दिल्ली के वसंत विहार गैंगरेप के चश्मदीद और निर्भया के दोस्त अवनींद्र पांडेय आज भी उस घटना की याद आने से सिहर जाते हैं। उस घटना पर बात करते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं।
उन्हें इस बात का मलाल है कि जिसे दोस्त कहा, उसे दरिंदों से बचा नहीं पाया।‘हर पल एक दर्द सताता है कि दोस्ती अधूरी रह गई। दोस्त का हर पल साथ देने का वादा टूट गया। काश, मैं उसे बचा पाता। कहीं न कहीं दिल में हर पल अपराध बोध होता है कि राजधानी पहले जागी होती तो वो हमारे बीच होती।’
वारदात वाली रात के करीब एक साल बाद बीबीसी को दिए इंटरव्यू में अवनींद्र ने कहा था कि हर गुजरते दिन ने उन्हें उस रात की दरिंदगी का एहसास कराया है जो निर्भया ने महसूस किया होगा। वो कहते हैं, "जो मेरी दोस्त के साथ हुआ वो एक बुरे सपने की तरह था। घटना के बाद पुलिस स्टेशन जाना, अभियुक्तों की पहचान करना, अदालत जाना, परिवार का दुख बांटना, मेरे साथ जो कुछ हुआ वो बहुत चुनौतीपूर्ण था।"
वो कहते हैं, "मुझे हमेशा ऐसा लगता था कि मैं कुछ ऐसा नहीं करूं कि मैं कमज़ोर कहा जाऊं। दूसरों को कुछ कहने का मौका नहीं दूं। मैं कुछ ऐसा करके दिखाऊं कि लोगों का मेरे बारे में एक अलग नज़रिया बने।" लेकिन खुद को मज़बूत दिखाने की कोशिश करने वाले इस व्यक्ति के लिए उस रात की घटनाओं को दिमाग से निकाल देना जैसे असंभव है।