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एडीजीपी ने दी जान: DGP और रोहतक एसपी समेत 10 से अधिक अफसरों पर FIR, नोट में इनके नाम; किस अधिकारी पर क्या आरोप

Fri, 10 Oct 2025 11:36 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

एडीजीपी खुदकुशी मामले में डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया समेत 10 से ज्यादा अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। सुसाइड नोट के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस जल्द आरोपियों को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। 
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ADGP Suicide Case - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के 2001 बैच के एडीजीपी रैंक के आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने वीरवार रात डीजीपी शत्रुजीत कपूर समेत 10 से अधिक अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। सेक्टर 11 थाने में घटना के तीसरे दिन सुसाइड नोट के आधार पर धारा 108 आरडब्ल्यू 3(5) बीएनएस और 3(1)(आर) पीओए (एससी/एसटी) अधिनियम के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई। पूरण कुमार ने अपने सुसाइड नोट में डीजीपी शत्रुजीत कपूर, रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया समेत 10 से अधिक अधिकारियों पर उत्पीड़न, जातिगत प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान के आरोप लगाए थे। 
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चंडीगढ़ में आईपीएस अमनीत पी कुमार के निवास पर दुख प्रकट करने पहुंचे सीएम सैनी - फोटो : अमर उजाला
सुसाइड नोट के आधार पर केस दर्ज
इस मामले में पूरण कुमार की पत्नी आईएएस अमनीत पी कुमार ने बुधवार को सेक्टर 11 थाने में डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने की शिकायत दी थी। चंडीगढ़ पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट के आधार पर केस दर्ज करके सभी आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। जल्द आरोपियों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।

 
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एडीजीपी वाई पूरण कुमार की फाइल फोटो - फोटो : पीटीआई
अधिकारी आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं
वीरवार सुबह तक चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने से पहले कानूनी राय लेने की बात कह रहे थे लेकिन रात होते-होते एफआईआर दर्ज कर ली गई। इस मामले में कोई भी अधिकारी आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिन भी अधिकारियों पर सुसाइड नोट में आरोप लगाए गए हैं उन सभी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

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आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार और डीजीपी शत्रुजीत कपूर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सुसाइड नोट में इनका नाम शामिल
डीजीपी शत्रुजीत कपूर, एडीजीपी अमिताभ ढिल्लो, एडीजीपी संजय कुमार, आईजी पंकज नैन, आईपीएस कला रामचंद्रन, आईपीएस संदीप खिरवार, आईपीएस सिबार कविराज, पूर्व डीजीपी मनोज यादव, पूर्व डीजीपी पीके अग्रवाल, पूर्व मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद, एसपी नरेंद्र बिजारणिया और अन्य का नाम है।
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पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर - फोटो : संवाद
किस अधिकारी पर क्या आरोप लगाए गए थे
डीजीपी शत्रुजीत कपूर

पंचकूला में सरकारी आवास आवंटन के दौरान वाई पूरण कुमार के केस में अतिरिक्त नियम लगा दिए थे। आधिकारिक वाहन वापस ले लिया गया। डीजीपी कार्यालय की ओर से जानबूझकर गुमनाम शिकायत दी। वार्षिक रिपोर्ट में लिखित रूप में जातिवादी टिप्पणी की गई।

 
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एडीजीपी वाई पूरण कुमार ने गोली मार की खुदकुशी, मौके पर जांच करती पुलिस - फोटो : पीटीआई
एडीजीपी अमिताभ ढिल्लो 
आरटीआई के तहत जानकारी मांगने पर कार्यवाही करने की साजिश रचने व सार्वजनिक रूप से अपमानित व परेशान करने का आरोप।

एडीजीपी संजय कुमार 
सार्वजनिक रूप से परेशान और अपमानित करने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी व कपूर और ढिल्लों के साथ मिलकर प्रस्तावित विभागीय कार्यवाही की जानकारी मीडिया में लीक करने का आरोप

 
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एडीजीपी वाई पूरण कुमार ने अपने घर में गोली मार की खुदकुशी - फोटो : पीटीआई
आईजी पंकज नैन 
कपूर व ढिल्लों के साथ मिलकर निराधार व दुर्भावनापूर्ण शिकायतें तैयार करने का आरोप।

