हरियाणा के झज्जर के खेड़ी खुम्मार गांव निवासी निक्की के शव का गांव में दिनभर इंतजार किया जाता रहा। गांव की गलियां दिनभर सूनी रहीं। बुधवार शाम को 5:48 बजे एंबुलेंस से शव लेकर पुलिस गांव पहुंची तो काफी संख्या में लोग वहां पर पहुंच गए। मात्र सात मिनट में शव को घर पर रखा गया और मां ने बेटी के अंतिम दर्शन किए।
इसके बाद शवयात्रा श्मशान पहुंची। प्रशासन की ओर से पहले से ही अंतिम संस्कार की सभी तैयारी पूरी कर ली गई थी। मात्र 22 मिनट में गमगीन माहौल के बीच शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। छोटे भाई ने बहन को मुखाग्नि दी।
निक्की यादव के परिवार के लोग ही नहीं बल्कि पूरे गांव के लोगों में वारदात को लेकर गुस्सा था। परिवार के लोगों का मीडिया के प्रति भी आक्रोश था। परिवार के लोगों में कहा कि लिव इन रिलेशन का मामला बनाकर दिखाया जा रहा है। फ्रेंडशिप का मामला हो सकता है। बेटी की हत्या बहला-फुसला कर की गई है।
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घर में मातम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता की देखभाल के लिए आते थे सुनील ग्रामीण सुनील के परिवार के बारे में जानकारी साझा नहीं कर रहे थे। सुनील का दिल्ली से गांव में आने का मुख्य कारण यह भी था कि उसके छोटे भाई ने कारगिल लड़ाई के दौरान अपने अंग गवा दिए थे। इस कारण वह अपने माता-पिता को संभालने में असमर्थ थे। सुनील के पिता रामकिशन को ऊंचा सुनाई देने लगा था और पैरों से चलने में भी समस्या हो रही थी, उन्होंने अपने बेटों को देखभाल के लिए गांव बुला लिया था।
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निक्की यादव के हत्यारों को मिले फांसी
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आरोपी साहिल गहलोत
- फोटो : अमर उजाला
गुलिया तीसा खाप ने दिल्ली के बहुचर्चित निक्की यादव हत्याकांड के आरोपी/आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलवाने की मांग उठाई है। खाप के प्रधान विनोद बादली ने दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोपियों को फांसी की सजा दिलवाने की मांग की है। विनोद बादली ने बुधवार को कहा कि निक्की यादव को न्याय दिलवाने में गुलिया खाप भी यादव समाज का पुरजोर सहयोग करेगी और उन्हें उम्मीद है कि हत्यारों को सजा मिलेगी।
किसी भी सूरत में आरोपियों का बचाव करना गलत है और गुलिया खाप आरोपी को सजा दिलवाने के लिए हर कदम उठाने के लिए तैयार है। विनोद गुलिया ने घटना को भयानक करार दिया है और कहा कि एक व्यक्ति ने अपनी साथ में रहने वाली पार्टनर का गला घोंट कर मार दिया और उसके शव को फ्रिज में रख दिया। जोकि एक बड़ा अपराध होने के साथ-साथ मानवता को भी चकनाचूर कर रहा है। ऐसी आरोपियों को समाज में रहने का अधिकार नहीं और न्यायपालिका की ओर से सजा मौत होनी चाहिए।
निक्की का कॅरियर संवारने के लिए दिल्ली चला गया था परिवार
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निक्की का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में प्रेमी की दरिंदगी की शिकार हुई निक्की न सिर्फ होनहार विद्यार्थी थी बल्कि परिवार की दुलारी भी थी। उसकी पढ़ने और जीवन में कुछ करने की ललक ही उसके परिवार को गांव से दिल्ली ले गई थी। निक्की के कॅरियर को संवारने के लिए पिता सुनील यादव परिवार के साथ दिल्ली के नजफगढ़ में बस गए थे। यह जानकारी अमर उजाला को निक्की के दादा रामकिशन ने बुधवार को दी। खेड़ी खुम्मार गांव स्थित पैतृक घर में मौजूद रामकिशन की आंखें दिल्ली से शव आने के इंतजार में पथरा सी गई थीं।
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हर चार दिन में दादा से होती थी निक्की की बात
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निक्की के दादा और निक्की की बहन।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दादा रामकिशन ने बताया कि निक्की और निधि से उनकी बात हर चार-पांच दिन में होती थी। दोनों बहनें 23 दिसंबर 2022 को साथ-साथ आई थीं। चार दिन गांव में साथ रही थीं। निक्की किसी परीक्षा के फार्म में हस्ताक्षर कराने आई थी। इसके बाद दोनों साथ चली गई थीं। वहीं ग्रामीण गांव में हर कोई निक्की को लेकर बातें करता रहा। ग्रामीण सुनील के परिवार के बारे में जानकारी साझा नहीं कर रहे थे। पूरे गांव में गम का माहौल था।
खेड़ी खुम्मार गांव की बेटी निक्की की हत्या के देर रात उसके दादा रामकिशन ने कहा कि मेरी लाडली को बिना मौत के मार दिया। मुकदमा फास्ट्रैक में रोज चलाया जाए। कानून निष्पक्ष रूप से काम करते हुए बेटी को न्याय दिलाए और हत्यारोपी साहिल को फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए। निक्की के मामले में पूरे गांव में आक्रोश है। परिवार के लोगों का कहना है कि निक्की भविष्य में प्रोफेसर बनना चाहती थी, लेकिन वह सपना अधूरा छोड़ गई है।
यादव सभा के प्रधान विरेंद्र दरोगा व एडवोकेट बलजीत सिंह ने बेटियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि बेटियां सुरक्षित रह सकें। गांव के प्रधान राजकुमार ने भी कहा कि हर ग्रामीण की यही मांग है कि आरोपी को जल्द फांसी की सजा मिले। वहीं हर व्यक्ति की जुबा पर यहीं चर्चा थी कि यह वारदात कैसे हो गई। जैसे ही परिवार के लोगों को मामले का पता चला तो वे सूचना मिलते ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। गांव के प्रमुख लोग व परिवार के सदस्य पोस्टमार्टम के बाद शव लेने के लिए दिल्ली पहुंच गए थे। गांव की गलियां सुनसान रहीं। वहीं गांव में महिलाएं मृतका की मां व अन्य परिजनों का ढांढ़स बधाती रहीं।