उपन्यास और कहानियों के सम्राट कहे जाने वाले मुंशी प्रेमचंद का गोरखपुर से गहरा नाता रहा। उनका बचपन शहर की गलियों में बीता ही था लेकिन जब वह नौकरी के दौरान गोरखपुर आए तो शहर के बेतियाहाता स्थित निकेतन में पांच साल रहकर उन्होंने अपनी दो मशहूर कहानियां लिखी थीं।
धनपत राय ‘मुंशी प्रेमचंद’ का बचपन गोरखपुर के तुर्कमानपुर मोहल्ले में ही बीता था, शिक्षा विभाग की नौकरी के दौरान उनका तबादला हुआ तो वह 1916 में गोरखपुर दोबारा आए। उन्होंने बेतियाहाता स्थित मुंशी प्रेमचंद पार्क में स्थित निकेतन को अपना आशियाना बनाया। उसके बाद वह इस निकेतन में तबतक रहे, जब तक उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र नहीं दे दिया।