6 अप्रैल से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो मां दुर्गा की पूजा हमेशा ही नियमों के साथ की जाती है लेकिन नवरात्रि में कुछ विशेष बातों का खास ख्याल रखा जाता है। मां का हर भक्त नवरात्रि के दौरान उनकी भक्ति कर उन्हें खुश करने की कोशिश करता है। नवरात्रि में मां दुर्गा के सोलह श्रृंगार का भी बहुत महत्व है। आपने कई बार घर की बड़ी बुजुर्ग महिलाओं को किसी भी त्योहार पर बहुओं को श्रृंगार करने की सलाह देते हुए सुना होगा, लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं?
बता दें, सोलह श्रृंगार घर में सुख और समृद्धि लाने के लिए किया जाता है। ऋग्वेद में भी सोलह श्रृंगार का जिक्र किया गया है। जिसमें कहा गया है कि सोलह श्रृंगार सिर्फ खूबसूरती ही नहीं भाग्य को भी बढ़ाता है। महिलाएं मां भगवती को खुश करने के लिए इस पावन पर्व पर ये श्रृंगार करती हैं। आइए जानते हैं आखिर कौन-कौन से हैं ये श्रृंगार...
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bindi
बिंदी
प्राचीन काल से भारतीय महिलाएं विशेष रूप से अपने माथे पर बिंदी लगाती आई है। यह महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगाने का काम करती है। इसके अलावा इसे परिवार की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। माथे पर कुमकुम या बिंदी को लगाना पवित्र होता है। आज के समय में स्टीकर बिंदी का चलन है, तो आप चाहें तो इसे भी लगा सकती हैं।
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sindoor
सिंदूर
मां दुर्गा की पूजा में सिंदूर का इस्तेमाल मां के श्रृंगार के लिए किया जाता है। इसके बाद में उस सिंदूर को विवाहित महिलाएं अपनी मांग में शिरोधार्य करती हैं। सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सिंदूर लगाने से पति की आयु में वृद्धि होती है।
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apply kajal
काजल
चेहरे की सबसे खूबसूरत चीज और मन का आइना होती हैं आपकी आंखें, जिनका श्रृंगार होता है काजल। यह महिलाओं की आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाती हैं। इसके अलावा काजल बुरी नजर से भी बचाए रखता है।
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mehandi design
मेहंदी
किसी भी त्योहार और शुभ कार्यक्रम से पहले महिलाएं हाथों और पैरों मे मेहंदी रचाती हैं। ऐसा माना जाता है कि नववधू के हाथों में मेहंदी जितनी गाढ़ी रचती है, उसका पति उसे उतना ही अधिक प्रेम करता है। मेहंदी के बिना हर सुहागन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है।
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Banarasi Saree
लाल रंग का जोड़ा
माता रानी को लाल रंग बहुत प्रिय होता है। माता को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में पूजा करते वक्त रोजाना लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
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gajra
गजरा
मां दुर्गा को मोगरे का गजरा बहुत प्रिय है। इसके लिए आप जूड़ा बनाकर उस पर गजरा लगा सकती हैं या फिर चोटी बनाकर भी इसे बालों के ऊपर बांध सकती हैं। यह बालों को संवारने के साथ उनकी सुंदरता बढ़ाने का काम भी करता है।
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beauty
मांग टीका
माथे के बीचों-बीच पहने जाने वाला यह आभूषण सिंदूर के साथ मिलकर हर लड़की की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। ऐसा माना जाता है कि नववधू को मांग टीका सिर के बीचों-बीच इसलिए पहनाया जाता है ताकि वह शादी के बाद हमेशा अपने जीवन में सही और सीधे रास्ते पर चले।
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beauty
नथ
सुहागिन स्त्रियों के लिए नाक में आभूषण पहनना अनिर्वाय माना जाता है। आम तौर पर स्त्रियां नाक में छोटी नोजपिन पहनती हैं, जिसे लौंग कहा जाता है।
