बिंदी शुरुआत से ही भारतीय महिलाओं के शृंगार का अहम हिस्सा रही है। अन्य सौंदर्य सामग्रियों की तरह पुराने जमाने में डिजाइनर बिंदी का चलन नहीं था। पहले महिलाएं कुमकुम का इस्तेमाल करती थीं। धीरे-धीरे कुमकुम की जगह स्टिकर बिंदी ने ले ली और फिर बाजार में कई तरह की डिजाइनर बिंदियां आ गईं।
हालांकि पुराने जमाने की महिलाओं के पास विकल्पों की कमी थी। कम ही क्रीम, पाउडर बाजार में आते थे। इसलिए वे एक ही प्रोडक्ट के प्रति वफादार रहती थीं। आजकल की औरतें आए दिन नए-नए प्रोडक्ट इस्तेमाल करती हैं। इसलिए जब तक उनकी स्किन एक प्रोडक्ट की आदी होती है, वे दूसरा शुरू कर देती हैं, जिसका नुकसान होता है, फायदा नहीं।