आईपीएस कला रामचंद्रन
डीजीपी के कहने पर झूठा हलफनामा दायर करने का आरोप।

 

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आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
आईपीएस संदीप खिरवार व सिबास कविराज
दोनों पर झूठे और परेशान करने वाले मामले में फंसाने की कोशिश।

पूर्व डीजीपी मनोज यादव, पूर्व डीजीपी पीके अग्रवाल, पूर्व मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद 
तीनों बैचमेंट अधिकारियों पर भेदभावपूर्ण, जाति आधारित मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का आरोप।

नरेंद्र बिजारणिया 
डीजीपी के कहने पर परेशान करने का आरोप
 

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एडीजीपी वाई पूरण कुमार के शव को लेकर जाती पुलिस - फोटो : पीटीआई
एडीजीपी के सुसाइड नोट में जिन-जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं उन सभी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।- कंवरदीप कौर, एसएसपी, चंडीगढ़

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चंडीगढ़ में आईपीएस अमनीत पी कुमार के निवास पर दुख प्रकट करने पहुंचे सीएम सैनी - फोटो : अमर उजाला
अमनीत सीएम से बोलीं- जब तक कार्रवाई नहीं, तब तक पोस्टमार्टम और संस्कार नहीं होगा
इससे पहले जापान दौरे से लौटे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वीरवार दोपहर 12.28 बजे एयरपोर्ट से सीधे सेक्टर 24 स्थित अमनीत पी कुमार के सरकारी आवास पर पहुंचे। अमनीत ने वीरवार को मुख्यमंत्री के सामने स्पष्ट कहा कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सिस्टम ने पूरण कुमार की हत्या की है। जब तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तब तक पूरण कुमार के शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं होगा।

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एडीजीपी वाई पूरण कुमार के शव को देख बिलखते परिजन - फोटो : पीटीआई
मुख्यमंत्री यहां करीब 44 मिनट तक रुके। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने लगभग 20 मिनट तक अमनीत पी कुमार से बातचीत की। इस दौरान अमनीत ने कहा कि सुसाइड नोट में उनके पति को प्रताड़ित करने का जिक्र है। इसके बाद साजिश के तहत रोहतक में मुकदमा करवाकर उनकी छवि को भी खराब किया गया। 

 

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चंडीगढ़ में आईपीएस अमनीत पी कुमार के निवास पर दुख प्रकट करने पहुंचे सीएम सैनी - फोटो : अमर उजाला
इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के साथ उनकी गिरफ्तारी की जाए। अमनीत ने कहा कि उनके परिवार को भी खतरा है। खासकर उनकी बेटियों की आजीवन सुरक्षा सरकार की ओर से सुनिश्चित की जाए। इस दौरान सीएम के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, सीआईडी चीफ सौरभ सिंह सहित दो अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी मौजूद थे।
 

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एडीजीपी वाई पूरण कुमार की फाइल फोटो - फोटो : पीटीआई
अनुसूचित जाति आयोग ने चंडीगढ़ के मुख्य सचिव व डीजीपी से सात दिन में मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने वाई पूरण कुमार की आत्महत्या के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने चंडीगढ़ के मुख्य सचिव और चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने को कहा है। आयोग ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मामले में पूछताछ करने का निर्णय लिया है।

 

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मूवी थिएटर में इसी सोफे पर बैठ मारी गोली - फोटो : पीटीआई
आयोग ने स्पष्ट किया है कि चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से भेजी जाने वाली रिपोर्ट में सभी आरोपियों के नाम, एफआईआर संख्या, तारीख और धाराएं, आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को दी गई मुआवजा राशि को जरूर शामिल किया जाए।
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बिलखते परिजन - फोटो : पीटीआई
आयोग की ओर से मुख्य सचिव व डीजीपी को भेजे गए पत्र में कहा गया है यदि आयोग को निर्धारित समय के भीतर आपसे कोई जवाब नहीं मिलता है तो आपको व्यक्तिगत या आपके प्रतिनिधि को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए समन जारी किया जा सकता है।


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