दंगल गर्ल्स गीता और बबीता फौगाट की ममेरी बहन रितिका ने केवल एक अंक से हारने पर अपनी जान दी थी। सोमवार रात रितिका ने अपने फूफा महाबीर फौगाट के गांव बलाली में फंदा लगाकर जान दे दी थी। रितिका स्टेट चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला सिर्फ एक अंक से अंतर से हार गई थी। इस हार से वह इतनी बुरी तरह टूट गई कि उसने अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली। वह 53 किलोग्राम भारवर्ग में खेल रही थी। इससे पहले वह करीब चार दफा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले चुकी थी। अचानक हुई इस घटना से पूरा परिवार सदमे में हैं। गीता और बबीता ने छोटी बहन की मौत पर सोशल मीडिया पर गम जाहिर किया। दोनों ने अपने श्रद्धांजलि में संघर्षों से हारकर जिंदगी छोड़ देने के फैसले को गलत बताया है।
विज्ञापन
2 of 5
रितिका
- फोटो : फाइल फोटो
अपनी बहनों गीता और बबीता की तरह ही अंतरराष्ट्रीय पहलवान बनने की चाह लेकर रितिका (17) अपने फूफा पहलवान महाबीर फौगाट की बलाली स्थित अकादमी में पांच साल से प्रशिक्षण ले रही थी। रितिका ने 12 से 14 मार्च तक भरतपुर के लोहागढ़ स्टेडियम में राज्य स्तरीय सब-जूनियर, जूनियर महिला और पुरुष कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लिया था। 14 मार्च को हुए फाइनल मुकाबले में रितिका हार गई थी। कुश्ती प्रतियोगिता में मिली हार के बाद से रितिका सदमे में थी। 15 मार्च रात 11:00 बजे उसने गांव बलाली में छत से लटक रहे पंखे पर दुपट्टे का फंदा लगाकर जान दे दी। रितिका के फूफा महावीर फौगाट ने बताया कि भरतपुर से गांव पहुंचने तक रास्ते में रितिका ने कुछ भी नहीं खाया। घर पर भी बिना कुछ खाए अपने कमरे में चली गई। रात 9 बजे जब रितिका की बुआ उसे खाना देने कमरे में गईं तब भी उसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद कमरे के रोशनदान से देखा तो रितिका ने फंदा लगाया था।
विज्ञापन
3 of 5
गीता फौगाट।
- फोटो : फाइल फोटो
गीता फौगाट ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान मेरी छोटी बहन मेरे मामा की लड़की रितिका की आत्मा को शांति दे। मेरे परिवार के लिए बहुत ही दुख की घड़ी है। रितिका बहुत ही होनहार पहलवान थी। पता नहीं क्यों उसने ऐसा कदम उठाया। हार-जीत खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा होता है। हमें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।
4 of 5
बेटियों के साथ महाबीर फौगाट।
- फोटो : फाइल फोटो
महाबीर सिंह फौगाट ने बताया कि जिस समय रितिका ने आत्महत्या की, उस समय कमरे का दरवाजा बंद था। जब परिजनों ने इस घटना के बारे में पुलिस को सूचित किया तो पुलिस ने ही आकर कमरे के दरवाजे को तोड़ा था। इसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई थी। इसके बाद पुलिस कर्मचारियों ने शव को फंदे से उतारा था। रितिका भरतपुर के लोहागढ़ स्टेडियम में 14 मार्च को फाइनल मुकाबले में भीलवाड़ा की पहलवान माया माली से हार गई थी। उसके फूफा महाबीर फौगाट भी वहां मौजूद थे। मुकाबले के बाद महाबीर फौगाट ने विजेता पहलवानों को सम्मानित भी किया था।
बबीता फौगाट ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान रितिका की आत्मा को शांति दे। यह समय पूरे परिवार के लिए बहुत ही दुख की घड़ी है। आत्महत्या कोई समाधान नहीं है। हार और जीत दोनों जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं। हारने वाला एक दिन जीतता भी जरूर है। संघर्ष ही सफलता की कुंजी है संघर्षों से घबराकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।