फसलों की सिंचाई के लिए पानी अति आवश्यक है, लेकिन अत्यधिक दोहन के चलते सिंचाई के अलावा अब पेयजल पर भी संकट गहरा रहा है। जल प्रबंधन न होने से करीब 70 प्रतिशत सिंचाई जल व्यर्थ बह रहा है। यह गंभीर विषय है। पानी का उचित प्रबंधन और संरक्षण करके ही आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखा जा सकता है। यह कहना है हरियाणा के हिसार में स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज का।
वे मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेला (रबी) के उद्घाटन अवसर पर किसानों को संबोधित कर रहे थे। कुलपति ने कहा कि बढ़ती खपत और गेहूं धान फसल-चक्र वाले क्षेत्रों में भूजल के अति दोहन के कारण भी जल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। कृषि मेले में करीब 10 हजार किसान पहुंचे थे।
टपका और फव्वारा विधि अपनाएं किसान : जल संरक्षण को समय की मांग बताते हुए उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, वाटरशेड विकास, वर्षा जल संचय, सिंचाई की टपका व फव्वारा विधि जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ धान की कम अवधि में पकने वाली किस्में व बासमती किस्में उगाकर पानी का उचित प्रबंधन करने की आवश्यकता है। उन्होंने फसलों की उन्नत किस्मों के बीज की आपूर्ति का उल्लेख किया और बताया कि एचएयू की ओर से इन किस्मों का 35 हजार क्विंटल बीज किसानों को दिया जाएगा।
प्रदेश के प्रगतिशील किसान सम्मानित
हिसार के गांव सलेमगढ़ से विकास वर्मा, भिवानी के गांव लोहानी से अशोक शर्मा, फतेहाबाद के गांव धौलू से राधे श्याम, सिरसा की ढांणी शेरा से रमेश भादू , बावल के ढानी सुंदरोज से वेद प्रकाश, सोनीपत के गांव थाना खुर्द से सतेंद्र, पंचकूला के गांव ठरवा से संदीप, करनाल के गांव डबरी से गुरबाज सिंह, जींद से नवीन, यमुनानगर के गांव मारवा कलां से राम प्रताप सिंह, पानीपत के इसराना से पोरस, महेंद्रगढ़ के गांव ककराला से विरेंद्र सिंह, अंबाला के गांव खतौली से आदित्य जिंदल, कैथल के गांव चीका से अमित गोयल, रोहतक के गांव मडोदी से राजकुमार, पलवल के गांव औरंगाबाद से राकेश कुमार, कुरुक्षेत्र के पिहोवा से प्रकाश सिंह, फरीदाबाद के गांव बहादरपुर से कुलदीप कौशिक, झज्जर के गांव नांगली से जोगिंद्र गुलिया।