हरियाणा के झज्जर के बेरी क्षेत्र के मदाना गांव में पूरे दिन बस इसी वारदात की चर्चा थी। सुबह जैसे ही वारदात का पता गांव वालों को चला, पूरा गांव नरेश के घर की और दौड़ पड़ा।
भाई में दुनिया छोड़ रहा हूं। कुछ लोगों पर मेरे पैसे हैं। मेरे जाने के बाद उनसे रुपये ले लेना। अपनी पत्नी और दो बच्चों की हत्या करने के बाद फंदा लगाने से पहले खुद जान देने वाले नरेश ने अपने भाई से यह बात कही थी। भाई ने खूब समझाया भी लेकिन शायद ईश्वर को कुछ ओर ही मंजूर था।
हरियाणा के झज्जर के बेरी क्षेत्र के मदाना गांव में पूरे दिन बस इसी वारदात की चर्चा थी। सुबह जैसे ही वारदात का पता गांव वालों को चला, पूरा गांव नरेश के घर की और दौड़ पड़ा। घर के बाहर सैकड़ों ग्रामीण जमा थे। पुलिस अंदर जांच कर रही थी लिहाजा लोगों को अंदर नहीं जाने दिया गया। गांव के लोगों में इसी वारदात की चर्चा थी।
नरेश ने रविवार को ही अपने भाई के घर रोहतक जाकर आत्महत्या की बात कही थी। कुछ लोगों पर अपने रुपयों का जिक्र करते हुए उन्हें लेने को कहा था। गांव वालों में इसी बात की चर्चा थी कि जब नरेश को किसी चीज की कमी नहीं थी। उसी के रुपये दूसरों पर चाहिए थे तो फिर आखिर उसने ये कदम क्यों उठाया।
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मौके पर मौजूद जांच अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
आखिर क्या वजह थी कि उसने अपनी पत्नी और दो बच्चों की जान ले ली। अपने लाड़ले बेटे और बेटी का वह हत्यारा बन बैठा। दिन भर गांव में इसी बात की चर्चा थी। लोग इस वारदात के पीछे की वजह जानने की कोशिश कर रहे थे। लोगों में ये भी चर्चा रही कि नरेश एक दिन पहले ही अपनी बेटी को नवोदय विद्यालय से लाया था, तो क्या उसने पहले ही इस घटना को अंजाम देने की सोच रखी थी या बाद में कुछ हुआ।
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गांव मदाना में मौके पर साक्ष्य जुटाती हुई एसएफएल की टीम ।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस घटना के बाद हर किसी का कलेजा भरा जा रहा था। इस हृदयविदारक घटना के पीछे क्या कारण रहे किसी को भी समझ नहीं आ रहा था। मौके पर पहुंचे परिवार और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। गांव की महिलाएं व गणमान्य लोग परिवार का ढाढ़स बंध रहे थे। शवों को जब पोस्टमार्टम के लिए कैंटर में रखा जा रहा था तो परिवार की महिलाएं मृतकों का चेहरा देखने के लिए विलाप करने लगी तो गांव की महिलाओं ने उन्हें संभाला। हरियाणा पुलिस में रोहतक में कार्यरत नरेश के बड़े भाई रमेश बताया कि नरेश रात को करीब दस बजे उसके घर पहुंचा था।
उससे पहले करीब सवा नौ बजे भाई को फोन कर बताया कि वह रोहतक आ रहा है। कंपनी के काम से वह दिल्ली गया था लेकिन उसने असल बात नहीं बताई। रमेश को उसने कहा कि वह मानसिक रूप से परेशान है वह सुसाइड करेगा। रात को करीब एक बजे तक परिवार के लोग व फोन पर रिश्तेदारों ने भी समझाया लेकिन उसकी समझा में नहीं आया।
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झज्जर
- फोटो : Self
आखिर बच्चों का क्या कसूर
गांव चर्चा का विषय यह भी रहा कि आखिर बच्चों का क्या कसूर था कि उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया गया। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी कारणों का पता नहीं चल पा रहा है। नरेश कुमार शनिवार को अपनी बेटी को नवोदय विद्यालय से घर लाया था और रविवार को वह वारदात को अंजाम देकर भाई के पास रोहतक में पहुंच गया। अनुष्का व उसकी मां के सिर पर चोट के व नमन के गले पर रस्सी के निशान मिल हैं और शवों को देख कर आंशका जताई जा रही है कि उनकी हत्या रविवार को की गई है।
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विलाप करते परिजन।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पढ़ने में होशियार थे दोनों बच्चे
परिवार के लोगों ने बताया कि अनुष्का व नमन दोनों पढ़ाई में अच्छे थे। अनुष्का छठी कक्षा से नवोदय विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही थी। अब उसने दसवीं कक्षा की परीक्षा दी थी, जबकि नमन दुजाना गांव के ब्रिगेडियर रणसिंह पब्लिक स्कूल में नौवीं कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रहा था। एक साथ चारा लोगों की मौत के बाद गांव में चूल्हे तक नहीं जल। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में परिवार पूरी अच्छी तरह से रहता था। किसी भी व्यक्ति या पड़ोसी के कभी कहा सुनी नहीं हुई। उसके बाद भी इतना बड़ा कदम क्यों उठाया समझ से परे है।
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जांच करती पुलिस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
दोपहर बाद गांव में गमगीन माहौल के बीच शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। नरेश का सबसे बड़ा भाई सुरेश भी गुवाहटी में काम कर रहा है। उसका परिवार गुरुग्राम में रहता है, जबकि दोनों बहनेें भी शादी शुदा हैं। नरेश की मां भी उसके पास रहती थी, लेकिन कुछ दिन से वह रमेश के पास रोहतक गई थी।
सरपंच प्रतिनिधि को टाल गया नरेश
गांव में सरपंच प्रतिनिधि को रमेश ने फोन कर अवगत कराया कि नरेश कोई गलत कदम न उठा ले उसे देखना। जब सरपंच प्रतिनिधि उसके पास गया तो नरेश गली में आता दिखाई दिया। उसने सरपंच प्रतिनिधि को बातों-बातों में टाल दिया और घर के अंदर जाकर दरवाजा बंद कर लिया। उसके बाद उसने बांस की सीढ़ी लगा कर छत से लगे हुक से फंदा लगा लिया। सुबह उसके भाई व भाभी फोन गांव पहुंचे और फोन किया तो किसी ने भी फोन नहीं उठया। रमेश ने मकान के पीछे से दीवार फंद कर घर के अंदर जाकर आवाज लगाई तो दरवाजा नहीं खुला। रमेश ने दरवाजा तोड़कर देखा तो नरेश का शव फंदे पर लटक रहा था।
रोहद प्लाईवुड की कंपनी में कराता था काम
बताया जा रहा है कि नरेश झज्जर के रोहद स्थित एक प्लाईवुड फैक्ट्री में काम करता था। गांव में उनके तीनों भाईयों की छह एकड़ भूमि में खेती करता था। रमेश बताया कि नरेश को उसने करीब ढाई माह पूर्व ट्रैक्टर भी दिलाया था। नरेश ने उसके भाई को बताया था कि वह अब परिवार की अन्य भूमि में भी खेती करेगा अपने खेतों को भी बटाई पर नहीं देगा। अब खुद खेती करेगा।