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jhumke
कानों में झुमके
कान में पहने जाने वाला यह आभूषण चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने का काम करता है। इसे पहनने से महिलाओं का चेहरा खिल उठता है। मान्यता है कि विवाह के बाद बहू को खासतौर से पति और ससुराल वालों की बुराई करने और सुनने से दूर रहना चाहिए।
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mangalsutra
मंगल सूत्र
शादीशुदा महिला का सबसे खास और पवित्र गहना मंगल सूत्र माना जाता है। इसके काले मोती महिलाओं को बुरी नजर से बचाते हैं।
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bajuband
बाजूबंद
कड़े के सामान आकृति वाला यह आभूषण सोने या चांदी का होता है। यह बाहों में पूरी तरह कसा जाता है। इसलिए इसे बाजूबंद कहा जाता है। पहले सुहागिन स्त्रियों को हमेशा बाजूबंद पहने रहना अनिवार्य माना जाता था। ऐसी मान्यता है कि स्त्रियों को बाजूबंद पहनने से परिवार के धन की रक्षा होती है।
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bangels
चूड़ियां
चूड़ियां सुहाग का प्रतीक मानी जाती हैं। ऐसा माना जात है कि सुहागिन स्त्रियों की कलाइयां चूड़ियों से भरी हानी चाहिए। चूड़ियों के रंगों का भी विशेष महत्व है।
लाल रंग की चूड़ियां इस बात का प्रतीक होती हैं कि विवाह के बाद वह पूरी तरह खुश और संतुष्ट है। हरा रंग शादी के बाद उसके परिवार के समृद्धि का प्रतीक है।
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copper ring
अंगूठी
शादी के पहले मंगनी या सगाई के रस्म में वर-वधू द्वारा एक-दूसरे को अंगूठी को सदियों से पति-पत्नी के आपसी प्यार और विश्वास का प्रतीक माना जाता रहा है। हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथ रामायण में भी इस बात का उल्लेख मिलता है।
सीता का हरण करके रावण ने जब सीता को अशोक वाटिका में कैद कर रखा था तब भगवान श्रीराम ने हनुमानजी के माध्यम से सीता जी को अपना संदेश भेजा था। तब स्मृति चिन्ह के रूप में उन्होंनें अपनी अंगूठी हनुमान जी को दी थी।
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kamarband
कमरबंद
कमरबंद कमर में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसे स्त्रियां विवाह के बाद पहनती हैं, जिसमें नववधू चाबियों का गुच्छा अपनी कमर में लटकाकर रखती है। कमरबंद इस बात का प्रतीक है कि सुहागन अब अपने घर की स्वामिनी है।
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bichua
बिछुआ
पैरों के अंगूठे और छोटी अंगुली को छोड़कर बीच की तीन अंगुलियों में चांदी का बिछुआ पहना जाता है। शादी में फेरों के वक्त लड़की जब सिलबट्टे पर पैर रखती है, तो उसकी भाभी उसके पैरों में बिछुआ पहनाती है।
यह रस्म इस बात का प्रतीक है कि दुल्हन शादी के बाद आने वाली सभी समस्याओं का हिम्मत के साथ मुकाबला करेगी।
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anklet
पायल
पैरों में पहने जाने वाले आभूषण हमेशा सिर्फ चांदी से ही बने होते हैं। हिंदू धर्म में सोना को पवित्र धातु का स्थान प्राप्त है, जिससे बने मुकुट देवी-देवता धारण करते हैं और ऐसी मान्यता है कि पैरों में सोना पहनने से धन की देवी-लक्ष्मी का अपमान होता है।
जैसे शास्त्रों में शादीशुदा महिला के लिए लाल रंग को बहुत शुभ माना जाता है। जिस तरह यह रंग शादीशुदा महिलाओं के जीवन में खुशियां और सौभाग्य का प्रतीक है ठीक उसी तरह एक रंग ऐसा भी है जिसे नवरात्रि में पहनना वर्जित माना गया है और वो है काला रंग।
किसी भी पूजा में काले रंग के कपड़ों को पहनना अशुभ माना जाता है। अगर आप चाहते हैं कि माता रानी की कृपा आप पर बनी रहे तो इस बात का खास ख्याल रखें कि पूजा करते समय काले कपड़ों को न पहनें।