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क्यों आज भी चुनौती है साड़ी पहनना? जानिए साड़ी की दुनिया की रोचक बातें

Sun, 30 Jun 2019 07:31 AM IST
मोना नारंग फैशन डेस्क, अमर उजाला
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sari - फोटो : Instagram
साड़ी भारतीय संस्कृति से जुड़ा एक बेहद खास परिधान है। भारत समेत श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे एशियाई देशों में महिलाओं द्वारा साड़ी पहनने का प्रचलन है। साड़ी की लोकप्रियता आज इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि बड़े फैशन डिजाइनर भी विदेशों में साड़ी स्पेशल मॉडलिंग ईवेंट करवा रहे हैं। आइए आपको साड़ी से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताते हैं।
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sari - फोटो : Instagram
क्या होती है साड़ी
साड़ी दुनिया की सबसे लंबे और पुराने परिधानों में से एक है। यह आदिकाल से भारतीयता की पहचान भी है। इसकी लंबाई सभी परिधानों से ज्यादा है। साड़ी के बॉर्डर और पल्लू पर थोड़ी बहुत कढ़ाई (एंब्रॉयडरी) देखी जा सकती है। पल्लू पर भारी-भरकम कारीगरी होने की वजह से महिलाएं इसे बदन पर आसानी से लपेट पाती हैं।  वैसे तो बाजार में कॉटन, सिल्क और सिंथेटिक फाइबर से बनी साड़ियां ही लोगों की पहली पसंद होती हैं, लेकिन 700 रुपये से कम में मिलने वाली ज्यादातर साड़ियां पॉलिस्टर की होती हैं, जिसे शरीर के लिए सही नहीं माना जाता।
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saree
साड़ी बांधने का तरीका
साड़ी बांधने की कला को ड्रेपिंग कहा जाता है। आपने महिलाओं को सिर्फ एक तरह से साड़ी बांधते देखा होगा, जबकि साड़ी बांधने के 100 से भी ज्यादा तरीके हैं। आमतौर साड़ी बांधने का जो तरीका महिलाओं द्वारा अपनाया जाता है, उसे निवी ड्रेप कहते हैं।

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jeans saari
साड़ी की लंबाई
वैसे तो एक साड़ी की औसत लंबाई 3.5 गज से 9 गज तक होती है, लेकिन इसे बांधने के विभिन्न तरीकों पर भी निर्भर करता है कि इसके एक टुकड़े की लंबाई कितनी होनी चाहिए. इसलिए यह 9 गज से ज्यादा भी हो सकती है।
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white saari
साड़ी पहनने का आलस
यह बात सही है कि ज्यादातर महिलाओं को साड़ी पहनना रॉकेट लॉन्च करने से भी मुश्किल काम लगता है। जबकि ऐसी कई महिलाएं हैं जिनके वॉर्डरॉब में साड़ी के अलावा कोई दूसरा विशेष परिधान नजर ही नहीं आता। वे रोजाना सिर्फ साड़ी कैरी करना ही पसंद करती हैं। एक सर्वे में पता चला कि भारत में करीब 95 प्रतिशत महिलाएं किसी दूसरी महिला से साड़ी पहनना ज्यादा बेहतर विकल्प समझती हैं।
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alia bhatt
ब्लाउज और पेटीकोट के बिना साड़ी
ब्रिटिशकाल से पहले भारत में बिना ब्लाउज और पेटीकोट के ही साड़ी पहनी जाती थी। लेकिन बाद में एक युग ऐसा भी आया जिसमें महिलाओं ने पहली बार साड़ी के साथ ब्लाउज और पेटीकोट पहनना शुरू किया। मौजूदा दौर में इन दो चीजों के बिना साड़ी पहनना मुश्किल है, लेकिन सही मायनों में इनके बिना भी साड़ी पहनी जा सकती है।
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deepika padukone - फोटो : social media
साड़ी पर हाथ से कढ़ाई
आज साड़ी सिर्फ एक कपड़े का टुकड़ा नहीं रह गया है, बल्कि इसके बॉर्डर और पल्लू को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए हाथ से कढ़ाई या एम्बॉयडरी भी की जाती है, जिससे देशभर में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।टेक्सटाइल मिनिस्ट्री की 2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक साड़ी पर हाथ से कढ़ाई करने वाले देश के करीब एक करोड़ से भी ज्यादा बुनकरों को रोजगार मिला है।

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anushka virat
पश्चिमी वेशभूषा से साड़ी में आया फीकापन
इसमें कोई दोराय नहीं कि पश्चिमी सभ्यता की वजह से न सिर्फ हमारा खान-पान बल्कि पहनने ओढ़ने का तरीका भी बदला है। आज महिलाएं शॉपिंग करते वक्त जींस, स्कर्ट या पैंट पहनना ज्यादा पसंद करने लगी हैं। जबकि साड़ियों को किसी विशेष महोत्सव के लिए अलमारी में सजाकर रख दिया है। इससे न सिर्फ देश में कपड़ा उद्योग बल्कि बुनकरों को भी काफी नुकसान हुआ है।

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sonam kapoor
साड़ी की खासियत
भले ही आज गाउन, स्कर्ट और लहंगा पार्टियों की शान बढ़ा रहे हैं, लेकिन इस बात को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि साड़ी एक बेहद खास परिधान है। पार्टी में इसे पहनने वाली महिला ज्यादा नोटिस की जाती हैं। उनसे जुड़े खास लम्हें भी लोगों को लंबे वक्त तक याद रहते हैं।
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Jacqueline saree - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
साड़ी संभालने की कला
कई महिलाओं को साड़ी संभालना टेढ़ी खीर लगता है। साड़ी बंधवाते वक्त वह दर्जनों सेफ्टी पिन का इस्तेमाल करती हैं। जबकि साड़ी को अगर सही ढंग से कैरी किया जाए तो किसी तरह के सेफ्टी पिन की जरूरत नहीं पड़ती। सेफ्टी पिन साड़ी के कपड़े को भी नुकसान पहुंचाती है।
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