों ने कई अधिकारियों को बंधक बनाया था। इसके चलते दो महीने तक कंडेला गांव में जींद-चंडीगढ़ मार्ग बंद रहा। इसके बाद से ही कंडेला गांव को आंदोलन के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा।
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पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला
- फोटो : अमर उजाला
2000 के विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला जींद जिला के ही नरवाना विधानसभा से विधायक बनकर मुख्यमंत्री बने। ऐसे में उनका जींद में काफी आना-जाना रहता था। कंडेला गांव जींद-चंडीगढ़ मार्ग पर पड़ता है, लेकिन कंडेला कांड के बाद मुख्यमंत्री रहते हुए भी चौटाला कभी सीधे कंडेला के रास्ते नहीं निकले।
सांड ने दिया किसानों का साथ
19 साल पहले हुए इस आंदोलन में एक सांड ने किसानों का साथ दिया। दरअसल यह सांड पुलिस को देख कर इस कदर बिगड़ता था कि पुलिस को भाग कर ही जान बचानी पड़ती थी। यहां तक कि घोड़ा पुलिस को भी इस सांड ने खदेड़ दिया था। अब सांड की याद में मंदिर बनाया गया है।