इन बातों को कहने का उनका यह मकसद है कि आप जैसी भी हैं खुद को स्वीकार करें। मौली का कहना है- 'जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ रही है, वैसे वैसे मैं अब समझने लगी हूं कि मेरे लिए सबसे ज्यादा क्या सही है। मैं खुद पर भरोसा करना चाहती हूं। मैं बहुत कुछ चाहती हूं और ये भी जानती हूं कि मुझे कब रुकना है।'